कन्या पूजन में भूलकर भी न दें ये 5 उपहार, रूठ सकती हैं मां भगवती; जानें कौन सी चीजें मानी जाती हैं अशुभ

कन्या पूजन में भूलकर भी न दें ये 5 उपहार, रूठ सकती हैं मां भगवती; जानें कौन सी चीजें मानी जाती हैं अशुभ

शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी और महानवमी तिथि पर कन्या पूजन यानी कंजक खिलाने की अत्यंत पावन परंपरा है। सनातन धर्म में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को साक्षात नौ देवियों का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि नौ दिनों की कठोर साधना, व्रत और दुर्गा सप्तशती के पाठ का संपूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब छोटी बालिकाओं का आदर-सत्कार कर उन्हें भोजन कराया जाए और विदाई के समय दक्षिणा व उपहार दिए जाएं। हालांकि, कई बार लोग जानकारी के अभाव में या अनजाने में बाजार से ऐसी वस्तुएं खरीदकर छोटी बच्चियों को भेंट कर देते हैं जो धर्मग्रंथों, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार पूरी तरह वर्जित और अशुभ मानी गई हैं। गलत उपहार देने से पूजा का पुण्य क्षीण हो सकता है और घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। इसलिए कन्या विदाई के समय इन निषिद्ध वस्तुओं के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

काले, नीले या गहरे मटमैले रंग के वस्त्र और खिलौने

शास्त्रों में कन्या पूजन के दौरान बालिकाओं को काले, गहरे नीले या स्लेटी रंग के कपड़े, रिबन या खिलौने भेंट करना अत्यंत वर्जित माना गया है। काला रंग नकारात्मकता, शोक और तामसिक ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि मां भगवती सात्विक, चैतन्य और ममतामयी ऊर्जा का केंद्र हैं। देवी पूजन में लाल, पीले, नारंगी और गुलाबी रंग को सर्वाधिक शुभ माना जाता है। यदि आप कन्याओं को वस्त्र, हेयरबैंड या रूमाल उपहार में दे रहे हैं, तो हमेशा लाल या चमकीले शुभ रंगों का ही चयन करें। गहरे और मटमैले रंग की वस्तुएं देने से साधक के जीवन में मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह बढ़ने की मान्यता है।

लोहे के बर्तन, नुकीली चीजें और धारदार खिलौने

कन्या पूजन के उपहारों में कैंची, धारदार खिलौने, कंपास बॉक्स में रखी नुकीली वस्तुएं या लोहे के बर्तन शामिल नहीं करने चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धारदार और नुकीली चीजें राहु, केतु और शनि के अशुभ प्रभाव को आकर्षित करती हैं। कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है, और उन्हें तीखी वस्तुएं भेंट करने से घर की सुख-शांति में दरार आ सकती है और रिश्तों में तल्खी पैदा हो सकती है। यदि आप पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी सामग्री या खिलौने दे रहे हैं, तो केवल सुरक्षित प्लास्टिक या लकड़ी के सॉफ्ट टॉयज, ड्राइंग बुक्स और रंग ही भेंट करें।

खाली बर्तन कभी न दें, भरें किसी मीठी वस्तु या अनाज से

अक्सर लोग कन्याओं को उपहार स्वरूप टिफिन बॉक्स, पानी की बोतल, कटोरी, प्लेट या गिलास जैसे स्टील और पीतल के बर्तन देते हैं। बर्तन भेंट करना बहुत शुभ माना जाता है, लेकिन शास्त्रों का कड़ा नियम है कि किसी भी कन्या को खाली बर्तन हाथ में नहीं थमाना चाहिए। खाली बर्तन खालीपन और दरिद्रता का सूचक माना जाता है। यदि आप कन्याओं को कोई भी बर्तन उपहार में दे रहे हैं, तो उसके भीतर अक्षत (चावल), बताशे, मखाना, सिक्के या कोई मीठा पकवान जरूर भरकर दें। भरा हुआ बर्तन भेंट करने से घर में अन्नपूर्णा माता का वास होता है और अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं।

चमड़े का सामान और जूते-चप्पल देने से बचें

बाजार में मिलने वाले फैंसी गिफ्ट्स के चक्कर में कई लोग छोटी बच्चियों को लेदर पर्स, चमड़े की बेल्ट या फुटवियर (जूते-चप्पल) उपहार में दे देते हैं। शास्त्रों में चमड़े को अपवित्र माना गया है, क्योंकि यह जीव हत्या से तैयार होता है। सात्विक पूजा के मंच पर साक्षात देवी स्वरूप कन्याओं को चमड़े से बनी वस्तुएं देना भारी अमंगलकारी माना जाता है। इसके अलावा जूते-चप्पल का संबंध राहु और पैरों की धूल से होता है, इसलिए देवी को जूते-चप्पल भेंट करने का विधान धर्मग्रंथों में कहीं नहीं है। कन्याओं को श्रृंगार की सात्विक वस्तुएं जैसे लाल चूड़ियां, बिंदी, महावर या पायल देना ही उत्तम माना गया है।

बासी भोजन, डिब्बाबंद जंक फूड और खट्टी चीजें

कन्याओं को विदाई के समय बाजार के तले-भुने पैकेज्ड चिप्स, नूडल्स, कोल्ड ड्रिंक्स या खट्टे अचार जैसी चीजें उपहार में कभी नहीं देनी चाहिए। देवी के स्वरूप को हमेशा ताजा बना सात्विक भोजन ही प्रिय होता है। कन्या पूजन में पारंपरिक रूप से शुद्ध घी में बनी पूरी, देसी चने का हलवा और काले चने का प्रसाद ही खिलाना चाहिए। यदि आप फल भेंट कर रहे हैं, तो केवल मीठे फल जैसे सेब, केला, अनार या मौसमी फल ही दें। खट्टे फल जैसे नींबू या कच्चा संतरा देने से बचना चाहिए, क्योंकि खट्टा स्वाद इस पूजा में वर्जित माना जाता है।

कौन से उपहार हैं सर्वाधिक शुभ और फलदायी?

कन्याओं को विदा करते समय लाल चुनरी, चूड़ी, बिंदी, मीठे फल, शिक्षा से जुड़ी सामग्री (कांपी-किताब, पेंसिल बॉक्स) और श्रद्धा अनुसार नकद दक्षिणा (सिक्का या नोट) देना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसके साथ ही एक लंगूर (छोटे बालक) को भैरव या हनुमान जी का रूप मानकर भोजन कराना और उपहार देना न भूलें, क्योंकि भैरव बाबा के दर्शन और पूजन के बिना देवी की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। कन्याओं के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेने से साधक के समस्त ग्रह दोष कट जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का स्थाई वास होता है।