सावन में क्यों करते हैं शिवलिंग का जलाभिषेक? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा, 3 अचूक उपाय और शिवजी की प्रिय चीजें
सनातन धर्म में श्रावण मास का विशेष महत्व है, जो पूर्ण रूप से देवों के देव महादेव की भक्ति को समर्पित होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 30 जुलाई 2026 से पवित्र सावन महीने की शुरुआत हो रही है। सावन के दौरान शिवलिंग पर जल अर्पित करने (जलाभिषेक) की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
सावन में शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाते हैं?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया गया, तो उससे अत्यंत जहरीला 'हलाहल विष' निकला। इस विष की अग्नि से संपूर्ण सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने स्वयं इसका पान किया था। माता पार्वती ने विष को शिव जी के गले में ही रोक दिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।
विष की प्रचंड तपन और जलन को कम करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान शिव पर शीतल जल अर्पित किया था। माना जाता है कि तभी से सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। जलाभिषेक से प्रसन्न होकर महादेव अपने भक्तों के सभी दुख दूर करते हैं।
सावन में शिव जी की कृपा पाने के 3 महाउपाय
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मंत्र जाप से आरोग्य लाभ: सावन भर महामृत्युंजय मंत्र और शिव पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) का जप करने से परिवार में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति बनी रहती है।
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करियर में सफलता के लिए रुद्राभिषेक: बिजनेस और नौकरी में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए श्रावण मास में रुद्राभिषेक कराना अत्यंत फलदाई माना गया है।
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शीघ्र विवाह और सुखी वैवाहिक जीवन: विवाह में देरी या दांपत्य जीवन की समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए सावन सोमवार का व्रत रखना चाहिए।
सावन 2026 सोमवार व्रत की तिथियां
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3 अगस्त 2026: पहला सावन सोमवार
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10 अगस्त 2026: दूसरा सावन सोमवार
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17 अगस्त 2026: तीसरा सावन सोमवार
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24 अगस्त 2026: चौथा सावन सोमवार
शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये 15 चीजें
शिव पूजन के दौरान शिवलिंग पर जल के अलावा गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत (चावल), हरी मूंग दाल, काला तिल, ताजे फूल और मौसमी फल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।