एफिल टावर विवाद: हिंदू समूह के दौरे पर महिला कर्मियों को हटाने पर घमासान, चीफ देंगे इस्तीफा

एफिल टावर विवाद: हिंदू समूह के दौरे पर महिला कर्मियों को हटाने पर घमासान, चीफ देंगे इस्तीफा

फ्रांस की राजधानी पेरिस के विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक एफिल टावर पर लैंगिक भेदभाव का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। एक हिंदू समूह के निजी दौरे के दौरान स्मारक की महिला सुरक्षाकर्मियों और रिसेप्शन स्टाफ को ड्यूटी से हटाए जाने के आरोपों के बाद मचे भारी हंगामे के बीच एफिल टावर संचालन कंपनी (SETE) के प्रमुख ज्यां-फ्रांस्वा मार्सिंस ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है। फ्रांस के श्रम संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम को फ्रांसीसी गणराज्य के धर्मनिरपेक्ष और लैंगिक समानता के बुनियादी मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद प्रबंधन को बैकफुट पर आना पड़ा।

फ्रांस के कड़े श्रम कानूनों और यूरोपीय संघ के मानवाधिकार मानकों के तहत कार्यस्थल पर लिंग, धर्म या जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव प्रतिबंधित है। ऐसे में पेरिस के सबसे प्रमुख पर्यटन प्रतीक पर इस तरह के निर्देश लागू किए जाने से फ्रांसीसी मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।

एफिल टावर पर क्या हुआ था? जानिए पूरा घटनाक्रम

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एफिल टावर पर एक अंतरराष्ट्रीय हिंदू धार्मिक एवं सांस्कृतिक समूह के विशेष प्रतिनिधिमंडल का निजी दौरा निर्धारित था। रिपोर्ट्स के अनुसार, दौरे के दौरान समूह के साथ संपर्क में आने वाले अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों में केवल पुरुष कर्मियों को तैनात करने का कथित तौर पर निर्देश दिया गया। इसके तहत वहां नियमित शिफ्ट में तैनात महिला सुरक्षाकर्मियों और कस्टमर सर्विस एग्जीक्यूटिव्स को उस विशेष क्षेत्र से हटाकर अन्य गैर-दृश्य या बैक-ऑफिस जिम्मेदारियों में भेज दिया गया।

जैसे ही यह बात स्मारक के कर्मचारियों के बीच फैली, वहां की प्रमुख श्रमिक यूनियनों (विशेष रूप से CGT) ने कड़ा एतराज जताया। महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि एक निजी समूह की धार्मिक मान्यताओं या वरीयताओं को संतुष्ट करने के लिए सार्वजनिक सेवा में तैनात कर्मियों के साथ उनके लिंग के आधार पर भेदभाव किया गया, जो फ्रांसीसी कार्यसंस्कृति और संविधान दोनों का खुला उल्लंघन है।

ट्रेड यूनियनों का गुस्सा और चीफ के इस्तीफे की पेशकश

इस फैसले के विरोध में एफिल टावर के कर्मचारी संगठनों ने कार्य बहिष्कार और आपातकालीन बैठक बुलाई। यूनियनों का स्पष्ट कहना था कि फ्रांस में कोई भी आगंतुक या समूह, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, सार्वजनिक स्थलों पर सरकारी या अर्ध-सरकारी कर्मचारियों के लिंग का चयन नहीं कर सकता।

मामले के राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उछलने के बाद एफिल टावर संचालन संस्था के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया। भारी दबाव और आंतरिक जांच के आदेश के बीच कंपनी के चीफ ने स्वीकार किया कि इस पूरे प्रकरण में स्थिति को सही तरीके से नहीं संभाला गया। विवाद को शांत करने और संगठन की साख बचाने के लिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया।

फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष कानून और कार्यस्थल समानता पर छिड़ी बहस

फ्रांस दुनिया भर में अपनी सख्त 'लाइसिते' (Laïcité यानी धर्मनिरपेक्षता) नीति के लिए जाना जाता है, जहां सार्वजनिक संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं में धार्मिक प्राथमिकताओं को कानून से ऊपर रखने की सख्त मनाही है। फ्रांसीसी कानून यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों के अधिकार किसी ग्राहक या संस्था के व्यक्तिगत या धार्मिक विश्वासों से प्रभावित न हों।

मानवाधिकार और महिला संगठनों ने इस घटना को एक खतरनाक नजीर बताते हुए कहा कि अगर इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं की जाती, तो भविष्य में निजी दौरों और आयोजनों में अन्य सार्वजनिक सेवाओं में भी इस तरह की अनुचित शर्तें स्वीकार की जाने लगतीं। पेरिस सिटी काउंसिल, जो एफिल टावर की मालिक संस्था है, ने भी इस घटना पर रिपोर्ट तलब की है और भविष्य में ऐसे किसी भी निर्देश को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की बात कही है।