सुप्रीम कोर्ट में तीखी नोकझोंक के बाद छीना गया माइक: जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन मामले से वरिष्ठ वकील ने खुद को किया अलग

सुप्रीम कोर्ट में तीखी नोकझोंक के बाद छीना गया माइक: जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन मामले से वरिष्ठ वकील ने खुद को किया अलग

देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) के कोर्ट रूम में उस वक्त अप्रत्याशित और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन और हिरासत से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दो वकीलों के बीच तीखी बहस हो गई। गर्मागर्म बहस इस हद तक बढ़ गई कि एक वकील ने दूसरे वकील के हाथ से पोडियम पर लगा माइक ही छीन लिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम और अदालत कक्ष के भीतर मर्यादा टूटने से आहत होकर वरिष्ठ अधिवक्ता ने खुली अदालत में मामले से खुद को अलग (Recuse/Withdraw) करने का ऐलान कर दिया। मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष घटी इस घटना ने कोर्ट रूम के भीतर अनुशासन और अदालती शिष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या था पूरा मामला और कैसे भड़की तकरार?

यह मामला दिल्ली के ऐतिहासिक विरोध स्थल जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शनों, पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और वहां विरोध-प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई से संबंधित था:

  • दलीलों के बीच दखलअंदाजी: सुनवाई के दौरान जब एक पक्ष के वकील पीठ के सामने अपनी दलीलें रख रहे थे, तभी उसी पक्ष से जुड़े दूसरे वकील ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए अपनी बात रखनी शुरू कर दी।

  • माइक छीनने की नौबत: दोनों वकीलों के बीच पहले से केस की पैरवी और रणनीति को लेकर मतभेद था। जब एक वकील अपनी बात पूरी करने पर अड़े रहे, तो दूसरे वकील ने तैश में आकर उनके हाथ से माइक खींच लिया ताकि वे अपनी बात जजों तक पहुंचा सकें।

  • कोर्ट रूम में सन्नाटा: सर्वोच्च न्यायालय के कक्ष में इस तरह माइक खींचे जाने की घटना से वहां मौजूद अन्य अधिवक्ता और याचिकाकर्ता हतप्रभ रह गए। माहौल में अचानक भारी तनाव उत्पन्न हो गया।

'मैं ऐसे माहौल में पैरवी नहीं कर सकता': वकील ने जताया कड़ा ऐतराज

माइक छीने जाने की अशोभनीय घटना से क्षुब्ध होकर संबंधित वकील ने तुरंत अदालत से क्षमा मांगी और कहा कि यदि कोर्ट रूम के भीतर गरिमा और परस्पर सम्मान ही कायम नहीं रहेगा, तो वे इस मामले में आगे पैरवी जारी नहीं रख सकते। उन्होंने पीठ से मुखातिब होते हुए कहा:

"अदालत की एक गरिमा और मर्यादा होती है। जब साथी वकील ही सुनवाई के दौरान माइक छीनने जैसी हरकत पर उतर आएं, तो यह न केवल पेशेवर आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि न्यायालय का भी अनादर है। मैं भारी मन से खुद को इस केस की सुनवाई से तुरंत प्रभाव से अलग करता हूं।"

इसके बाद वकील ने अपनी फाइलें समेटीं और पीठ की अनुमति लेकर पोडियम से हट गए।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जताई नाराजगी, संयम बरतने की दी हिदायत

अदालत कक्ष में घटे इस घटनाक्रम पर पीठ ने भी गहरी अप्रसन्नता और नाराजगी व्यक्त की। जजों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बहस और विधिक तर्कों का सर्वोच्च मंच है, न कि व्यक्तिगत टकराव का अखाड़ा।

  • अदालती शिष्टाचार का पाठ: पीठ ने स्पष्ट किया कि वकीलों को अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए और कोर्ट रूम के भीतर संयम व शालीनता बनाए रखनी चाहिए।

  • अनावश्यक हंगामे से बचें: पीठ ने वकीलों को कड़ी चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी पक्ष द्वारा अगर इस तरह का गैर-पेशेवर आचरण दोहराया गया, तो अदालत अवमानना या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले की सुनवाई पर क्या पड़ा असर?

अधिवक्ता के केस से अचानक हटने और हंगामे के चलते मामले की मेरिट पर होने वाली विस्तृत बहस बाधित हो गई। अदालत ने शेष पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे आपस में समन्वय स्थापित करें और तय करें कि मुख्य दलीलें कौन रखेगा। इसके बाद पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई को स्थगित करते हुए अगली तारीख तय कर दी। कानूनी गलियारों में इस घटना की व्यापक चर्चा हो रही है और बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भी अदालत कक्ष के भीतर ऐसे आचरण को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।