यमन के राष्ट्रपति भवन पर हूती विद्रोहियों का भीषण मिसाइल हमला; बाल-बाल बचे प्रधानमंत्री, 4 की मौत और 10 घायल

यमन के राष्ट्रपति भवन पर हूती विद्रोहियों का भीषण मिसाइल हमला; बाल-बाल बचे प्रधानमंत्री, 4 की मौत और 10 घायल

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच यमन की अंतरिम राजधानी अदन से एक बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन सरकार के आधिकारिक मुख्यालय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अल-माशीक राष्ट्रपति भवन परिसर (Al-Maashiq Presidential Palace) को निशाना बनाते हुए एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस भीषण और सुनियोजित हमले के समय यमन के प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के कई वरिष्ठ मंत्री परिसर के भीतर महत्वपूर्ण सरकारी बैठक में मौजूद थे। मिसाइलों के गिरते ही पूरा राष्ट्रपति भवन परिसर जोरदार धमाकों से दहल उठा और आसमान में काले धुएं का विशाल गुबार छा गया। राहत की बात यह रही कि देश के प्रधानमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगी इस जानलेवा हमले में बाल-बाल बच गए, लेकिन सुरक्षा में तैनात चार जवानों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई और दस से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

5 मिसाइलें परिसर से टकराईं, कैबिनेट मंत्रियों को बंकर में सुरक्षित पहुंचाया गया

यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एर्यानी ने सोशल मीडिया पर इस हमले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि हूती विद्रोहियों ने अल-माशीक पैलेस को निशाना बनाकर कम से कम पांच मिसाइलें दागीं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमले की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और परिसर की इमारतों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए। मिसाइलें गिरते ही सुरक्षाबलों और विशेष कमांडो ने तुरंत मोर्चा संभाला और प्रधानमंत्री समेत सभी मंत्रियों को सुरक्षा घेरे में लेकर भूमिगत बंकरों और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सूचना मंत्री ने कहा कि यह हमला यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के पूरे नेतृत्व को एक झटके में खत्म करने की सोची-समझी साजिश थी, जिसे सुरक्षा तंत्र की मुस्तैदी और ईश्वर की कृपा से नाकाम कर दिया गया। मारे गए लोगों में दो प्रेसिडेंशियल गार्ड्स और दो सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, जिन्होंने मिसाइल के मुख्य प्रभाव क्षेत्र के पास तैनात रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने ली हमले की जिम्मेदारी, जारी की नई चेतावनी

हमले के तुरंत बाद हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने इस हमले की औपचारिक जिम्मेदारी लेते हुए बयान जारी किया। प्रवक्ता ने दावा किया कि यह हमला सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और यमनी सेना के सैन्य जमावड़े को निशाना बनाने की उनकी घोषित नीति के तहत किया गया था। हूती नेतृत्व ने कहा कि वे उन सभी ठिकानों पर सटीक हमले जारी रखेंगे जहां से उनके खिलाफ सैन्य अभियान संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही हूती प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए अपनी चेतावनी को दोहराते हुए कहा कि सऊदी अरब के हवाई अड्डे और उसके आसपास का हवाई क्षेत्र अब सुरक्षित नहीं हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पवित्र मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र इस दायरे से बाहर रहेंगे। इस बयान के बाद लाल सागर और अरब प्रायद्वीप में उड़ानों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ गई हैं।

सऊदी गठबंधन की जवाबी कार्रवाई, 127 मिसाइल प्लेटफॉर्म्स को किया तबाह

इस हमले के जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले संयुक्त गठबंधन ने यमन के पर्वतीय इलाकों में हूती ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। सऊदी राजधानी रियाद में एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गठबंधन के प्रवक्ता मेजर-जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कई संवेदनशील वीडियो फुटेज जारी किए, जिनमें हूती हमलों की बर्बरता और हवाई अड्डों पर मची अफरा-तफरी को दिखाया गया। जनरल मलिकी ने खुलासा किया कि हूती विद्रोहियों को क्षेत्रीय ताकतों से अत्यधिक उन्नत सैन्य तकनीक, बैलिस्टिक मिसाइलें, आत्मघाती ड्रोन और विस्फोटक से लदी नावें प्राप्त हो रही हैं। गठबंधन ने दावा किया कि जवाबी कार्रवाई करते हुए यमन के विभिन्न पहाड़ी इलाकों में स्थित 127 मिसाइल लॉन्च पैड्स, रडार स्टेशनों और गोला-बारूद के गोदामों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। इसके अलावा सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने मदीना और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर दागी गई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने में सफलता हासिल की है।

2014 से सुलग रहा है यमन, राजनीतिक समाधान की उम्मीदें फिर से धुंधली

यमन में गृहयुद्ध की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था और तत्कालीन सरकार को दक्षिण की ओर भागने पर मजबूर कर दिया था। तब से देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन को अपनी अंतरिम राजधानी बनाकर शासन चला रही है, जिसे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन प्राप्त है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से 2022 में हुआ युद्धविराम बड़े पैमाने की जंग को रोकने में कुछ हद तक कामयाब रहा था, लेकिन औपचारिक समझौते की मियाद खत्म होने के बाद राजनीतिक समाधान की कोशिशें लगातार पटरी से उतरती रही हैं। अदन के राष्ट्रपति भवन पर हुए इस सीधे मिसाइल हमले ने शांति वार्ताओं के सभी दरवाजों को लगभग बंद कर दिया है, जिससे यमन और पूरे खाड़ी क्षेत्र में फिर से एक विनाशकारी युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है।