'दोहरा मापदंड नहीं चलेगा': SCO में इशाक डार के सामने राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को लताड़ा
मध्य एशिया के रणनीतिक देश ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ (SCO) की ‘काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट’ की अहम बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सम्मेलन के मुख्य मंच से पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के ठीक सामने इस्लामाबाद की आतंकी नीतियों की धज्जियां उड़ा दीं। राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में दो टूक कहा कि आतंकवाद को किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसके खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत के रक्षा मंत्री के इस कड़े प्रहार के समय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल असहज नजर आया, क्योंकि बैठक के दौरान दोनों नेता एक ही मुख्य गोलमेज पर आमने-सामने बैठे हुए थे।
एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह का कड़ा संदेश: 'आतंक की फंडिंग और पनाहगाहों के लिए कोई जगह नहीं'
दुशान्बे में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद न केवल बेगुनाह नागरिकों की अनमोल जिंदगियों को लील लेता है, बल्कि किसी भी क्षेत्र में निवेश, व्यापार, कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को भी पूरी तरह तबाह कर देता है। इशाक डार की सीधी मौजूदगी में सिंह ने कड़े लहजे में कहा कि जो देश या व्यवस्थाएं आतंकवादियों को वित्तीय मदद मुहैया कराती हैं, उन्हें साजो-सामान और राजनीतिक समर्थन देती हैं या अपनी जमीन पर उन्हें महफूज पनाहगाहें उपलब्ध कराती हैं, उनके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंक के खिलाफ जंग में 'अच्छा आतंकवाद' या 'बुरा आतंकवाद' जैसी कोई परिभाषा नहीं हो सकती और दुनिया को अब दोहरे रवैये से पूरी तरह बाहर आना होगा।
युवाओं के भविष्य और सामाजिक ताने-बाने को बर्बाद करता है कट्टरपंथ
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद के सामाजिक और मानवीय दुष्प्रभावों को भी गहराई से रेखांकित किया। उन्होंने उपस्थित सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद समाजों को कट्टर बनाता है, समुदायों के बीच नफरत की दीवारें खड़ी करता है और विशेष रूप से युवा पीढ़ी को उन सुनहरे अवसरों और भविष्य से वंचित रखता है जिसकी वे वास्तव में हकदार हैं। राजनाथ सिंह ने यह स्पष्ट किया कि जब तक सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी तंत्र पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक यूरेशियाई क्षेत्र में स्थायी व्यापार, ऊर्जा गलियारों का विकास और आर्थिक समृद्धि का सपना साकार नहीं हो सकता। इस बैठक का जो वीडियो खुद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किया गया, उसमें भारतीय रक्षा मंत्री के तीखे वक्तव्य के दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार की बेचैनी साफ तौर पर कैमरे में कैद दिखाई दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन: 'आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को जड़ से खत्म करने की जरूरत'
राजनाथ सिंह का यह वक्तव्य भारत के उस दीर्घकालिक और आक्रामक रुख को आगे बढ़ाता है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पुरजोर ढंग से उठाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार आह्वान किया है कि केवल सक्रिय आतंकियों को निशाना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आतंकी फंडिंग, नई भर्तियों, जहरीले कट्टरपंथी दुष्प्रचार और सीमा पार मौजूद सुरक्षित पनाहगाहों के पूरे इकोसिस्टम को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना अनिवार्य है। उस बैठक में चीन, रूस, ईरान और खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मौजूद थे। भारत ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने यह साबित किया है कि पाकिस्तान की सरकार और उसकी खुफिया एजेंसियां किस तरह आतंकवाद को अपनी विदेश नीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती रही हैं, जिससे समूचा दक्षिण एशिया लगातार अस्थिरता के साए में जीने को मजबूर रहा है।
'टेररिज्म को टूरिज्म समझता है पाकिस्तान': ऐतिहासिक संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर का सबक
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में आई तल्खी और सुरक्षा स्थिति की पृष्ठभूमि बेहद गंभीर रही है। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में जब 26 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी, तब भारत ने सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए निर्णायक और कड़ा सैन्य प्रहार किया था। उस सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सेना और आतंकी ढांचों को भारी रणनीतिक व भौतिक नुकसान उठाना पड़ा था। उस सैन्य गतिरोध के शांत होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद सटीक बयान देते हुए कहा था कि जहां भारत पूरी दुनिया के लिए शांति, विकास और पर्यटन (टूरिज्म) को बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है, वहीं पाकिस्तान आतंकवाद (टेररिज्म) को ही पर्यटन समझकर बढ़ावा देता है, जो न केवल पड़ोसियों बल्कि पूरी दुनिया के अमन-चैन के लिए एक गंभीर नासूर बन चुका है। दुशान्बे में एससीओ की बैठक के जरिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया है कि भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों के खिलाफ बिना किसी समझौते के शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर पूरी मजबूती से कायम रहेगा।