पाकिस्तान में भूकंप के जोरदार झटकों से कांपी धरती, भारत के सीमावर्ती इलाकों तक महसूस हुई हलचल
शनिवार सुबह पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से में अचानक धरती डोलने से हड़कंप मच गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, पाकिस्तान में रिक्टर स्केल पर 5.8 की तीव्रता का जोरदार भूकंप दर्ज किया गया। भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 10:37 बजे आए इस झटके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के प्रमुख शहरों के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और उत्तरी हिस्सों में भी कंपन की खबरें सामने आईं। अचानक आए तेज झटकों से घबराकर लोग तुरंत अपने घरों, दफ्तरों और बहुमंजिला इमारतों से बाहर खुली जगहों की ओर भागते देखे गए। अंतरराष्ट्रीय भूकंप निगरानी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत स्थिति का जायजा लेना शुरू कर दिया।
कितनी थी भूकंप की तीव्रता और कहां था इसका केंद्र?
भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.8 मापी गई। भूकंप का केंद्र (Epicenter) 27.944 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 66.532 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (EMSC) ने भी इस भूकंप की पुष्टि करते हुए बताया कि इसका केंद्र बलूचिस्तान प्रांत के खुजदार (Khuzdar) शहर से लगभग 48 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में जमीन से मात्र 10 से 15 किलोमीटर की उथली गहराई (Shallow Depth) में था। जब भूकंप की गहराई कम होती है, तो सतह पर जमीन का कंपन अधिक तीव्र महसूस होता है, जिसके चलते आसपास के बड़े इलाके में तेज झटके दर्ज किए गए।
भारत तक दिखा असर: सीमावर्ती इलाकों में डोली धरती
पाकिस्तान में आए इस शक्तिशाली भूकंप का असर सीमा पार भारत के कुछ उत्तरी और पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में भी महसूस किया गया। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के सीमा से सटे कुछ इलाकों में लोगों ने हल्के से मध्यम झटके महसूस किए। इसके अतिरिक्त, उसी सुबह हिमाचल प्रदेश के शिमला में भी 4.1 तीव्रता का एक स्थानीय भूकंपीय झटका रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि, राहत की बात यह रही कि भारतीय क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली, लेकिन अचानक आए कंपन से सीमावर्ती जिलों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल जरूर बन गया।
बलूचिस्तान में क्यों बार-बार आते हैं विनाशकारी भूकंप?
भौगोलिक और भूगर्भीय दृष्टि से पाकिस्तान और विशेष रूप से बलूचिस्तान का पूरा क्षेत्र दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों (Seismic Zones) में आता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इलाका दो प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों—'इंडियन प्लेट' (Indian Plate) और 'यूरेशियन प्लेट' (Eurasian Plate)—के सक्रिय टकराव क्षेत्र (Collision Zone) के बिल्कुल मुहाने पर स्थित है। भारतीय प्लेट लगातार उत्तर दिशा की ओर यूरेशियन प्लेट की तरफ खिसक रही है, जिससे हिमालयी पट्टी और बलूचिस्तान के फॉल्ट लाइंस (जैसे चमन फॉल्ट) पर भारी भूगर्भीय दबाव (Geological Stress) जमा होता रहता है। जब यह तनाव अचानक चट्टानों के खिसकने से मुक्त होता है, तो ऊर्जा तरंगों के रूप में सतह पर भीषण भूकंप पैदा करती है।
भूकंप के दौरान और बाद में क्या करें? इन सुरक्षा नियमों का रखें ध्यान
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा की कोई पूर्व चेतावनी संभव नहीं होती, इसलिए समय पर बरती गई समझदारी ही जान बचा सकती है:
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झटके महसूस होते ही घबराने या भगदड़ मचाने के बजाय तुरंत किसी मजबूत टेबल, डेस्क या बेड के नीचे छिप जाएं और सिर को हाथों से ढक लें (Drop, Cover, and Hold On)।
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लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें; हमेशा सीढ़ियों से नीचे उतरें और बिजली के खंभों, तारों तथा ऊंची इमारतों से दूर खुले मैदान में चले जाएं।
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यदि आप किसी वाहन में सफर कर रहे हैं, तो गाड़ी को पुल या फ्लाईओवर से दूर किसी सुरक्षित खाली स्थान पर रोक लें।
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झटकों के रुकने के बाद भी तुरंत इमारतों के भीतर जाने से बचें, क्योंकि मुख्य झटके के बाद आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) आने का जोखिम बना रहता है।