अगले प्रधानमंत्री के लिए कौन है देश की पहली पसंद? 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में थलपति विजय की तीसरे नंबर पर धमाकेदार एंट्री ने सबको चौंकाया; मोदी और राहुल के बाद ममता-केजरीवाल को पछाड़ा

अगले प्रधानमंत्री के लिए कौन है देश की पहली पसंद? 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में थलपति विजय की तीसरे नंबर पर धमाकेदार एंट्री ने सबको चौंकाया; मोदी और राहुल के बाद ममता-केजरीवाल को पछाड़ा

देश में भले ही अगले आम चुनाव (2029) में अभी लंबा वक्त बाकी हो, लेकिन भारतीय राजनीति का भविष्य किस दिशा में करवट ले रहा है, इसको लेकर जनता की नब्ज सामने आ गई है। इंडिया टुडे और सी-वोटर द्वारा किए गए प्रतिष्ठित 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) के ताजा राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण ने देश के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नरेंद्र मोदी आज भी देशवासियों की पहली पसंद बने हुए हैं और राहुल गांधी का ग्राफ भी मजबूत हुआ है। लेकिन इस पूरे सर्वे का सबसे बड़ा, चौंकाने वाला और ऐतिहासिक पहलू रहा दक्षिण के सुपरस्टार और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के संस्थापक सी. जोसेफ 'थलपति' विजय का देश के शीर्ष तीन प्रधानमंत्री चेहरों में सीधे शुमार हो जाना। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे स्थापित राष्ट्रीय क्षत्रपों को पछाड़ते हुए विजय की इस राष्ट्रीय एंट्री ने उत्तर से लेकर दक्षिण तक नए सियासी समीकरणों को जन्म दे दिया है।

पीएम मोदी शीर्ष पर बरकरार, राहुल गांधी दूसरे पायदान पर; पर असली धमाका थलपति विजय का

सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, जब देश भर के मतदाताओं से यह सीधा सवाल पूछा गया कि "भारत के अगले प्रधानमंत्री के लिए सबसे उपयुक्त और पसंदीदा नेता कौन है?" तो 48.7 प्रतिशत लोगों ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर अपनी पहली मुहर लगाई। केंद्र में एक दशक से अधिक का कार्यकाल पूरा करने के बावजूद पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ राष्ट्रीय स्तर पर सबसे मजबूत बना हुआ है।

वहीं, मुख्य विपक्षी चेहरे के रूप में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 27.1 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर मजबूती से उभरे हैं। पिछले कुछ सालों की तुलना में राहुल गांधी के व्यक्तिगत प्रभाव में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है।

लेकिन इस सर्वे ने जिस आंकड़े से विश्लेषकों को स्तब्ध किया, वह था थलपति विजय को मिला 9.2 प्रतिशत का भारी जनसमर्थन। विजय ने राष्ट्रीय फलक पर पहली बार कदम रखते हुए सीधे तीसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (2.0%), समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (1.7%), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (1.3%) और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल (1.2%) जैसे कद्दावर नेताओं को काफी पीछे छोड़ दिया है।

विपक्ष का नेतृत्व कौन करे? इस सवाल पर भी विजय बने राहुल के बाद दूसरी पसंद

सर्वे में विजय का दबदबा केवल प्रधानमंत्री पद की व्यक्तिगत पसंद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्षी खेमे के नेतृत्व को लेकर भी जनता ने उन पर बड़ा भरोसा जताया है। जब उत्तरदाताओं से पूछा गया कि "वर्तमान में विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक/विपक्ष) का नेतृत्व करने के लिए कौन सा नेता सबसे योग्य है?" तो यहां भी विजय ने दिग्गज नेताओं को पछाड़ दिया।

इस श्रेणी में कांग्रेस के राहुल गांधी 29.0 प्रतिशत वोटों के साथ शीर्ष पर रहे, लेकिन उनके ठीक पीछे 12.2 प्रतिशत समर्थन के साथ थलपति विजय दूसरे सबसे पसंदीदा विपक्षी नेता बनकर उभरे। इस सवाल पर ममता बनर्जी को 8.5 प्रतिशत, अरविंद केजरीवाल को 7.5 प्रतिशत और अखिलेश यादव को 6.9 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि गैर-भाजपा राजनीति में जनता अब पारंपरिक क्षेत्रीय चेहरों से आगे बढ़कर एक नए, ऊर्जावान और बेदाग विकल्प की तलाश कर रही है।

सिल्वर स्क्रीन से सीधे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक: TVK के '2029 विजन' को मिला बल

सिनेमा के पर्दे पर दशकों तक राज करने के बाद 2024 में 'तमिलगा वेत्री कषगम' (TVK) की स्थापना कर औपचारिक राजनीति में उतरे थलपति विजय का यह उभार अभूतपूर्व माना जा रहा है। भारतीय राजनीति में बहुत कम ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां किसी नवगठित क्षेत्रीय दल के नेता ने अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दौर में ही सीधे राष्ट्रीय विमर्श में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी हो।

हाल के दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने खुले मंच से विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव में देश के प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के तौर पर पेश करना शुरू किया था। तमिलनाडु विधानसभा में मंत्रियों द्वारा विजय को 'भविष्य का प्रधानमंत्री' और 'तमिलनाडु से देश का अगला नेतृत्व' बताए जाने पर विपक्षी दलों ने इसे केवल क्षेत्रीय अति-उत्साह करार दिया था। हालांकि, सी-वोटर के इस राष्ट्रव्यापी सर्वे ने साबित कर दिया है कि विजय की यह लोकप्रियता केवल तमिलनाडु या भाषाई सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के एक बड़े हिस्से में उन्हें एक राष्ट्रीय विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है।

कांग्रेस और क्षेत्रीय क्षत्रपों के लिए नए सियासी मायने

सर्वे के इस परिणाम ने विपक्षी गठबंधन और खासकर कांग्रेस पार्टी के थिंक टैंक को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। तमिलनाडु में भले ही राजनीतिक धरातल पर टीवीके और कांग्रेस के बीच कूटनीतिक संतुलन बना हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विजय को मिला 9.2% समर्थन सीधे तौर पर गैर-एनडीए वोट बैंक के उस हिस्से से जुड़ा है जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस या क्षेत्रीय दिग्गजों की तरफ देखता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर भारत के पारंपरिक क्षत्रपों जैसे सपा, आप और टीएमसी के राष्ट्रीय विस्तार की सीमाओं के बीच दक्षिण भारत से एक सर्वमान्य, धर्मनिरपेक्ष और करिश्माई व्यक्तित्व का राष्ट्रीय विमर्श में आना भारतीय राजनीति के शक्ति संतुलन को बदल सकता है। दक्षिण भारत से दशकों बाद किसी नेता का राष्ट्रीय स्तर पर पीएम पद की शीर्ष 3 पसंद में शामिल होना यह संकेत देता है कि देश के मतदाता अब भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर नेतृत्व को आंक रहे हैं।

कैसे हुआ यह देशव्यापी सर्वेक्षण?

इंडिया टुडे और सी-वोटर का यह 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे 1 जुलाई से 25 अगस्त के बीच आयोजित किया गया था। इस दौरान देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 25,184 मतदाताओं से प्रत्यक्ष और टेलीफोनिक बातचीत के जरिए वैज्ञानिक तरीके से राय ली गई। इसके साथ ही, पिछले छह महीनों के दौरान सी-वोटर के नियमित ट्रैकिंग डेटाबेस में दर्ज 91,795 साक्षात्कारों के रुझानों को भी इसमें समाहित किया गया है, जिससे यह देश के राजनीतिक मिजाज का एक बेहद विश्वसनीय और व्यापक दस्तावेज बन जाता है।

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