ब्लिंकिट से रिलायंस रिटेल तक… रक्षाबंधन से पहले चीनी खरीदने पर लग गई लिमिट! 35% दाम बढ़ने के बाद सुपरमार्केट्स और क्विक-कॉमर्स ने क्यों शुरू की राशनिंग

ब्लिंकिट से रिलायंस रिटेल तक… रक्षाबंधन से पहले चीनी खरीदने पर लग गई लिमिट! 35% दाम बढ़ने के बाद सुपरमार्केट्स और क्विक-कॉमर्स ने क्यों शुरू की राशनिंग

रक्षाबंधन के पावन त्योहार से ठीक पहले देश भर के आम उपभोक्ताओं और रसोई का बजट संभालने वाले परिवारों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। त्योहारों के मौके पर जब हर घर में मिठाइयों और मीठे पकवानों की खुशबू महकती है, ठीक उसी समय देश के प्रमुख क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और बड़े संगठित रिटेलर्स ने चीनी की बिक्री पर सख्त सीमा (पर्चेज लिमिट) लागू कर दी है। ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट जैसे 10-मिनट डिलीवरी ऐप्स से लेकर रिलायंस रिटेल और डीमार्ट (DMart) जैसे दिग्गज सुपरमार्केट्स तक में अब एक ग्राहक को एक बार में 2 से 3 किलो से अधिक चीनी खरीदने की अनुमति नहीं दी जा रही है। कई प्लेटफॉर्म्स पर तो प्रमुख ब्रांड्स के बड़े 5 किलो वाले पैकेट्स पूरी तरह 'आउट ऑफ स्टॉक' दिख रहे हैं। पिछले एक महीने में चीनी के खुदरा और थोक दामों में आई 25 से 35 प्रतिशत तक की तूफानी तेजी के बीच इस राशनिंग ने त्योहारी मिठास के बीच आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट: ऑनलाइन कार्ट में 2 से 3 पैकेट की ही सीमा

देश के महानगरों और टियर-1/2 शहरों में ग्रॉसरी शॉपिंग का सबसे लोकप्रिय जरिया बन चुके क्विक-कॉमर्स ऐप्स पर ग्राहकों को उस समय झटका लगा जब वे रक्षाबंधन की तैयारियों के लिए 5 या 10 किलो चीनी का ऑर्डर करने पहुंचे। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे प्रमुख बाजारों में की गई पड़ताल में सामने आया कि ब्लिंकिट पर 'मधुर' या 'होल फार्म' जैसे प्रमुख ब्रांड्स के 1 किलो और 5 किलो वाले पैक या तो अनुपलब्ध हैं या फिर प्रति यूजर सिर्फ एक या दो पैकेट जोड़ने की ही छूट दी जा रही है। कई प्रॉडक्ट्स के नीचे ऐप पर स्पष्ट रूप से 'सॉरी, लिमिटेड क्वांटिटी अवेलेबल' (Sorry, we have limited quantities available for this item) का डिस्क्लेमर लगा दिया गया है।

यही स्थिति स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो पर भी देखी जा रही है। स्विगी इंस्टामार्ट पर 'सुप्रीम हार्वेस्ट' और 'पैरीज' जैसी लोकप्रिय ब्रांड्स की क्रिस्टल शुगर के 1 किलो वाले पैक में प्रति ऑर्डर अधिकतम दो पैकेट की लिमिट तय की गई है। जेप्टो पर भी कई स्थानों पर ग्राहकों को चीनी के बड़े पैक खरीदने से रोका जा रहा है। वहीं, अमेजन फ्रेश और बिगबास्केट पर भी सफेद चीनी के कई लोकप्रिय ब्रांड्स की उपलब्धता सीमित कर दी गई है। क्विक-कॉमर्स कंपनियों का कहना है कि उनके डार्क स्टोर्स में स्टॉक की कमी नहीं है, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के बीच सभी ग्राहकों तक अनिवार्य सामान पहुंचाने के लिए यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है।

डीमार्ट और रिलायंस रिटेल में राशनिंग: ऑफलाइन सुपरमार्केट्स में भी 2-3 किलो का कैप

यह पाबंदी केवल मोबाइल ऐप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि आप अपने नजदीकी सुपरमार्केट या हाइपरमार्केट जाकर ट्रॉली में चीनी भरना चाहते हैं, तो वहां भी आपको पाबंदी का सामना करना पड़ेगा। डीमार्ट और रिलायंस रिटेल के स्टोर्स में बिलिंग काउंटर्स पर नोटिस चस्पा किए गए हैं, जिनमें स्पष्ट लिखा है कि प्रति इनवॉइस या प्रति ग्राहक अधिकतम 2 से 3 किलो (कुछ स्थानों पर 5 किलो) ही चीनी दी जाएगी।

रिटेल उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि कोई भी एक ग्राहक या व्यापारी डिस्काउंटेड कीमतों पर पूरे स्टोर का स्टॉक न खरीद ले। डीमार्ट रेडी ऐप और रिलायंस स्मार्ट स्टोर्स में सीमित स्टॉक की वजह से शेल्फ पर चीनी के पैकेट कम संख्या में रखे जा रहे हैं और हर बिल पर मात्रा की निगरानी की जा रही है। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोर्चों पर एक साथ लगी इस राशनिंग ने साफ कर दिया है कि बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव काफी गहरा है।

एक महीने में 35% तक महंगी हुई चीनी: थोक और खुदरा बाजारों में क्यों लगा करंट?

चीनी की खरीद पर इस सख्त सीमा की सबसे बड़ी वजह कीमतों में आया अप्रत्याशित उछाल है। उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) और बाजार आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को देश भर में चीनी का औसत खुदरा भाव 63 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया, जबकि महज एक महीने पहले 26 जुलाई को यह कीमत करीब 48 से 49 रुपये प्रति किलो थी। यानी सिर्फ एक महीने के भीतर खुदरा दामों में लगभग 35.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

थोक मंडियों में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। थोक बाजार में चीनी का भाव 4,500 रुपये प्रति क्विंटल से छलांग लगाकर 5,800 से 6,036 रुपये प्रति क्विंटल (लगभग 60 रुपये प्रति किलो) तक पहुंच गया है। हालांकि, पिछले दो-तीन दिनों में सरकारी सख्ती के बाद कुछ शहरों जैसे दिल्ली, कानपुर और मुंबई में थोक भावों में 2 से 3 रुपये की मामूली नरमी देखी गई है, लेकिन खुदरा बाजार में अभी भी प्रीमियम और ब्रांडेड चीनी 65 से 75 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रही है।

जमाखोरी और हलवाइयों की थोक खरीदारी रोकने की रणनीति: रिटेलर्स क्यों उठा रहे यह कदम?

सुपरमार्केट्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा यह लिमिट लगाने के पीछे एक बड़ा रणनीतिक और व्यावसायिक कारण भी है। दरअसल, थोक मंडियों में चीनी के दाम तेजी से बढ़ने के कारण स्थानीय हलवाई, मिठाई निर्माता, बेकरी संचालक और छोटे किराना दुकानदार थोक मंडी से महंगा माल खरीदने के बजाय डीमार्ट, रिलायंस और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स की तरफ रुख करने लगे थे। ये बड़े रिटेलर्स पहले से तय अनुबंधों के चलते अपेक्षाकृत कम और रियायती दरों पर चीनी बेच रहे थे।

नतीजतन, कमर्शियल खरीदार थोक में 50-100 किलो चीनी ऑनलाइन ऑर्डर करके या सुपरमार्केट से उठाकर अपने यहां स्टॉक करने लगे, जिससे आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए शेल्फ खाली होने लगे। इस 'आर्बिट्राज' और जमाखोरी की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए ही रिटेल चेन्स ने प्रति व्यक्ति खरीदारी की सीमा तय की, ताकि सीमित स्टॉक का वितरण समान रूप से हो सके और केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक ही चीनी पहुंच सके।

घटता क्लोजिंग स्टॉक और फेस्टिव डिमांड: सप्लाई चेन पर दोहरा दबाव

क्रेडिट रेटिंग और रिसर्च एजेंसी क्रिसिल (CRISIL Intelligence) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा चीनी सीजन (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) के अंत में देश का क्लोजिंग स्टॉक घटकर महज 3.9 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) रह जाने का अनुमान है। यह आंकड़ा पिछले साल के क्लोजिंग स्टॉक से करीब 25 प्रतिशत कम और पांच साल के औसत (6.5 MMT) से लगभग 40 प्रतिशत कम है।

घरेलू स्तर पर चीनी उत्पादन में आई मामूली गिरावट, गन्ने के रस को इथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किए जाने और सरकार द्वारा निर्यात पर पाबंदी लगाने से पहले किए गए करीब 8 लाख टन के निर्यात के चलते घरेलू उपलब्धता पर दबाव बना है। दूसरी तरफ, भारत में सालाना घरेलू खपत लगभग 280 से 285 लाख टन है। अगस्त के अंत में रक्षाबंधन से शुरू होने वाला त्योहारी सीजन गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा, दशहरा और दीपावली तक चलता है, जिसमें देश की कुल चीनी खपत का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है। इसी मौसमी मांग और कम स्टॉक के तालमेल ने कीमतों को हवा दे दी है।

सरकार का कड़ा एक्शन: 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट और डीलरों पर सख्त स्टॉक लिमिट

बाजार में मची इस खलबली को शांत करने और त्योहारी सीजन में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर कई कड़े कदम उठाए हैं:

  • 10 लाख टन कच्ची चीनी का टैक्स-फ्री आयात: सरकार ने टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री (बिना किसी सीमा शुल्क) आयात को हरी झंडी दे दी है। यह लगभग एक दशक में पहला मौका है जब भारत ने घरेलू बाजार में कीमतें थामने के लिए चीनी आयात का फैसला किया है।

  • डीलरों और व्यापारियों पर सख्त स्टॉक लिमिट: सरकार ने चीनी के थोक डीलरों के लिए 30 नवंबर तक अधिकतम 400 टन स्टॉक रखने की सीमा तय की है। साथ ही, 10 मीट्रिक टन से अधिक कारोबार करने वाले व्यापारियों को अपनी 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक जमा करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

  • निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध: घरेलू मांग को प्राथमिकता देते हुए चीनी के सभी प्रकार के कमर्शियल निर्यात पर 30 सितंबर तक पूर्ण प्रतिबंध लागू रखा गया है।

  • राज्यों को औचक निरीक्षण के निर्देश: केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे थोक मंडियों, गोदामों और मिलों का औचक निरीक्षण करें ताकि किसी भी स्तर पर सट्टेबाजी और कालाबाजारी को पूरी तरह रोका जा सके।

त्योहारी सीजन में आम जनता की जेब पर असर: आगे क्या होगा चीनी का भाव?

चीनी केवल एक प्राथमिक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि यह एफएमसीजी (FMCG), बिस्कुट, कन्फेक्शनरी, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री का मुख्य कच्चा माल है। चीनी के दामों में 35% की बढ़ोतरी के कारण पैकेज्ड फूड और मिठाई निर्माता पहले ही अपने उत्पादों की कीमतों में 5 से 7 फीसदी की बढ़ोतरी की तैयारी कर रहे हैं। इससे त्योहारों में आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ने की आशंका है।

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों और क्रिसिल की रिपोर्ट का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा 10 लाख टन चीनी के आयात की मंजूरी और मिलों से अतिरिक्त कोटा रिलीज किए जाने के बाद कीमतों में और बड़ी तेजी की संभावना काफी कम हो गई है। अनुमान है कि सितंबर के पहले पखवाड़े में नए आयातित स्टॉक के बाजार में पहुंचने के बाद खुदरा कीमतों में 4 से 6 रुपये प्रति किलो की नरमी देखने को मिल सकती है, जिससे त्योहारों के मुख्य दौर यानी गणेश चतुर्थी और दिवाली से पहले सप्लाई की स्थिति सामान्य हो जाएगी। तब तक के लिए, रिटेलर्स की यह 2-3 किलो की राशनिंग व्यवस्था आम उपभोक्ताओं को समान रूप से चीनी उपलब्ध कराने का सबसे व्यावहारिक उपाय बनी रहेगी।

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