मोदी कैबिनेट के 3 बड़े फैसले: किसानों के लिए गेहूं की MSP में बढ़ोतरी, मिली बड़ी सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet Meeting) की अहम बैठक में देश के किसानों, ऊर्जा क्षेत्र और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तीन बड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। आगामी रबी सीजन की बुवाई से ठीक पहले केंद्र सरकार ने अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से गेहूं सहित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही देश को हरित ऊर्जा का हब बनाने के लिए 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3' (GEC Phase-III) को मंजूरी प्रदान की गई है। वहीं, राजधानी दिल्ली में जाम की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए रियल-टाइम स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर भी कैबिनेट की मुहर लगी है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में सरकार के इन फैसलों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार का ध्यान किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों को ग्रिड से जोड़ने और बड़े शहरों के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर केंद्रित है।
1. किसानों को बड़ा तोहफा: गेहूं समेत रबी फसलों की MSP में बढ़ोतरी
कैबिनेट की बैठक में सबसे प्रमुख फैसला देश के करोड़ों किसानों के हित में लिया गया। सरकार ने रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल करने को मंजूरी दे दी है। पिछले सत्र के मुकाबले गेहूं की दर में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला उत्पादन लागत के अखिल भारतीय भारित औसत का कम से कम 1.5 गुना मूल्य सुनिश्चित करने की नीति के तहत लिया गया है। गेहूं की बुवाई अक्टूबर माह से प्रारंभ हो जाती है, ऐसे में बुवाई से पहले समर्थन मूल्य घोषित होने से किसानों को अपनी फसल का चयन करने और बेहतर आर्थिक योजना बनाने में सीधी मदद मिलेगी। सरकार ने इस सीजन में रिकॉर्ड 12.1 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा चना, मसूर, सरसों और कुसुम जैसी अन्य रबी फसलों के समर्थन मूल्य में भी लागत के आधार पर वृद्धि की गई है।
2. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (फेज-III): ऊर्जा क्षेत्र को 1.86 लाख करोड़ का बूस्ट
मंत्रिमंडल ने देश के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को गति देने के लिए 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3' (Green Energy Corridor Phase-III) योजना को आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए कुल 1,86,405 करोड़ रुपये का भारी-भरकम परिव्यय तय किया गया है।
इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों में स्थापित होने वाले सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा संयंत्रों से उत्पन्न होने वाली बिजली को राष्ट्रीय पावर ग्रिड तक सुगम तरीके से पहुंचाना है। जैसे-जैसे भारत गैर-जीवाश्म ईंधन की ओर बढ़ रहा है, ग्रिड की क्षमता, बिजली ट्रांसमिशन और भंडारण तंत्र को उन्नत करना अनिवार्य हो गया था। इस परियोजना के लागू होने से न केवल देश में निर्बाध स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
3. दिल्ली मूव्स टू रियल-टाइम ट्रैफिक: 1,789 करोड़ से बदलेगा राजधानी का ट्रैफिक सिस्टम
तीसरा महत्वपूर्ण फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के आवागमन और यातायात प्रबंधन से जुड़ा हुआ है। कैबिनेट ने 'वन नेटवर्क स्मार्टर ट्रैफिक: दिल्ली मूव्स टू रियल-टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट' (One Network Smarter Traffic) परियोजना को अपनी मंजूरी दे दी है। दिल्ली पुलिस द्वारा क्रियान्वित किए जाने वाले इस हाई-टेक प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1,789.52 करोड़ रुपये रखी गई है।
इस परियोजना के तहत दिल्ली के 42 प्रमुख व्यस्त ट्रैफिक कॉरिडोर को तीन चरणों में आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम सेंसर कैमरों से लैस किया जाएगा। इसे 24 महीनों के भीतर पूरी तरह जमीन पर उतारने का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके बाद आगामी 5 वर्षों तक इसका उच्चस्तरीय संचालन और रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने से ट्रैफिक सिग्नलों का समय वाहनों के वास्तविक दबाव के आधार पर ऑटोमैटिक एडजस्ट होगा, जिससे जाम, ईंधन की बर्बादी और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।