दशहरा पर शाम 3:30 बजे तक ही पूजा का शुभ मुहूर्त: जानिए आज रावण दहन का सही समय और शहरवार पूरी डिटेल
विजयादशमी यानी दशहरा का पावन पर्व पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, दशहरे के दिन मुख्य पूजा, अपराजिता वंदना, शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की आराधना 'अपराह्न काल' (दोपहर के समय) में करने का शास्त्रीय विधान है। धार्मिक नियमों के अनुसार, अपराह्न पूजा का यह शुभ समय दोपहर लगभग 1:14 बजे से शुरू होकर दोपहर 3:30 बजे तक ही मान्य रहेगा। इस व्यापक समय-सीमा के भीतर सबसे शक्तिशाली और सिद्ध 'विजय मुहूर्त' दोपहर 1:59 बजे से लेकर दोपहर 2:45 बजे तक (लगभग 46 मिनट) रहेगा। धर्मग्रंथों में मान्यता है कि विजय मुहूर्त में शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य, नया व्यापार, विद्यारंभ या वाहन पूजन वर्ष भर सफलता और विजयश्री प्रदान करता है। इसलिए दोपहर 3:30 बजे से पहले अपने घर या प्रतिष्ठान में शस्त्र, बहीखाते, औजार और शमी के पौधे का विधिवत पूजन अवश्य संपन्न कर लें।
सूर्यास्त के बाद होगा रावण दहन: जानिए प्रदोष काल का सही समय
दशहरा पूजा और रावण दहन के समय को लेकर अक्सर लोगों में असमंजस रहता है। शास्त्रों के अनुसार, जहां दशहरा की पूजा दोपहर (अपराह्न काल) में की जाती है, वहीं रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन केवल सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में ही किया जाता है। आज शाम को सूर्यास्त लगभग 5:45 बजे से 5:50 बजे के बीच होगा, जिसके बाद प्रदोष काल शुरू हो जाएगा। देश के अधिकांश रामलीला मैदानों और सार्वजनिक स्थानों पर रावण दहन का कार्यक्रम शाम 5:48 बजे से लेकर शाम 7:30 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। शाम के समय रावण दहन के उपरांत उस स्थान से जली हुई लकड़ी या राख का एक छोटा अंश घर लाकर तिजोरी या मुख्य द्वार पर रखने की लोक परंपरा है, जिसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने वाला माना जाता है।
देश के प्रमुख शहरों में विजय मुहूर्त और रावण दहन के समय का विवरण
भौगोलिक स्थिति और स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के अंतर के कारण देश के अलग-अलग शहरों में विजय मुहूर्त और रावण दहन के समय में कुछ मिनटों का अंतर देखने को मिलता है। देश के मुख्य महानगरों में पूजा का विजय मुहूर्त इस प्रकार है:
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नई दिल्ली: दोपहर 1:59 बजे से दोपहर 2:45 बजे तक
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लखनऊ: दोपहर 1:45 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक
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जयपुर: दोपहर 2:06 बजे से दोपहर 2:51 बजे तक
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मुंबई: दोपहर 2:19 बजे से दोपहर 3:06 बजे तक
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बेंगलुरु: दोपहर 2:02 बजे से दोपहर 2:49 बजे तक
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हैदराबाद: दोपहर 1:57 बजे से दोपहर 2:44 बजे तक
इन सभी शहरों में सार्वजनिक रावण दहन का समय स्थानीय रामलीला समितियों द्वारा शाम 6:00 बजे से रात 8:00 बजे के बीच निर्धारित किया गया है।
शस्त्र पूजन और शमी अर्चन की प्रामाणिक वैदिक विधि
दशहरे के दिन अपराह्न काल में घर के पूजा स्थल या खुले आंगन में उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अपने दैनिक उपयोग के औजारों, कलम, बहीखातों अथवा अस्त्र-शस्त्रों को रखें। सभी पर गंगाजल छिड़कें, हल्दी, रोली और अक्षत से तिलक करें तथा पीले पुष्प अर्पित करें। इसके बाद घर के पास स्थित शमी के वृक्ष या पौधे के पास जाकर 'शमी शमयते पापम्' मंत्र का उच्चारण करते हुए जल और तिल के तेल का दीपक अर्पित करें। शमी के कुछ पत्ते तोड़कर अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों को 'सोना' मानकर भेंट करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। इस दिन शाम को नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना भी अत्यंत सौभाग्यशाली माना गया है।
रावण दहन के बाद जरूर करें यह एक काम, पूरे साल बनी रहेगी सुख-समृद्धि
रावण दहन के साक्षी बनने के बाद घर लौटते समय हाथ-पैर धोकर ही घर के भीतर प्रवेश करें। इसके बाद घर के मंदिर में गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और भगवान श्रीराम व मां अपराजिता का ध्यान करें। आज के दिन अपने भीतर की बुराई—जैसे क्रोध, आलस्य, कटु वचन और ईर्ष्या रूपी रावण को त्यागने का संकल्प लें। घर के मुख्य द्वार पर दोनों ओर तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करने से घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है और सभी प्रकार के वास्तु दोष व ग्रह बाधाएं शांत हो जाती हैं।