शारदीय नवरात्रि के पहले दिन जौ बोते समय भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां, नहीं तो निष्फल हो जाएगी मां दुर्गा की पूजा

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन जौ बोते समय भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां, नहीं तो निष्फल हो जाएगी मां दुर्गा की पूजा

सनातन धर्म में शक्ति साधना के महापर्व शारदीय नवरात्रि में प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ-साथ 'जौ' (जवारे) बोने की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान ब्रह्मा द्वारा रची गई सबसे पहली वनस्पति और अन्न 'जौ' ही था, इसीलिए इसे धार्मिक अनुष्ठानों में 'पूर्ण धान्य' का दर्जा दिया गया है। नवरात्रि के दौरान मिट्टी के पात्र में बोए गए जौ केवल एक औपचारिकता नहीं होते, बल्कि वे आने वाले वर्ष में परिवार की सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली के प्रत्यक्ष सूचक माने जाते हैं। मान्यता है कि नौ दिनों में जितने घने, सीधे और हरे-भरे जौ उगते हैं, मां भगवती का आशीर्वाद उतना ही अधिक बरसता है। हालांकि, कई बार श्रद्धालु अज्ञानता में जौ बोते समय कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जिसके कारण जवारे ठीक से नहीं उग पाते या पीले पड़कर सड़ जाते हैं, जिसे अशुभ संकेत माना जाता है। आइए जानते हैं जौ बोते समय किन 3 गलतियों से बचना अनिवार्य है।

1. पहली गलती: अपवित्र या रासायनिक खाद वाली मिट्टी का उपयोग करना

जौ बोने के लिए मिट्टी का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। कई लोग गमलों की पुरानी मिट्टी, रास्तों से उठाई गई धूल या नर्सरी से लाई गई रासायनिक उर्वरक वाली मिट्टी का सीधे उपयोग कर लेते हैं, जो शास्त्रों के अनुसार सर्वथा अनुचित है। जौ हमेशा किसी पवित्र स्थान—जैसे गंगा या किसी पवित्र नदी का किनारा, तुलसी क्यारी, या खेत की उपजाऊ और शुद्ध मिट्टी में ही बोए जाने चाहिए। मिट्टी को प्रयोग में लाने से पहले उसे अच्छी तरह छानकर कंकड़-पत्थर हटा लें और उस पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर लें। गंदी या अशुद्ध मिट्टी में बोए गए जौ कभी स्वस्थ नहीं उगते और इससे अनुष्ठान में दोष लगता है।

2. दूसरी गलती: खंडित, कीड़े लगे या अशुद्ध जौ का प्रयोग करना

जौ बोने से पहले बीजों की गुणवत्ता की जांच करना बेहद आवश्यक होता है। बाजार से लाए गए जौ में अक्सर टूटे हुए, कीड़े लगे या सड़े हुए दाने मिले होते हैं। यदि ऐसे खंडित जौ बो दिए जाएं, तो वे अंकुरित नहीं होते या फंगस (फफूंद) लगकर खराब हो जाते हैं। जौ बोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले उन्हें पानी में भिगोकर रख देना चाहिए। जो दाने हल्के होकर पानी के ऊपर तैरने लगें, उन्हें बाहर निकाल दें क्योंकि वे खोखले होते हैं और कभी नहीं उगते; केवल पेंदी में बैठे स्वस्थ व साबुत दानों का ही उपयोग करें।

3. तीसरी गलती: अत्यधिक पानी डालना या जल का सीधा तेज बहाव

जौ बोने के बाद सबसे आम गलती उनकी सिंचाई को लेकर होती है। कई लोग कलश स्थापना के उत्साह में पात्र में लोटा भरकर पानी उड़ेल देते हैं। जरूरत से ज्यादा पानी देने से मिट्टी कीचड़ बन जाती है और जौ के बीज अंदर ही गलकर सड़ जाते हैं। वहीं कुछ लोग पानी का इतना तेज बहाव डालते हैं कि बीज मिट्टी से बाहर आकर बह जाते हैं। हमेशा ध्यान रखें कि जौ पर कभी भी लोटे या मग से सीधा पानी न डालें, बल्कि हथेली से या साफ स्प्रेयर की मदद से केवल हल्के पानी के छींटे (फुहार) ही दें। मिट्टी में केवल हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

कैसे उगाएं हरे-भरे और सुंदर जवारे? सही विधि

शुभ फल प्राप्ति के लिए सबसे पहले मिट्टी का एक छिछला पात्र (मिट्टी की परात या सकोरा) लें। उस पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। पहली परत में शुद्ध मिट्टी बिछाएं, फिर उस पर गंगाजल से शुद्ध किए गए जौ की एक समान परत फैलाएं। इसके ऊपर से दोबारा हल्की मिट्टी की पतली चादर बिछा दें ताकि बीज ढक जाएं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक अपने इष्टदेव का ध्यान करते हुए तांबे के पात्र से गंगाजल मिश्रित जल के छींटे मारें। पात्र को कलश के नीचे या पास में ऐसी जगह रखें जहां न तो अत्यधिक अंधेरा हो और न ही सीधी चिलचिलाती धूप आती हो। प्रतिदिन सुबह और शाम की आरती के बाद थोड़ा-थोड़ा जल अर्पित करें। यदि इन नियमों का निष्ठापूर्वक पालन किया जाए, तो चौथे-पांचवे दिन से ही घने और हरे-भरे जवारे लहलहाने लगेंगे जो आपके घर में आने वाले ऐश्वर्य का संदेश देंगे।