भारतीय पायलट पर कॉकपिट में कुल्हाड़ी से वार? सुरक्षा घेरा भेदकर विमान में कैसे पहुंचा यह घातक हथियार
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के कॉकपिट में हुई हिंसक झड़प और पायलट पर जानलेवा हमले की घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नए विवाद और चर्चा ने तूल पकड़ लिया है। शुरुआती रिपोर्टों में जहां धारदार हथियार या चाकू के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, वहीं कई विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैला कि सह-पायलट ने मुख्य पायलट (जो भारतीय मूल के बताए जा रहे हैं) पर कॉकपिट के भीतर मौजूद 'कुल्हाड़ी' (Crash Axe) से हमला किया था। इस दावे के सामने आते ही हर किसी के मन में यह स्वाभाविक सवाल उठा कि जब एयरपोर्ट पर एक छोटा सा नेलकटर तक ले जाने की इजाजत नहीं होती, तो 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे कमर्शियल विमान में कुल्हाड़ी जैसा खतरनाक हथियार कहां से और कैसे पहुंच गया?
सुरक्षा चूक नहीं, विमानन नियमों का अनिवार्य हिस्सा है 'क्रैश एक्स'
हवाई यात्रियों को यह बात भले ही हैरान कर दे, लेकिन सच यह है कि यह किसी सुरक्षा जांच (सिक्योरिटी लैप्स) की खामी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत हर बड़े यात्री विमान के कॉकपिट के भीतर एक विशेष प्रकार की कुल्हाड़ी अनिवार्य सुरक्षा उपकरण के रूप में पहले से रखी होती है। इसे एविएशन की भाषा में 'क्रैश एक्स' (Crash Axe) या 'इमरजेंसी रेस्क्यू एक्स' कहा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) और फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के सुरक्षा मानकों के अनुसार, एक निश्चित भार वर्ग या यात्री क्षमता (आमतौर पर 19 से अधिक सीटों वाले विमान) वाले वाणिज्यिक यात्री विमानों में आपात स्थिति के लिए कॉकपिट के भीतर क्रैश एक्स का होना कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
कॉकपिट में क्यों रखी जाती है कुल्हाड़ी?
विमान के भीतर क्रैश एक्स को किसी हमले के लिए नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों और क्रू की जान बचाने के लिए रखा जाता है:
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आपातकालीन बचाव (Emergency Evacuation): यदि विमान की क्रैश लैंडिंग या हार्ड लैंडिंग होती है और कॉकपिट या केबिन के दरवाजे जाम हो जाते हैं, तो पायलट इस कुल्हाड़ी की मदद से पैनल या खिड़कियों को तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बना सकते हैं।
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इलेक्ट्रिकल फायर से निपटना: विमान की दीवारों या कॉकपिट कंसोल के पीछे वायरिंग में आग या धुआं उठने की स्थिति में आंतरिक फाइबर ग्लास या एल्युमिनियम पैनल को काटकर सीधे आग के स्रोत तक अग्निशामक (Fire Extinguisher) की पहुंच बनाने के लिए इसका उपयोग होता है।
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इंसुलेटेड हैंडल: यह कोई आम लोहे की कुल्हाड़ी नहीं होती। इसका हैंडल 20,000 वोल्ट तक के बिजली के झटके से सुरक्षित (हाई-वोल्टेज इंसुलेटेड) रहता है, ताकि शॉर्ट सर्किट की स्थिति में भी इसका सुरक्षित इस्तेमाल हो सके। इसका एक सिरा धारदार और दूसरा सिरा शीट मेटल या शीशा तोड़ने के लिए नुकीला (पिक) होता है।
कहां रखी होती है यह कुल्हाड़ी और इसका एक्सेस किसके पास होता है?
साल 2001 के 9/11 आतंकी हमलों के बाद विमानन सुरक्षा नियमों में भारी बदलाव किए गए थे। 9/11 से पहले कई विमानों के पिछले हिस्से या गैली (रसोई) में भी क्रैश एक्स रखी जाती थी, लेकिन उसके बाद इसे अनिवार्य रूप से केवल और केवल बुलेटप्रूफ व लॉक रहने वाले कॉकपिट (फ्लाइट डेक) के अंदर ही सुरक्षित रखना तय किया गया।
कॉकपिट में यह पायलट या को-पायलट की सीट के ठीक पीछे एक विशेष दीवार माउंट या बॉक्स में फिक्स होती है। इसका सीधा एक्सेस केवल अधिकृत कॉकपिट क्रू (पायलट और फर्स्ट ऑफिसर) के पास ही होता है। यही कारण है कि अगर कॉकपिट के भीतर दोनों पायलटों में से किसी एक की भी नीयत या मानसिक संतुलन बिगड़ जाए, तो यह रक्षात्मक आपातकालीन उपकरण ही सबसे घातक हथियार बन सकता है।
क्या फ्लाईदुबई कांड में क्रैश एक्स का ही हुआ इस्तेमाल?
फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में बोइंग 737 मैक्स विमान के भीतर जब को-पायलट ने हिंसक हमला किया, तो जांच एजेंसियां अब इस पहलू की भी फोरेंसिक जांच कर रही हैं कि क्या उसने कॉकपिट में पहले से रखी इसी क्रैश एक्स का इस्तेमाल किया था या वह किसी अन्य छोटे धारदार उपकरण को छुपाकर अंदर ले जाने में कामयाब रहा था। विमान के इमरजेंसी कोड 7500 (अवैध हस्तक्षेप/हाईजैक) भेजने और तबुक (सऊदी अरब) में आपात लैंडिंग के बाद यूएई की संयुक्त जांच टीम अब घायल पायलटों के बयानों और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) के जरिए इस खौफनाक घटना की हर एक कड़ी को जोड़ने में जुटी है।