'सेना' देशों में अब नहीं चलेगी बिना तैयारी की जंग! BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने किया नए FTP प्लान का खुलासा; खिलाड़ियों को मिलेगा भरपूर आराम और अभ्यास मैच
भारतीय क्रिकेट टीम के विदेशी दौरों, विशेषकर 'सेना' (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों की चुनौतीपूर्ण पिचों पर टीम इंडिया की तैयारियों को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एक युगांतरकारी नीतिगत बदलाव का खाका तैयार कर लिया है। मुंबई के प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम स्थित बीसीसीआई मुख्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने आधिकारिक रूप से ऐलान किया है कि भविष्य में किसी भी बड़ी विदेशी टेस्ट या सीमित ओवरों की सीरीज से पहले भारतीय खिलाड़ियों को वहां की परिस्थितियों के अनुकूल ढलने (Acclimatization) के लिए पर्याप्त समय, अनिवार्य अभ्यास मैच और लंबा विश्राम दिया जाएगा। इसके लिए आईसीसी के 'फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम' (FTP) में रणनीतिक संशोधन करने के निर्देश दे दिए गए हैं। हालांकि, बोर्ड ने यह भी साफ स्वीकार किया है कि भारतीय क्रिकेट के सामने इस समय खिलाड़ियों के चोटिल होने या वर्कलोड बढ़ने की कोई अंदरूनी संवादहीनता नहीं है, बल्कि साल भर में खेले जाने वाले अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मैचों की अत्यधिक संख्या ही वह 'एकमात्र चुनौती' है जो इस पूरी योजना के आड़े आ रही है।
'सेना' देशों के लिए बदला जाएगा FTP: आराम, अभ्यास मैच और माहौल में ढलने का नया खाका
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बैठक के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका की उछाल भरी पिचों, ऑस्ट्रेलिया के तेज बाउंस, इंग्लैंड की स्विंग और न्यूजीलैंड की सीमिंग परिस्थितियों में बिना ठोस तैयारी के सीधे टेस्ट मैच के मैदान पर उतरने का पुराना ढर्रा अब पूरी तरह बंद किया जाएगा। अतीत में कई मौकों पर देखा गया है कि भारतीय खिलाड़ी दो महीने के थकाऊ आईपीएल के तुरंत बाद बिना किसी अभ्यास मैच के सीधे विदेशी दौरों पर उतरते रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके प्रदर्शन और शारीरिक फिटनेस पर पड़ता रहा है।
सैकिया ने बताया कि बोर्ड ने अपनी एफटीपी (Future Tours Programme) ड्राफ्टिंग कमेटी से जुड़े शीर्ष अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और अन्य क्रिकेट बोर्डों की आगामी मंच बैठकों में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएं। नया ड्राफ्ट इस तरह तैयार किया जा रहा है कि जब भी भारतीय टीम सेना देशों के दौरे पर जाए, तो मुख्य सीरीज शुरू होने से कम से कम 10 से 14 दिन पहले टीम वहां पहुंचे। इस दौरान स्थानीय टीमों, 'ए' टीमों या काउंटी टीमों के साथ कम से कम दो बहु-दिवसीय अभ्यास मैच या मैत्री मुकाबले अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाएं ताकि बल्लेबाजों और गेंदबाजों को वहां की हवा, ठंड, मौसम और पिच के मिजाज को समझने का पूरा अवसर मिल सके।
'एक साल में बहुत ज्यादा मैच': ओवरलोडेड कैलेंडर ही बना टीम इंडिया की सबसे बड़ी चुनौती
इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने खड़ी सबसे बड़ी तकनीकी और व्यावहारिक बाधा का जिक्र करते हुए देवजीत सैकिया ने बिना किसी हिचकिचाहट के सच स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में आज संवाद, सुविधाओं या कोचिंग की कोई कमी नहीं है, बल्कि सबसे बड़ा सिरदर्द यह है कि एक कैलेंडर वर्ष के भीतर भारतीय टीम को बहुत अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने पड़ रहे हैं।
सैकिया ने कहा, "एकमात्र सबसे बड़ी और वास्तविक चुनौती यह है कि एक साल में बहुत ज्यादा मैच खेले जा रहे हैं। द्विपक्षीय सीरीज, आईसीसी टूर्नामेंट्स, एशिया कप और फिर दो से ढाई महीने चलने वाला दुनिया का सबसे प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट आईपीएल—इन सभी का संयुक्त दबाव सीधे खिलाड़ियों के शरीर और दिमाग पर पड़ता है।" जब कैलेंडर में दो सीरीज के बीच में महज 3 से 4 दिनों का अंतराल होता है, तो खिलाड़ियों को लंबी दूरी की यात्रा और जेट-लैग से उबरने का भी वक्त नहीं मिलता। इसी अत्यधिक वर्कलोड के कारण हालिया इंग्लैंड और आयरलैंड दौरों के दौरान भारत के कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल हुए। बोर्ड का मानना है कि यदि इस 'मैच ओवरलोड' की बीमारी का इलाज नहीं किया गया, तो कोई भी रणनीति ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकेगी। यही वजह है कि अगले एफटीपी चक्र में गैर-जरूरी या बेमतलब की द्विपक्षीय सीरीज की संख्या में कटौती करने पर भी विचार किया जा रहा है।
वानखेड़े में 3 घंटे का महामंथन: गिल, अय्यर, गंभीर और लक्ष्मण के बीच 2027 का रोडमैप
मुंबई में आयोजित यह समीक्षा बैठक भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से कई मायनों में बेहद ऐतिहासिक रही। वानखेड़े स्टेडियम के बोर्ड रूम में करीब तीन घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में भारतीय क्रिकेट का पूरा शीर्ष थिंक-टैंक एक साथ मेज पर मौजूद था। बैठक में मुख्य कोच गौतम गंभीर, टेस्ट और वनडे प्रारूप के कप्तान शुभमन गिल, टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर, बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास, सचिव देवजीत सैकिया और बेंगलुरु स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (पूर्ववर्ती नेशनल क्रिकेट एकेडमी) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण उपस्थित रहे।
हालांकि, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर व्यक्तिगत कारणों और पूर्व-निर्धारित प्रतिबद्धताओं के चलते बैठक में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद नहीं हो सके। बैठक के एजेंडे की जानकारी देते हुए सैकिया ने बताया कि टीम के हालिया इंग्लैंड और आयरलैंड दौरों के प्रदर्शन की एक-एक गेंद का तकनीकी और रणनीतिक विश्लेषण किया गया। कोच गंभीर और कप्तानों ने बताया कि किन विभागों में टीम को और अधिक गहराई की जरूरत है। इसके साथ ही, अगले 12 से 18 महीनों के लिए भारतीय टीम का एक विस्तृत और स्पष्ट रोडमैप तैयार कर लिया गया है, जिसका अंतिम और सबसे बड़ा लक्ष्य 2027 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले 50 ओवर के एकदिवसीय विश्व कप में भारत को चैंपियन बनाना है।
'बीसीसीआई एक सुचारू मशीन की तरह': संवाद की कमी और मतभेदों की अफवाहों को नकारा
हाल के दिनों में मुख्य कोच, चयन समिति और विभिन्न राज्य संघों के बीच खिलाड़ियों की उपलब्धता और वर्कलोड को लेकर संवादहीनता की जो अटकलें मीडिया में तैर रही थीं, उन पर सचिव देवजीत सैकिया ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मीडिया को बिना पुष्टि के मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने से बचना चाहिए, क्योंकि भारतीय क्रिकेट का प्रशासनिक ढांचा इस समय अपने इतिहास के सबसे मजबूत और पारदर्शी दौर से गुजर रहा है।
सैकिया ने कहा, "बीसीसीआई के भीतर सभी लोग एकमत हैं और यह संस्था एक सुव्यवस्थित, सटीक और सुचारू रूप से चलने वाली मशीन की तरह काम कर रही है। हमारे सभी विभागों के बीच पूरी तरह से जीवंत और वास्तविक समय (रियल-टाइम) समन्वय है। चाहे वह महिला क्रिकेट टीम की विभिन्न समितियां हों, उनका सहयोगी स्टाफ हो, बेंगलुरु का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) हो या फिर पुरुष टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और उनका सहयोगी स्टाफ हो—हर कोई एक-दूसरे के संपर्क में रहता है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि जब कोई खिलाड़ी चोटिल होता है या उसे आराम की जरूरत होती है, तो मेडिकल टीम, एनसीए के फिजियो, चयनकर्ता और कोच एक साथ बैठकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर निर्णय लेते हैं। किसी भी स्तर पर समन्वय की कोई कमी नहीं है और पूरी व्यवस्था सही दिशा में अग्रसर है।
आईसीसी और द्विपक्षीय बैठकों में उठेगा मुद्दा: क्या आसान होगी विंडो तलाशने की राह?
बीसीसीआई द्वारा अपने खिलाड़ियों को सेना देशों में पर्याप्त अभ्यास और आराम दिलाने का यह फैसला सुनने में जितना व्यावहारिक लगता है, वैश्विक क्रिकेट राजनीति में इसे लागू करवाना उतना ही पेचीदा है। क्रिकेट की दुनिया में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स (प्रसारण अधिकार) और विज्ञापनों का अरबों डॉलर का कारोबार सीधे मैचों की संख्या पर निर्भर करता है। विदेशी क्रिकेट बोर्ड (जैसे क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड) हमेशा भारतीय टीम के साथ अधिक से अधिक मैच खेलना चाहते हैं क्योंकि भारत के मैचों से ही उनकी तिजोरियां भरती हैं।
ऐसे व्यावसायिक माहौल में जब बीसीसीआई आगामी आईसीसी बैठकों में मैचों की संख्या घटाने और अभ्यास मैचों के लिए 10 से 15 दिनों की अतिरिक्त विंडो की मांग रखेगा, तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर को नए सिरे से री-शेड्यूल करना एक भारी कूटनीतिक चुनौती होगी। हालांकि, दुनिया की सबसे अमीर और शक्तिशाली क्रिकेट संस्था होने के नाते बीसीसीआई के पास अपनी शर्तें मनवाने की पूरी ताकत है। यदि भारत अपने रुख पर अडिग रहता है, तो आईसीसी को फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम में आवश्यक संशोधन करने ही होंगे, जिससे न केवल भारतीय क्रिकेटरों को बल्कि दुनिया भर के एथलीटों को मानसिक और शारीरिक रूप से तरोताजा रहने का मौका मिल सकेगा।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट अब केवल मैदान पर उतरकर मैच खेलने की औपचारिकता पूरी नहीं करेगा, बल्कि विदेशी धरती पर तिरंगा फहराने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्याप्त तैयारी और खिलाड़ियों की शारीरिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखेगा। 2027 के विश्व कप और आगामी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल चक्र के बीच भारतीय टीम मैनेजमेंट का यह 'सेना प्लान' आने वाले वर्षों में विदेशी सरजमीं पर भारत के टेस्ट और वनडे रिकॉर्ड को एक नए स्वर्णिम युग में ले जाने की ठोस बुनियाद तैयार कर सकता है।