गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा में बड़ी सेंध: OHE पोल पर चढ़ने से 25 हजार वोल्ट के करंट में बुरी तरह झुलसा युवक
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील रेलवे जंक्शनों में शुमार गाजियाबाद रेलवे स्टेशन परिसर में मंगलवार सुबह एक रोंगटे खड़े कर देने वाला बड़ा हादसा घटित हो गया। रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था, चारों तरफ लगे तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और प्लेटफॉर्मों पर जवानों की लगातार गश्त के दावों की हवा उस वक्त निकल गई, जब एक 18 वर्षीय युवक सुरक्षा घेरे को धता बताते हुए सीधे रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। युवक प्लेटफॉर्म नंबर चार और पांच के बीच स्थित हाईटेंशन ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) पोल पर चढ़ गया और ऊपर से गुजर रही 25 हजार वोल्ट की विद्युत तार की चपेट में आ गया। भीषण धमाके के साथ करंट लगते ही युवक बुरी तरह झुलसकर नीचे ट्रैक पर आ गिरा, जिससे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।
प्लेटफॉर्म 4 और 5 के बीच ओएचई पोल पर चढ़ा युवक, छत्तीसगढ़ का रहने वाला है सुरेंद्र
मंगलवार की सुबह गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर आम दिनों की तरह यात्रियों की भारी भीड़ मौजूद थी और कई ट्रेनों का आवागमन हो रहा था। इसी दौरान एक युवक संदिग्ध परिस्थितियों में प्लेटफॉर्म नंबर चार और पांच के मध्य रेलवे लाइन की तरफ बढ़ा और वहां खड़े ओएचई पोल पर तेजी से ऊपर चढ़ने लगा। आसपास मौजूद यात्रियों और कुलियों ने जब तक शोर मचाकर उसे रोकने का प्रयास किया, तब तक वह ऊपर पहुंच चुका था और हाईटेंशन बिजली के तार के संपर्क में आ गया। बिजली का झटका इतना जोरदार था कि वह बुरी तरह झुलसकर सीधे पटरियों पर गिर पड़ा। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों ने तत्काल आरपीएफ कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंचे आरपीएफ जवानों ने लहूलुहान और गंभीर रूप से झुलसे युवक को ट्रैक से उठाकर तुरंत एंबुलेंस के जरिए नजदीकी जिला एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाया। शुरुआत में युवक की शिनाख्त नहीं हो सकी थी और अस्पताल में उसका रिकॉर्ड अज्ञात के रूप में दर्ज किया गया था, परंतु गहन पड़ताल के बाद उसकी पहचान छत्तीसगढ़ निवासी 18 वर्षीय सुरेंद्र के रूप में स्थापित हुई।
एमएमजी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर, हालत नाजुक
गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों की टीम ने युवक को तत्काल जीवन रक्षक प्राथमिक उपचार दिया। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. राकेश कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जब सुरेंद्र को अस्पताल लाया गया तो उसके शरीर का बड़ा हिस्सा बिजली के हाईटेंशन करंट की वजह से बुरी तरह झुलस चुका था और उसकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। डॉक्टरों ने आपातकालीन वार्ड में बर्न इंजरी का शुरुआती उपचार किया और घावों पर मरहम-पट्टी की, लेकिन युवक की गंभीर और चिंताजनक शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर और उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के लिए तत्काल दिल्ली के हायर मेडिकल सेंटर (सफदरजंग अस्पताल) के लिए रेफर कर दिया गया। युवक के परिजनों से संपर्क साधने के लिए स्थानीय पुलिस और आरपीएफ की टीमें छत्तीसगढ़ में उसके गृह पते का सत्यापन करने में जुटी हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, नियमों की अनदेखी पर लिखा पत्र
इस दर्दनाक हादसे के बाद जिला एमएमजी अस्पताल प्रशासन और स्थानीय रेलवे प्रबंधन के बीच स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और प्रोटोकॉल को लेकर तकरार भी सामने आ गई है। सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने रेलवे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर जब भी कोई बड़ा हादसा होता है या कोई यात्री घायल होता है, तो रेलवे के अपने स्थापित मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत पहले घायल को रेलवे के अपने अस्पताल ले जाया जाना चाहिए और वहां आपातकालीन प्राथमिक उपचार दिया जाना चाहिए। लेकिन गाजियाबाद स्टेशन अधीक्षक की ओर से सिर्फ एक सामान्य पत्र (मेमो) बनाकर और एंबुलेंस बुलाकर घायलों को सीधे जिला एमएमजी अस्पताल भेज दिया जाता है। सीएमएस ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी रेलवे स्टेशन पर होने वाले हादसों के घायलों को बिना प्राथमिक इलाज के सीधे उनके अस्पताल भेज दिया जाता रहा है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने रेलवे प्रशासन को कड़ा पत्र लिखकर औपचारिक रूप से अवगत कराया है कि वे अपने स्वास्थ्य तंत्र को सक्रिय करें और आपातकालीन प्रोटोकॉल का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें।
हाई-सिक्योरिटी जोन में सुरक्षा चूक की गहन जांच शुरू, खंगाले जा रहे हैं सीसीटीवी फुटेज
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन देश के सबसे व्यस्ततम रेल मार्गों में से एक है, जहां से चौबीसों घंटे राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी वीआईपी ट्रेनों का संचालन होता है। ऐसे अति-संवेदनशील रेलवे स्टेशन पर दिनदहाड़े किसी युवक का ट्रैक पर जाना और ओएचई पोल पर चढ़ जाना सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। स्टेशन के हर कोने पर आरपीएफ और जीआरपी के जवानों की तैनाती रहती है और दर्जनों आधुनिक सीसीटीवी कैमरों से कंट्रोल रूम में 24 घंटे लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। इस सबके बावजूद युवक पोल पर चढ़ने में कैसे कामयाब हो गया, इसकी विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच अधिकारी स्टेशन पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि युवक किस रास्ते से ट्रैक पर पहुंचा, क्या वह मानसिक रूप से विक्षिप्त था, या फिर किसी घरेलू विवाद या तनाव के चलते उसने आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया था।