राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद कौन बनेगा पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष? रेस में विजय इंदर सिंगला सबसे आगे

राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद कौन बनेगा पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष? रेस में विजय इंदर सिंगला सबसे आगे

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की सियासत में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले काफी समय से पार्टी की राज्य इकाई में जारी अंदरूनी कलह, वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी व वडिंग खेमे की खींचतान को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने संगठन में बड़े बदलाव का फैसला किया। वडिंग ने सोशल मीडिया पर अपना बायो अपडेट करते हुए पद छोड़ने की पुष्टि कर दी है, जिसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की कमान किसके हाथों में होगी।

हाईकमान एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जो जाट सिख, हिंदू और दलित समीकरणों को साधते हुए सभी खेमों को एक मंच पर ला सके। इस पद की दौड़ में कई दिग्गज नेताओं के नाम तेजी से चर्चा में हैं।

1. विजय इंदर सिंगला (सबसे मजबूत दावेदार)

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व कैबिनेट मंत्री और संगरूर से पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे चल रहा है।

  • हिंदू चेहरे का दांव: पंजाब में लंबे समय से एक हिंदू चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग उठती रही है, ताकि शहरी मतदाताओं को फिर से कांग्रेस के पाले में लाया जा सके।

  • हाईकमान की पसंद और गुटबाजी से दूरी: सिंगला को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है और वे पार्टी के किसी भी स्थानीय गुट (चन्नी या वडिंग कैंप) का हिस्सा नहीं हैं। उनका यह तटस्थ रुख उन्हें संगठन को एकजुट रखने के लिए सबसे मुफीद उम्मीदवार बनाता है।

2. प्रताप सिंह बाजवा

पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) प्रताप सिंह बाजवा भी रेस में एक बड़ा नाम हैं।

  • मजबूत प्रशासनिक और सांगठनिक अनुभव: बाजवा पहले भी पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं और राज्यभर में जमीनी कैडर पर उनकी मजबूत पकड़ है।

  • चुनौती: पार्टी में 'एक व्यक्ति, एक पद' का सिद्धांत आड़े आ सकता है। यदि बाजवा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो नेता प्रतिपक्ष का पद किसी अन्य वरिष्ठ नेता को सौंपना पड़ेगा।

3. सुखजिंदर सिंह रंधावा

पूर्व उपमुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी शीर्ष दावेदारों में शामिल हैं।

  • माझा क्षेत्र में दबदबा: रंधावा माझा इलाके के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक हैं और कैडर को आक्रामक तरीके से लामबंद करने के लिए जाने जाते हैं।

  • राजस्थान के प्रभारी का अनुभव: राजस्थान में पार्टी संगठन को संभालने के अनुभव के बाद हाईकमान उनकी क्षमताओं से वाकिफ है, हालांकि उनका मुखर स्वभाव कई बार पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

4. परगट सिंह और सुखबिंदर सिंह सरकारिया

  • परगट सिंह: पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह अपनी बेदाग और साफ छवि के लिए जाने जाते हैं। मालवा और दोआबा दोनों क्षेत्रों में उनकी स्वीकार्यता है।

  • सुखबिंदर सिंह सरकारिया: पूर्व कैबिनेट मंत्री सरकारिया का नाम भी बैकअप विकल्प के रूप में चर्चा में है, जो संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।

5. राणा केपी सिंह

पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर राणा केपी सिंह भी हिंदू चेहरे के रूप में एक मजबूत विकल्प हैं। आनंदपुर साहिब और रोपड़ बेल्ट में उनका व्यापक प्रभाव है और वे बिना किसी विवाद के सभी नेताओं के साथ बेहतर तालमेल बैठाने की क्षमता रखते हैं।

2027 चुनाव से पहले हाईकमान की सबसे बड़ी चुनौती

कांग्रेस हाईकमान के लिए नया अध्यक्ष चुनना सिर्फ एक पद भरने का मामला नहीं है, बल्कि गुटबाजी में उलझे संगठन को पुनर्जीवित करने की परीक्षा है। 2022 में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल तो बनी, लेकिन वडिंग, बाजवा और चन्नी समर्थकों के बीच लगातार होती बयानबाजी ने कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराया था।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व अगले कुछ ही दिनों में दिल्ली में अहम बैठक के बाद नए अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा कर सकता है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ तीन से चार कार्यकारी अध्यक्ष (Working Presidents) बनाकर सभी जातियों और क्षेत्रों को साधने का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है।