पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर पिता से निकाल रहे निजी खुन्नस, आधी रात बुआ-कजिन्स को किया गायब
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान और उनके परिवार की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद 73 वर्षीय इमरान खान की सेहत और सुरक्षा को लेकर अब उनके बेटों ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। इमरान खान के छोटे बेटे कासिम खान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर सीधा, तीखा और सनसनीखेज आरोप लगाया है। कासिम का कहना है कि मुनीर देश के कानून और संविधान को ताक पर रखकर उनके पिता से निजी खुन्नस और बदला निकाल रहे हैं। इतना ही नहीं, परिवार का आरोप है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री को बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रखकर धीरे-धीरे मौत की तरफ धकेला जा रहा है और बाहर उनके परिजनों व रिश्तेदारों को आधी रात को घरों से उठाकर गायब किया जा रहा है।
आधी रात को नकाबपोशों ने बुआ और कजिन्स को उठाया, ठिकाने का अता-पता नहीं
कासिम खान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर सिलसिलेवार बयान जारी करते हुए अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने खुलासा किया कि उनकी तीनों बुआ—अलीमा खान, डॉ. उज्मा खान और नूरीन नियाजी के साथ-साथ उनके फुफेरे भाइयों (कजिन्स) शेरशाह और शाहरेज को जबरन उठा लिया गया है। कासिम ने कहा कि आधी रात के अंधेरे में नकाबपोश हथियारबंद लोगों और पुलिसकर्मियों ने घरों के दरवाजे तोड़कर जबरन अंदर घुसपैठ की और परिवार के सदस्यों को बख्तरबंद गाड़ियों में भरकर अज्ञात स्थान पर ले गए।
कासिम ने कहा, "यह बेहद शर्मनाक और आपराधिक कृत्य है। उन लोगों के खिलाफ न तो कोई आधिकारिक आरोप तय किया गया है और न ही परिवार या वकीलों को यह बताया गया है कि उन्हें कहां रखा गया है। हम परिवार के किसी भी सदस्य से कोई संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। यहां तक कि शाहरेज के चार और छह साल के मासूम बच्चे भी कुछ समय के लिए गायब हो गए थे। खुशकिस्मती से बच्चे मिल गए, लेकिन इसके तुरंत बाद दो और कजिन्स—अजीम और सकीना को भी उठा लिया गया। यह पूरी तरह से तानाशाही और बदले की राजनीति है। इन लोगों में इंसानियत नाम की चीज नहीं बची है।"
पिता की लोकप्रियता से दहशत में है हुकूमत और सैन्य तंत्र: कासिम खान
इमरान खान के परिवार पर हुई इस व्यापक कार्रवाई की पृष्ठभूमि में इमरान की रिहाई को लेकर प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन और रैलियां हैं। पंजाब प्रशासन और पुलिस ने कानून-व्यवस्था (MPO) के तहत अशांति फैलाने की आशंका जताते हुए इन गिरफ्तारियों को सही ठहराया है। इस पर कासिम खान ने पलटवार करते हुए कहा कि हुकूमत और सैन्य प्रतिष्ठान उनके पिता की बेपनाह लोकप्रियता से बुरी तरह खौफजदा हैं।
कासिम ने स्पष्ट किया कि उनकी बुआ और कजिन्स सामान्य तौर पर राजनीति से दूर और शांत रहते हैं। केवल उनकी अलीमा बुआ थोड़ी मुखर होकर कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। प्रशासन को डर था कि यदि परिवार के लोग इमरान खान की रिहाई के लिए जनता को लामबंद करेंगे, तो पूरा देश सड़कों पर उतर आएगा और इस अलोकतांत्रिक व्यवस्था की चूलें हिल जाएंगी। इसी डर की वजह से चुन-चुनकर पूरे खानदान को निशाना बनाया जा रहा है ताकि आवाज उठाने वाला कोई न बचे।
6x8 फीट की कालकोठरी में तिल-तिल मरने को मजबूर, आंख की रोशनी पर संकट
इमरान खान की जेल की अमानवीय परिस्थितियों का ब्योरा देते हुए उनके बेटों (सुलेमान और कासिम) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। परिजनों के अनुसार, 73 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री को अदियाला जेल की एक छोटी सी 6 गुणा 8 फीट की तंग कोठरी में अकेले रखा गया है, जहां किसी भी मानवीय संपर्क की अनुमति नहीं है। पिछले छह महीने से उन्हें अपने बेटों से फोन पर बात तक नहीं करने दी गई है और न ही परिवार के सदस्यों को मिलने दिया जा रहा है। यहां तक कि ब्रिटेन में रह रहे बेटों को पाकिस्तान आने के लिए महीनों से वीजा तक जारी नहीं किया गया।
परिवार का दावा है कि जेल में इमरान खान को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनकी दाईं आंख की गंभीर समस्या को महीनों तक नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते उनकी आंख की रोशनी लगभग जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें निजी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में भर्ती कराने के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का बहाना बनाकर उन्हें उचित इलाज मुहैया नहीं कराया। बेटों ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार और सैन्य नेतृत्व उनके पिता को जेल के भीतर धीमे जहर या उपेक्षा के जरिए धीरे-धीरे मौत के मुंह में धकेलने की साजिश रच रहे हैं।
प्रधानमंत्री काल की पुरानी तनातनी का असीम मुनीर ले रहे हैं बदला
कासिम और सुलेमान ने इस बर्बरता की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई सीधे तौर पर जनरल असीम मुनीर के इशारे पर हो रही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने असीम मुनीर को आईएसआई (ISI) प्रमुख के पद से हटा दिया था। उसी पुरानी खुन्नस और अपमान का बदला मुनीर अब पूरी ताकत के साथ ले रहे हैं।
हालांकि पाकिस्तान सरकार और सैन्य प्रवक्ता इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहानुभूति बटोरने का हथकंडा करार दे रहे हैं। लेकिन इमरान खान के बेटों के इस खुले और सीधे आरोपों ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति, सेना की भूमिका और मानवाधिकारों की बदहाली को लेकर वैश्विक मंच पर एक बार फिर भूचाल ला दिया है।