नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच फंसे यूपी के नागरिकों को बचाने योगी सरकार ने संभाला मोर्चा: 54 जवानों के साथ SDRF और PAC की विशेष टीमें नेपाल रवाना, रबर और एल्युमिनियम बोट्स तैनात

नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बीच फंसे यूपी के नागरिकों को बचाने योगी सरकार ने संभाला मोर्चा: 54 जवानों के साथ SDRF और PAC की विशेष टीमें नेपाल रवाना, रबर और एल्युमिनियम बोट्स तैनात

पड़ोसी देश नेपाल के पर्वतीय और जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश, बादल फटने और नदियों के उफान के चलते पैदा हुई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों और विशेषकर उत्तर प्रदेश के निवासियों की सुरक्षित निकासी के लिए बड़े पैमाने पर मोर्चा संभाल लिया है। नेपाल के विभिन्न पर्यटन स्थलों, पोखरा, काठमांडू, रसुवा और जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे सैकड़ों भारतीय नागरिक सड़क संपर्क टूटने और हाईवे पर मलबा गिरने के कारण फंसे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल संज्ञान लिया और सीमा पार राहत-बचाव कार्यों में सहयोग देने तथा प्रदेश के नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) के 54 जांबाज जवानों के विशेष दस्ते को आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों के साथ नेपाल रवाना कर दिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार के इस त्वरित कदम का मुख्य उद्देश्य न केवल सीमावर्ती जलमग्न इलाकों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है, बल्कि नेपाल के भीतर संपर्क विहीन हो चुके तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और कामगारों को आवश्यक खाद्य सामग्री, प्राथमिक उपचार और सुरक्षित परिवहन मुहैया कराकर स्वदेश वापस लाना है। राज्य के राहत आयुक्त कार्यालय को इस पूरे अभियान का नोडल केंद्र बनाया गया है, जहां से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और नेपाल के स्थानीय प्रशासन के साथ चौबीसों घंटे रीयल-टाइम समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

54 जवानों का स्पेशल रेस्क्यू दस्ता: 32 SDRF और 22 PAC के जवान नेपाल सीमा पर तैनात

नेपाल में चलाए जा रहे इस अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू ऑपरेशन को जमीन पर प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी सबसे दक्ष और प्रशिक्षित आपदा प्रबंधन इकाइयों को मैदान में उतारा है। राहत आयुक्त कार्यालय से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राहत एवं बचाव अभियान के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की एक पूरी विशेष प्लाटून को नेपाल भेजा गया है, जिसमें 32 अत्याधुनिक प्रशिक्षित कमांडो और गोताखोर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पीएसी (PAC) की 26वीं बटालियन के 22 विशेष जवानों की टुकड़ी को भी इस दल के साथ संयुक्त रूप से तैनात किया गया है।

जलमग्न और तेज बहाव वाले इलाकों में लोगों को निकालने के लिए जवानों को अत्याधुनिक जीवनरक्षक नौकाओं से लैस किया गया है। वर्तमान में मौके पर 4 हाई-टेक रबर बोट्स राहत कार्य में जुटी हैं, जबकि संकरी और पथरीली पहाड़ी नदियों के तेज बहाव में भी सुरक्षित संचालन के लिए अतिरिक्त एसडीआरएफ प्लाटून के साथ विशेष एल्युमिनियम बोट्स भी सीमावर्ती सिंधुरिया और तराई के संवेदनशील क्षेत्रों में भेजी जा रही हैं। इन टीमों के पास सैटेलाइट कम्यूनिकेशन उपकरण, गहरे पानी में सर्च करने वाले आधुनिक सोनार सिस्टम, लाइफ जैकेट्स, रस्सियां और आपातकालीन चिकित्सा किट मौजूद हैं, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में फंसे लोगों तक त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।

हेल्पलाइन 1070 सक्रिय: परिजनों की मदद के लिए राहत आयुक्त कार्यालय ने बनाया 24 घंटे का कंट्रोल रूम

नेपाल में फंसे उत्तर प्रदेश के नागरिकों के चिंतित परिजनों की सहायता और त्वरित सूचना आदान-प्रदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 1070 को 24 घंटे के लिए पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। लखनऊ स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) में एक समर्पित हेल्पडेस्क स्थापित की गई है।

प्रदेश का कोई भी नागरिक, जिसके परिवार का कोई सदस्य, रिश्तेदार या परिचित नेपाल के बाढ़ या भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में फंसा हुआ है या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है, वे सीधे टोल-फ्री नंबर 1070 पर कॉल करके अपने परिजनों का नाम, अंतिम लोकेशन, वाहन संख्या और मोबाइल नंबर दर्ज करा सकते हैं। कंट्रोल रूम में प्राप्त होने वाले प्रत्येक विवरण को तुरंत ग्राउंड पर तैनात एसडीआरएफ टीमों, भारतीय दूतावास और सीमा सुरक्षा बल (SSB) के साथ साझा किया जा रहा है ताकि लापता व्यक्तियों की लोकेशन को जीपीएस और स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से ट्रैक कर उन्हें सुरक्षित शेल्टरों तक पहुंचाया जा सके।

नेपाल में जलप्रलय और भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में हाई अलर्ट: सीएम योगी ने दिए 24 घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश

नेपाल के सिंधुपालचोक, रसुवा, बागमती और गंडकी प्रांतों में भारी बारिश से भोटेकोशी, नारायणी (बड़ी गंडक) और बागमती नदियां रौद्र रूप धारण कर चुकी हैं। नेपाल के बैराजों और जलग्रहण क्षेत्रों से भारी मात्रा में छोड़े जा रहे पानी का सीधा असर उत्तर प्रदेश के तराई जिलों पर भी पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के सभी सीमावर्ती जनपदों—महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को हाई अलर्ट मोड पर रहने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सीएम योगी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सीमा पर स्थित सभी प्रमुख इंट्री पॉइंट्स (जैसे सोनौली, रुपईडीहा, बढ़नी और गौरीफंटा) पर जिला प्रशासन की ओर से विशेष सहायता शिविर (Help Desks & Transit Camps) स्थापित किए जाएं। नेपाल से सुरक्षित निकलने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए सीमा पर भोजन, शुद्ध पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और उनके गृह जनपदों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए परिवहन निगम की बसों की मुफ्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही, गंडक और घाघरा नदियों के तटबंधों पर जलस्तर की निगरानी के लिए सिंचाई विभाग के अभियंताओं की टीमें दिन-रात गश्त कर रही हैं।

सीमा पार भी नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि: यूपी के आपदा प्रबंधन का नया मॉडल

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नेपाल में आपदा के बीच अपने प्रशिक्षित राहत बलों को भेजकर रेस्क्यू की कमान संभालना राज्य के सुदृढ़ और संवेदनशील प्रशासनिक तंत्र को दर्शाता है। पूर्ववर्ती वर्षों में जहां प्राकृतिक आपदाओं के समय केवल सीमाओं की रक्षा तक राहत कार्य सीमित रहते थे, वहीं आज का उत्तर प्रदेश अपने नागरिकों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के समन्वय के साथ सीधे ग्राउंड जीरो पर उतर रहा है।

राहत आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक नेपाल में फंसे अंतिम उत्तर प्रदेश वासी को सुरक्षित स्वदेश नहीं ले आया जाता, तब तक एसडीआरएफ और पीएसी का यह संयुक्त अभियान पूरी क्षमता के साथ निरंतर जारी रहेगा। शासन की इस तत्परता और ग्राउंड लेवल पर शुरू हुई तेज कार्रवाई से नेपाल में फंसे पर्यटकों और उनके गृह जनपदों में बैठे लाखों परिजनों में सुरक्षा और राहत की उम्मीद जागी है।

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