'कायरों के जाने के बाद कांग्रेस में सिर्फ शेर बचे', राहुल के बयान पर खरगे की चुटकी: 'वे सब तो आपके ही दोस्त थे'
कांग्रेस मुख्यालय में यूथ कांग्रेस (IYC), एनएसयूआई और सेवा दल के कार्यकर्ताओं के साथ आयोजित संवाद बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच एक बेहद दिलचस्प और हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली। बैठक में जब राहुल गांधी कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी या अन्य दलों में जाने वाले पूर्व दिग्गज नेताओं पर तीखा हमला बोल रहे थे, तभी मंच पर पास बैठे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अचानक चुटकी ले ली। खरगे ने तंज कसते हुए कहा, "लेकिन राहुल जी, जो लोग पार्टी छोड़कर गए हैं, वे आखिरकार आपके ही तो दोस्त थे।" खरगे की इस त्वरित और हाजिरजवाबी से पूरे हॉल में हंसी की लहर दौड़ गई, जबकि राहुल गांधी कुछ पलों के लिए हल्के असहज नजर आए।
राहुल गांधी ने दलबदलुओं पर साधा था निशाना: 'कायर और लालची चले गए, अब सिर्फ शेर बचे'
दरअसल, यह पूरा वाकया उस समय शुरू हुआ जब राहुल गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विचारधारा और निष्ठा का महत्व समझा रहे थे। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस छोड़ने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद जैसे नेताओं का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए कहा:
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ईडी-सीबीआई का डर और निजी स्वार्थ: राहुल ने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर गए, वे या तो अत्यधिक लालची थे या फिर कायर व डरपोक थे। उनमें से कुछ लोग सत्ता सुख, सुविधाओं और सुरक्षा की तलाश में भाग गए, तो कई नेता प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के छापों और मुकदमों के डर से झुक गए।
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अब सिर्फ 'बब्बर शेर' बचे हैं: राहुल ने वफादार कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि कायरों और अवसरवादियों के जाने के बाद कांग्रेस पूरी तरह शुद्ध हो गई है और अब संगठन में केवल 'बब्बर शेर' बचे हैं जो भाजपा और आरएसएस की विचारधारा से डटकर मुकाबला कर रहे हैं।
खरगे के तंज पर राहुल की सफाई: 'प्रियंका गवाह हैं कि वे मेरे दोस्त नहीं थे'
मल्लिकार्जुन खरगे की 'दोस्त' वाली टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने तुरंत बात संभालते हुए सभागार में मौजूद अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर इशारा किया। राहुल ने कहा, "मेरी बहन प्रियंका यहीं बैठी हैं, इन्हें अच्छी तरह मालूम है कि पार्टी छोड़कर जाने वाले वे लोग मेरे दोस्त नहीं थे।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राजनीतिक रिश्तों और चेहरों को पहचानने में कई बार मानवीय गलतियां हो जाती हैं।
दादी इंदिरा गांधी का सुनाया किस्सा: 'राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी का भ्रम'
इस मौके पर राहुल गांधी ने अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री और अपनी दादी इंदिरा गांधी से जुड़ा एक पुराना संस्मरण साझा किया:
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उन्होंने बताया कि बचपन में उन्होंने एक बार दादी इंदिरा गांधी से पूछा था कि राजनीति में आपकी सबसे अच्छी दोस्त कौन हैं? इस पर इंदिरा गांधी ने स्पष्ट जवाब दिया था कि उनका कोई पक्का दोस्त नहीं है।
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जब राहुल ने घर पर अक्सर आने वाली एक महिला का जिक्र किया, तो इंदिरा गांधी ने समझाया कि हो सकता है वह महिला मुझे अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती हो, लेकिन सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में चीजें वैसी नहीं होतीं जैसी दिखती हैं।
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राहुल ने कहा, "राजनीति में जो आपका घनिष्ठ दोस्त दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि वह असल में आपका सच्चा दोस्त हो। और जो बाहर से आपका घोर विरोधी नजर आ रहा है, जरूरी नहीं कि वह दिल से आपका दुश्मन ही हो। राजनीति में असली दोस्त को पहचान पाना सबसे कठिन काम है।'
राहुल ने की खरगे की निष्ठा की तारीफ: 'दो बार सीएम बनते-बनते चूके, पर पार्टी नहीं छोड़ी'
अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की दृढ़ वैचारिक निष्ठा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि खरगे जी कर्नाटक में दो बार मुख्यमंत्री बनने की दहलीज पर आकर चूक गए, लेकिन उन्होंने कभी पार्टी से बगावत नहीं की और न ही अपनी विचारधारा से कोई समझौता किया। उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि सत्ता संघर्ष और विरोध-प्रदर्शन उनके राजनीतिक प्रशिक्षण का हिस्सा हैं और वे मुकदमों या जेल जाने से डरे बिना सड़कों पर संघर्ष जारी रखें।