गोरखपुर से सीएम योगी का चुनावी शंखनाद, 12 हजार शिक्षकों को साधने की BJP की बड़ी रणनीति; सपा के नए दांव से बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने गृह क्षेत्र गोरखपुर के ऐतिहासिक महंत दिग्विजयनाथ पार्क से भारतीय जनता पार्टी के चुनावी अभियान का औपचारिक शंखनाद कर दिया है। भाजपा संगठन ने इस महासम्मेलन में गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों से करीब 12 हजार शिक्षक मतदाताओं, शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों, वित्तविहीन व सहायता प्राप्त (एडेड) शिक्षकों और पार्टी पदाधिकारियों को एक मंच पर लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। खुद मुख्यमंत्री की सीधी मौजूदगी ने इस चुनाव को सामान्य विधान परिषद चुनाव से कहीं ऊपर उठाकर सीधे 2027 के विधानसभा चुनावों के पूर्वाभ्यास और प्रतिष्ठा की लड़ाई में तब्दील कर दिया है।
गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर साख का सवाल, मौजूदा एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी पर फिर भरोसा
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से पूर्वांचल की सबसे प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीटों में शुमार रही है। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य (MLC) ध्रुव कुमार त्रिपाठी पर भरोसा जताते हुए उन्हें आधिकारिक प्रत्याशी बनाया है। ध्रुव त्रिपाठी का माध्यमिक शिक्षक संघ और शिक्षक राजनीति में लंबा प्रभाव रहा है, लेकिन पिछले कार्यकालों के कामकाज और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर इस बार जमीन पर परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही हैं। यही वजह है कि पार्टी किसी भी तरह के जोखिम से बचने के लिए सीधे मुख्यमंत्री के चेहरे, सरकार के शिक्षा सुधारों और विकास मॉडल को आगे रखकर शिक्षक वर्ग को अपने पाले में एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है।
संजयन त्रिपाठी की सपा में एंट्री से बदला समीकरण, मुकाबला बना कांटे का
इस चुनाव में सबसे बड़ा नाटकीय मोड़ तब आया जब समाजवादी पार्टी ने अपने पहले घोषित प्रत्याशी कमलेश यादव का टिकट काटकर पूर्व भाजपा नेता डॉ. संजयन त्रिपाठी को अपना समर्थन देकर मैदान में उतार दिया। डॉ. संजयन त्रिपाठी काफी समय से भाजपा के टिकट की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे थे, लेकिन टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय ताल ठोक दी थी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सियासी नजाकत को भांपते हुए संजयन त्रिपाठी को अपने पाले में खींच लिया, जिससे गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर मुकाबला सीधा 'त्रिपाठी बनाम त्रिपाठी' हो गया है। इसके साथ ही मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने भी वित्तविहीन और माध्यमिक शिक्षकों के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की गुंजाइश बढ़ा दी है, जिससे भाजपा खेमे में सक्रियता दोगुनी हो गई है।
पुरानी पेंशन, वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय और सेवा सुरक्षा बने चुनावी धुरी
शिक्षक एमएलसी चुनाव का मिजाज हमेशा से आम राजनीतिक चुनावों की तुलना में काफी अलग और मुद्दों पर केंद्रित रहता है। शिक्षक मतदाताओं के बीच सबसे प्रमुख मुद्दा पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर लगातार बना हुआ है। इसके अलावा, निजी व गैर-अनुदानित (वित्तविहीन) विद्यालयों में पढ़ाने वाले लाखों शिक्षकों के लिए न्यूनतम मानदेय, सेवा सुरक्षा की नियमावली और एडेड कॉलेजों में तदर्थ शिक्षकों के समायोजन जैसे सवाल चुनावी चर्चाओं के केंद्र में हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ के इस सम्मेलन के दौरान शिक्षकों को यह भरोसा दिलाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है कि उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने पारदर्शी शिक्षक भर्ती, समय पर वेतन भुगतान और शिक्षा में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जो काम किए हैं, वे पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में कहीं अधिक ठोस हैं।
गोरखपुर के बाद बरेली क्लब में जनसभा, दोहरी रणनीति से साख बचाने की कवायद
गोरखपुर में चुनावी शंखनाद करने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री का अगला पड़ाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड का केंद्र बरेली होने जा रहा है। अपने तय कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री बरेली पुलिस लाइन में बरेली और मुरादाबाद मंडल के नौ जिलों से आए करीब पांच हजार ग्राम प्रहरियों (चौकीदारों) के सम्मान समारोह में शामिल होंगे और उनसे सीधा संवाद करेंगे। इसके बाद दोपहर में बरेली क्लब मैदान में बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक विधान परिषद सीट से भाजपा प्रत्याशी हरि सिंह ढिल्लों के समर्थन में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। पूर्वांचल से लेकर रुहेलखंड तक लगातार दो दिनों में दो बड़े शिक्षक सम्मेलनों की कमान खुद मुख्यमंत्री द्वारा संभाले जाने से साफ है कि भाजपा विधान परिषद में अपनी ताकत को बनाए रखने के लिए किसी भी मोर्चे पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।