पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने गरमाया मिर्ज़ापुर का सियासी पारा: विंध्यधाम में भव्य स्वागत, दिखे भाजपा नेता

पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने गरमाया मिर्ज़ापुर का सियासी पारा: विंध्यधाम में भव्य स्वागत, दिखे भाजपा नेता

उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा से हाल ही में इस्तीफा देकर राजनीति में सक्रिय होने का ऐलान कर चुकीं पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के मिर्ज़ापुर पहुंचते ही जिले का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है। मिर्ज़ापुर में बतौर जिलाधिकारी अपने चर्चित कार्यकाल के दौरान जनता के बीच गहरी पैठ बनाने वाली दिव्या मित्तल शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए विंध्याचल पहुंचीं। जैसे ही उनका काफिला प्रयागराज की सीमा से मिर्ज़ापुर जिले में दाखिल हुआ, सैकड़ों समर्थकों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। उन्होंने किसी वीआईपी सुविधा का लाभ न लेते हुए गेट नंबर दो पर आम श्रद्धालुओं की सामान्य कतार में करीब डेढ़ घंटे खड़े रहकर मां विंध्यवासिनी के गर्भगृह में शीश नवाया और नौ दिवसीय विशेष अनुष्ठान का संकल्प लिया।

स्वागत में पहुंचे भाजपा नेता, मिर्ज़ापुर में क्यों छिड़ी नई राजनीतिक चर्चा?

दिव्या मित्तल के इस दौरे की सबसे चौंकाने वाली बात उनके स्वागत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी रही। भाजपा नेता रमेश दुबे सहित कई स्थानीय चेहरे न केवल उनके स्वागत समारोह में अग्रिम पंक्ति में दिखे, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह बयान भी दिया कि "अच्छे और ईमानदार लोगों का साथ देने में कोई बुराई नहीं है"। प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के बाद जहां दिव्या मित्तल ने शासन की नीतियों, पेपर लीक और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सख्त सवाल उठाए थे, वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं की इस गर्मजोशी ने जिले के सियासी गलियारों में कई कयासों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मिर्ज़ापुर में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नए समीकरणों की आहट के तौर पर देख रहे हैं।

किसी पार्टी में नहीं होंगी शामिल, नवरात्र में ही करेंगी नए रोडमैप का खुलासा

दर्शन-पूजन के बाद पत्रकारों से मुखातिब हुईं दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्थिति काफी हद तक साफ की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "मैंने राजनीति में आने की घोषणा की है, लेकिन मैं किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होने जा रही हूं"। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे मिर्ज़ापुर नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने सीधे इनकार न करते हुए सस्पेंस बनाए रखा और कहा कि वे नौ दिनों तक विंध्याचल में ही प्रवास करेंगी और इसी नवरात्र के दौरान अपने अगले कदम, विजन और रणनीति को सार्वजनिक करेंगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन चर्चाओं को भी सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी या अन्य नेताओं से उनकी कथित गुप्त मुलाकातों के दावे किए जा रहे थे।

लहुरियादह गांव का गहरा रिश्ता और नौकरशाही से राजनीति तक का सफर

मिर्ज़ापुर से दिव्या मित्तल का जुड़ाव प्रशासनिक जिम्मेदारियों से कहीं अधिक भावनात्मक माना जाता है। अपने डीएम कार्यकाल के दौरान उन्होंने जिले के पथरीले और दुर्गम लहुरियादह गांव में आजादी के 75 साल बाद नल से जल पहुंचाकर इतिहास रचा था। इस दौरे के दौरान उन्होंने लहुरियादह गांव की बुजुर्ग महिला दुईजी देवी से भी मुलाकात करने की बात कही, जिन्होंने पानी आने पर उन्हें गले लगाकर आशीर्वाद दिया था। आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से शिक्षा प्राप्त करने तथा लंदन में उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़कर आईएएस बनीं दिव्या मित्तल का मानना है कि प्रशासनिक तंत्र की अपनी सीमाएं होती हैं और अगर देश व समाज की दिशा बदलनी है तो राजनीति ही सबसे प्रभावी मंच है।

क्या निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी या खड़ा करेंगी नया जन आंदोलन?

दिव्या मित्तल के रुख से यह साफ हो गया है कि वे पारंपरिक राजनीति के सांचे में ढलने के बजाय एक वैकल्पिक और नीति-आधारित राजनीति की शुरुआत करना चाहती हैं। उनके बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि वे किसी दल का झंडा उठाने के बजाय एक मजबूत नागरिक आंदोलन या गैर-दलीय जनमंच तैयार कर सकती हैं, जो युवाओं के रोजगार, शिक्षा सुधार, प्रशासनिक जवाबदेही और स्वास्थ्य के मुद्दों पर केंद्रित हो। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चाएं गर्म हैं कि मिर्ज़ापुर की जनता से मिले अप्रत्याशित समर्थन को देखते हुए वे 2027 के विधानसभा चुनाव में मिर्ज़ापुर सदर सीट से निर्दलीय या किसी संयुक्त सामाजिक मोर्चे के चेहरे के रूप में मैदान में उतर सकती हैं। नवरात्र के अंत में उनके द्वारा किए जाने वाले ऐलान पर अब पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।