हूतियों के मिसाइल हमलों से दहला रियाद, किंग खालिद एयरपोर्ट बंद; स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई और मक्का-मदीना छोड़ बाकी हवाई अड्डों पर चेतावनी
मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों का कहर टूट पड़ा है। राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए घातक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को उच्चतम स्तर (हाई अलर्ट) पर कर दिया गया है। रियाद एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 और 4 को निशाना बनाकर किए गए भीषण हमलों में कई विदेशी नागरिकों व सऊदी पायलट सहित कई लोगों की जान चली गई और 300 से अधिक लोग घायल हो गए। इस अप्रत्याशित और भीषण हमले के तुरंत बाद सऊदी प्रशासन ने आपातकालीन कदम उठाते हुए किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन बंद कर दिया। हवाईअड्डे के रनवे और टर्मिनल परिसर में हुए भारी नुकसान का जायजा लेने और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए सिविल एविएशन अथॉरिटी ने उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख एविएशन हब में इस तरह विमानों की आवाजाही ठप होने से हजारों अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्री बीच रास्ते में फंस गए हैं और पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है।
राजधानी के स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई, घरों में कैद होने को मजबूर लोग
मिसाइल और ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए सऊदी सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने राजधानी रियाद और उसके नजदीकी इलाकों के सभी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी किया है। छात्रों, शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रियाद के सभी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर विद्यालयों में भौतिक कक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है और पूरे सप्ताह के लिए पढ़ाई को 'मदरसाती' प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन मोड में तब्दील कर दिया गया है। प्रशासन ने अभिभावकों को स्पष्ट संदेश भेजा है कि बच्चों को घरों से बाहर न निकलने दें और जब तक सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में नहीं ले लेतीं, तब तक स्कूल परिसर बंद रहेंगे। राजधानी की सड़कों पर सायरन की आवाजें और एयर डिफेंस सिस्टम की लगातार गश्त ने आम नागरिकों के बीच भारी डर पैदा कर दिया है। पूर्वी प्रांत दम्माम और किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास भी संदिग्ध प्रोजेक्टाइल और ड्रोन देखे जाने के बाद वहां भी कड़ी चौकसी बरती जा रही है।
हूतियों की सीधी चेतावनी: मक्का और मदीना को छोड़कर हर एयरपोर्ट निशाने पर
इस भीषण हमले के बाद हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने दुनिया भर की एयरलाइनों, विदेशी कर्मियों और यात्रियों के लिए बेहद आक्रामक और खुला अल्टीमेटम जारी किया है। हूती गुट ने घोषणा की है कि उन्होंने सऊदी अरब के तमाम हवाई अड्डों और एयरस्पेस को अपने सैन्य ऑपरेशनों का सीधा 'थिएटर' घोषित कर दिया है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि पवित्र धार्मिक शहरों 'मक्का' और 'मदीना' के हवाई अड्डों को छोड़कर सऊदी अरब का हर दूसरा एयरपोर्ट और हवाई गलियारा कभी भी उनके हमलों की जद में आ सकता है। उन्होंने दुनिया भर के विमानन ऑपरेटरों से कहा है कि वे अपनी उड़ानों को सऊदी हवाई क्षेत्र से दूर रखें, अन्यथा होने वाले किसी भी जान-माल के नुकसान की जिम्मेदारी उनकी खुद की होगी। हूतियों के विदेश मंत्रालय ने रियाद को सीधी धमकी दी है कि अगर सऊदी गठबंधन ने यमन में अपनी सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद नहीं की, तो आने वाले दिनों में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों (अरामको), रिफाइनरियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर इससे भी बड़े और विनाशकारी हमले किए जाएंगे।
वैश्विक स्तर पर हड़कंप, अमेरिकी दखल और तेल संकट का डर
सऊदी अरब के मुख्य हवाई अड्डे पर विदेशी नागरिकों की मौत और एयरलाइंस कर्मियों के मारे जाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह के हमले पूरी दुनिया के ट्रांसपोर्ट और ऊर्जा ढांचे को पंगु बना रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय और रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने भी नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों की भर्त्सना करते हुए अपने नागरिकों को रियाद हवाई अड्डे के आसपास सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है। उधर, अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वाशिंगटन इस बात का मूल्यांकन कर रहा है कि क्या सऊदी अरब के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य ऑपरेशनों में शामिल होना चाहिए। यदि अमेरिका या पश्चिमी देश सीधे इस जंग में कूदते हैं, तो लाल सागर और फारस की खाड़ी में तेल के टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में अचानक भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर संकट और सऊदी अरब की कड़ी चुनौती
सऊदी अरब आधुनिक अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और भारी सैन्य संसाधनों से लैस होने के बावजूद हूतियों के सस्ते आत्मघाती ड्रोनों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों को पूरी तरह रोकने में चुनौतियों का सामना कर रहा है। जानकारों का कहना है कि जब एक साथ दर्जनों ड्रोन और मिसाइलें दागी जाती हैं, तो एयर डिफेंस सिस्टम ओवरवेल्म हो जाता है और मलबा आबादी वाले इलाकों या रनवे पर गिरकर भारी तबाही मचाता है। यमन में शांति वार्ताओं के विफल होने और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के फिर से आक्रामक रुख अख्तियार करने के बाद सऊदी अरब अपनी आर्थिक सुरक्षा और 'विजन 2030' के तहत विकसित किए जा रहे पर्यटन व व्यापारिक केंद्रों को बचाने के लिए कड़े जवाबी विकल्पों पर विचार कर रहा है। सऊदी अरब की वायुसेना ने भी यमन में हूती ठिकानों पर जवाबी बमबारी तेज कर दी है, जिससे यह संघर्ष किसी भी वक्त एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलने की कगार पर पहुंच गया है।