अमेरिकी AI से मिसाइल बना रहे हूती विद्रोही? एंथ्रोपिक की रिपोर्ट ने पेंटागन में मचाई खलबली; क्लाउड एआई का हुआ गलत इस्तेमाल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर होने का दावा करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा गलियारों में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने हलचल मचा दी है। चैटजीपीटी (OpenAI), ग्रोक (xAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी शीर्ष अमेरिकी कंपनियों के अत्याधुनिक टूल्स जहां दुनिया का तकनीकी भविष्य तय कर रहे हैं, वहीं अब इन्हीं एआई मॉडल्स का इस्तेमाल गैर-राज्य सशस्त्र संगठन और विद्रोही समूह मिसाइल तकनीक विकसित करने के लिए करने लगे हैं।
सैन फ्रांसिस्को स्थित प्रमुख अमेरिकी एआई सुरक्षा और शोध कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में सार्वजनिक किया है कि यमन में सक्रिय एक हथियार इंजीनियरिंग सेल उनके लोकप्रिय एआई मॉडल 'क्लाउड' (Claude) का इस्तेमाल घातक मिसाइलों, लंबी दूरी के प्रोजेक्टाइल्स और गाइडेड रॉकेट सिस्टम का सॉफ्टवेयर तैयार करने में कर रहा था। लाल सागर में लगातार अमेरिकी युद्धपोतों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से जुड़े इस नेटवर्क ने अमेरिकी तकनीक को ही अपना हथियार बनाकर वाशिंगटन के सामने एक नया सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है।
2,000 किमी रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल और 'R2000' हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट
एंथ्रोपिक द्वारा जारी आधिकारिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में सक्रिय यह हथियार सेल समानांतर रूप से कई घातक मिसाइल कार्यक्रमों पर काम कर रहा था। इनमें सबसे चिंताजनक प्रोजेक्ट एक ऐसी मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल का था, जिसकी लक्षित मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर से अधिक आंकी गई थी। इतनी रेंज की मिसाइल पूरे मध्य पूर्व, लाल सागर के जलमार्गों और खाड़ी देशों के अहम तेल प्रतिष्ठानों को सीधी जद में ले सकती है।
इसके अलावा यह समूह 'R2000' नाम के एक विशेष मिसाइल सिस्टम पर भी काम कर रहा था, जिसमें आधुनिक 'हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल' (Hypersonic Glide Vehicle) का वैरिएंट विकसित करने का प्रयास शामिल था। हालांकि, एंथ्रोपिक ने अपनी पड़ताल में स्पष्ट किया है कि कंपनी को ऐसे कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले हैं जिससे यह साबित हो कि समूह ने क्लाउड की मदद से किसी पूरी तरह से ऑपरेशनल हथियार को मैदान में तैनात करने में शत-प्रतिशत कामयाबी हासिल कर ली थी। फिर भी, सॉफ्टवेयर स्तर पर उनकी प्रगति सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाने के लिए काफी है।
मानव इंजीनियरों की जगह क्लाउड एआई से कराया कोडिंग और सिमुलेशन
रिपोर्ट में इस बात का विस्तार से ब्योरा दिया गया है कि हूतियों से जुड़े इस हथियार सेल ने पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की भारी-भरकम टीम के बिना केवल एआई की मदद से जटिल एरोस्पेस इंजीनियरिंग के कार्य कैसे पूरे किए:
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गाइडेंस और नेविगेशन सॉफ्टवेयर: उड़ने वाले मानवरहित वाहनों (UAVs) और रॉकेट्स को हवा में नियंत्रित व स्थिर रखने के लिए जटिल एल्गोरिदम और पोजीशन-एस्टिमेशन कोड तैयार कराए।
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ओपन-सोर्स ऑटोपायलट इंटीग्रेशन: फोन-क्लास फ्लाइट कंप्यूटरों के साथ ओपन-सोर्स ऑटोपायलट हार्डवेयर को आपस में जोड़ने के लिए आवश्यक इंटरफेस लिखा गया।
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फर्मवेयर बिल्ड और ट्यूनिंग: कंट्रोल सेटिंग्स को ट्यून करने, फर्मवेयर रन करने और विभिन्न वातावरणीय परिस्थितियों में वर्चुअल फ्लाइट सिमुलेशन (Flight Simulation) चलाने का काम एआई से लिया गया।
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एआई के कई इंस्टेंस का एक साथ उपयोग: समूह ने क्लाउड के कई अलग-अलग सत्रों (Instances) को एक साथ सक्रिय किया। एक इंस्टेंस को शुद्ध कोडिंग का काम सौंपा गया, दूसरे का इस्तेमाल शोध और गणितीय फॉर्मूलों की पड़ताल में किया गया, जबकि तीसरे सत्र से पहले दो इंस्टेंस द्वारा लिखे गए कोड की तकनीकी समीक्षा (Code Review) करवाई गई।
एआई सेफ्टी गार्ड्रेल्स को चकमा देने की शातिर चालें
एंथ्रोपिक के सिस्टम में खतरनाक और सैन्य हथियारों के निर्माण से जुड़े सवालों को ब्लॉक करने के लिए कड़े 'सेफ्टी गार्ड्रेल्स' (Safety Filters) लगाए गए हैं। यमन के इस सेल ने इन सुरक्षा फिल्टरों को भेदने के लिए बेहद शातिर पैंतरे अपनाए।
समूह ने अपने असली मकसद को छुपाते हुए इनपुट प्रॉम्प्ट्स को मासूम नागरिक और शैक्षणिक संदर्भों में बदलकर पेश किया। उन्होंने हथियार विकसित करने की पूरी प्रक्रिया को छोटे-छोटे असंबंधित हिस्सों में बांट दिया और अलग-अलग सत्रों में बातचीत की, ताकि एआई के मॉनिटरिंग सिस्टम को किसी एक चैट से पूरे हथियार कार्यक्रम की भनक न लग सके। यद्यपि एंथ्रोपिक के ऑटोमेटेड सिस्टम ने उनके कई संदिग्ध अनुरोधों को रिजेक्ट किया, लेकिन खंडित और चालाकी से तैयार किए गए कई तकनीकी अनुरोध सुरक्षा जांच से बच निकलने में सफल रहे।
गाइडेड रॉकेट का किया फील्ड टेस्ट, फेल होने पर फिर ली एआई से सलाह
जांच में यह भी सामने आया कि इस समूह ने अपने विकसित किए गए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का उपयोग करते हुए एक गाइडेड रॉकेट का वास्तविक फील्ड टेस्ट भी आयोजित किया। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों के अनुसार यह परीक्षण सफल नहीं हो सका।
हैरान करने वाली बात यह रही कि रॉकेट टेस्ट के विफल होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर यह समूह दोबारा क्लाउड एआई के पास लौट आया। उन्होंने परीक्षण के दौरान दर्ज किए गए एरर डेटा और विसंगतियों को इनपुट के रूप में दर्ज किया और एआई से यह तकनीकी विश्लेषण कराने की कोशिश की कि आखिर रॉकेट के फ्लाइट पाथ और नियंत्रण में क्या तकनीकी खराबी आई थी। इस गतिविधि के ट्रैक होते ही एंथ्रोपिक ने तुरंत संबंधित सभी संदेहास्पद अकाउंट्स को हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया और यह डेटा अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठानों और साझेदारों को सौंप दिया।
यमन के अलावा चीन और रूस में भी छह ऑपरेशन किए गए बेअसर
एंथ्रोपिक ने खुलासा किया कि उसने हाल के दिनों में केवल यमन ही नहीं, बल्कि चीन और रूस से जुड़े ऐसे छह अलग-अलग गुप्त ऑपरेशनों को ट्रैक कर निष्प्रभावी किया है, जहां क्लाउड एआई का इस्तेमाल पारंपरिक हथियारों के निर्माण, सैन्य जासूसी या हथियारों की खरीद से जुड़े कार्यों के लिए किया जा रहा था। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
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ड्रोन स्वॉर्म (Drone Swarms) को एक साथ नियंत्रित करने वाले ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का विकास।
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नौसैनिक टॉरपीडो को हवा और पानी में रोकने वाली रक्षा प्रणालियों के कोड लिखना।
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इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को जाम (Air-Defense Suppression) करने के लिए सटीक टारगेटिंग एल्गोरिदम का निर्माण।
कंपनी ने आगाह किया कि एआई भले ही भौतिक हार्डवेयर और लैब की जगह पूरी तरह न ले सके, लेकिन यह हथियारों के विकास में लगने वाले मानवीय बौद्धिक श्रम और समय को 80 फीसदी तक कम कर देता है, जिससे कमजोर और आतंकी गुट भी तेजी से घातक क्षमताएं हासिल कर सकते हैं।
जैविक हथियारों और खतरनाक वायरसों पर रिसर्च को लेकर भी बजी खतरे की घंटी
रिपोर्ट का सबसे भयावह पहलू जैविक शोध (Biological Research) से जुड़ा है। एंथ्रोपिक की आंतरिक सुरक्षा टीम ने मात्र 30 दिनों के भीतर संभावित रूप से खतरनाक जैविक अनुसंधान से जुड़े 35 अलग-अलग रिसर्च प्रयासों को चिन्हित किया। इनमें बर्ड फ्लू, चिकनगुनिया और ऑर्थोपॉक्सवायरस जैसे महामारियां फैलाने वाले वायरस और खतरनाक टॉक्सिन शामिल थे।
एक मामले में चिकनगुनिया वायरस की संक्रामकता और इंसानी इम्यून सिस्टम को चकमा देने की क्षमता बढ़ाने से जुड़े 'गेन-ऑफ-फंक्शन' (Gain-of-Function) शोध के लिए ग्रांट प्रपोजल तैयार करने में एआई का उपयोग किया जा रहा था। वहीं दूसरे प्रयास में यह अध्ययन किया जा रहा था कि बर्ड फ्लू स्तनधारियों में कैसे आसानी से फैल सकता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि यह शोध वैध शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए था या किसी खतरनाक जैविक हथियार के निर्माण के लिए, लेकिन कंपनी ने इसे एआई के सबसे गंभीर जोखिमों में गिनाते हुए हाई-यील्ड विस्फोटकों और हथियारों की रोकथाम के लिए नए सुरक्षा क्लासिफायर तैनात कर दिए हैं।