भुवनेश्वर कुमार के अनचाहे क्लब में गुरनूर बराड़ की एंट्री: 10 ओवर में लुटाए 90 से ज्यादा रन
भारतीय क्रिकेट में अपनी रफ्तार और लंबे कद के दम पर चयनकर्ताओं की नजरों में आने वाले युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ के नाम एक ऐसा अनचाहा और शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है, जिसे कोई भी गेंदबाज अपने करियर के आंकड़ों में कभी याद नहीं रखना चाहेगा। 50 ओवर के प्रारूप यानी लिस्ट-ए क्रिकेट में कसी हुई गेंदबाजी और सटीक लाइन-लेंथ का जहां सबसे बड़ा महत्व होता है, वहीं गुरनूर बराड़ एक बार फिर बल्लेबाजों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए और 10 ओवर के अपने कोटे में 90 से अधिक रन लुटा बैठे। इसके साथ ही वह भारतीय अंतरराष्ट्रीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के उस बेहद शर्मिंदा करने वाले विशिष्ट क्लब में शामिल हो गए हैं, जिसमें कोई भी गेंदबाज दो बार 90 से अधिक रन खर्च करने की अनचाही उपलब्धि हासिल करता है।
आधुनिक सफेद गेंद के क्रिकेट में जहां बल्लेबाजों का दबदबा बढ़ता जा रहा है और सपाट पिचों पर रनों की बारिश हो रही है, वहीं युवा तेज गेंदबाजों के लिए रन रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। गुरनूर बराड़ की यह महंगी गेंदबाजी अब क्रिकेट पंडितों और विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
क्या है वह अनचाहा क्लब जिसमें शामिल हुए गुरनूर बराड़?
क्रिकेट में लिस्ट-ए या एकदिवसीय (ODI) मैचों में 10 ओवर के स्पेल में 90 या उससे अधिक रन देना किसी भी गेंदबाज के लिए सबसे बुरे दिनों में गिना जाता है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्विंग के सरताज माने जाने वाले अनुभवी गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के नाम भी वनडे क्रिकेट में दो बार 10 ओवर में 90 से अधिक रन खर्च करने का अवांछित रिकॉर्ड दर्ज रहा है। भुवनेश्वर ने साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में 10 ओवर में 106 रन लुटाए थे, जबकि एक अन्य मौके पर भी उनका स्पेल बेहद महंगा साबित हुआ था।
अब घरेलू क्रिकेट के लिस्ट-ए मैचों में पंजाब की ओर से खेलने वाले तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ ने भी इस अनचाहे क्लब में अपना नाम दर्ज करा लिया है। गुरनूर बराड़ अपने लिस्ट-ए करियर में दूसरी बार एक ही मैच में 90 से अधिक रन खर्च करने वाले चुनिंदा भारतीय तेज गेंदबाजों की सूची में आ खड़े हुए हैं।
बल्लेबाजों का खौफनाक प्रहार: 10 ओवर के कोटे में जमकर हुई धुनाई
मुकाबले के दौरान विपक्षी बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही गुरनूर बराड़ की तेज गति को अपनी ढाल बनाया और मैदान के चारों तरफ चौकों-छक्कों की झड़ी लगा दी। पारी की शुरुआत में जहां नई गेंद से स्विंग मिलने की उम्मीद थी, वहां बराड़ अपनी लेंथ पर नियंत्रण नहीं रख सके। बल्लेबाजों ने शार्ट-पिच और फुल-टॉस गेंदों का पूरा फायदा उठाते हुए उनके शुरुआती ओवरों में ही जमकर रन बटोरे।
डेथ ओवरों में जब यॉर्कर और धीमी गति की गेंदों की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब भी बराड़ दबाव में नजर आए। विपक्षी टीम के मध्यक्रम और निचले क्रम के बल्लेबाजों ने अंतिम ओवरों में उनकी गेंदों पर बड़े शॉट लगाए। 10 ओवर पूरे होते-होते गुरनूर बराड़ के गेंदबाजी विश्लेषण में 90 से ज्यादा रन जुड़ चुके थे और उनकी इकॉनमी रेट 9 से ऊपर पहुंच गई। इस तरह की महंगी गेंदबाजी ने न केवल उनकी टीम की रणनीति को बिगाड़ा, बल्कि विपक्षी टीम को एक विशाल स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में चर्चा में रहे हैं गुरनूर बराड़
गुरनूर बराड़ भारतीय घरेलू क्रिकेट के उन चुनिंदा तेज गेंदबाजों में शामिल हैं, जिनकी लंबाई और गति (Pace) ने आईपीएल फ्रेंचाइजियों को भी अपनी ओर आकर्षित किया था। पंजाब किंग्स (PBKS) और गुजरात टाइटंस जैसी फ्रेंचाइजियों के कैंप और नेट बॉलर के रूप में पहचान बनाने वाले बराड़ को उनकी 140 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार के लिए जाना जाता है।
हालांकि, क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि केवल रफ्तार होना ही आधुनिक क्रिकेट में सफलता की गारंटी नहीं है। जब तक किसी गेंदबाज के पास विविधता (Variations), सटीक यॉर्कर, बैक-ऑफ-द-हाथ स्लोअर गेंद और बल्लेबाज की कमजोरी को भांपने की चतुराई नहीं होती, तब तक सपाट पिचों पर सिर्फ गति बल्लेबाजों के लिए शॉट खेलना और आसान बना देती है। गुरनूर बराड़ के साथ भी इस मुकाबले में यही देखने को मिला, जहां गति के चक्कर में उनकी दिशा और लेंथ पूरी तरह भटक गई।
वापसी की चुनौती: लाइन-लेंथ पर करना होगा कड़ा काम
इस शर्मनाक रिकॉर्ड के बाद गुरनूर बराड़ के सामने अब अपने आत्मविश्वास को दोबारा हासिल करने की कड़ी चुनौती होगी। क्रिकेट में ऐसा कई महान गेंदबाजों के साथ हुआ है जब वे एक या दो मैचों में बहुत महंगे साबित हुए हैं, लेकिन असली परीक्षा इस बात की होती है कि वे कितनी तेजी से अपनी गलतियों से सीखकर वापसी करते हैं।
टीम मैनेजमेंट और गेंदबाजी कोच को अब बराड़ के रन-अप, रिलीज पॉइंट और डेथ ओवरों की रणनीति पर विशेष काम करना होगा। भारतीय टीम के राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरें लगातार घरेलू टूर्नामेंट्स पर टिकी रहती हैं, ऐसे में अगर गुरनूर को भविष्य में टीम इंडिया या बड़े मंचों पर अपनी दावेदारी मजबूत रखनी है, तो उन्हें अपनी इकॉनमी रेट पर लगाम लगाने के साथ-साथ इस अनचाहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर विकेट चटकाने की अपनी असली ताकत को साबित करना होगा।