ट्रंप ने दिखाई बड़ी नरमी, 'ग्राहम एक्ट' के तहत रूसी तेल खरीद पर कड़े प्रतिबंधों और शुल्कों से दी भारी छूट
वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत के लिए वाशिंगटन से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सख्त रुख में नरमी लाते हुए हाल ही में पारित 'लिंडसे ग्राहम एक्ट 2026' (Lindsey Graham Act) के तहत लागू होने वाले दंडात्मक शुल्कों और प्रतिबंधों से भारत समेत प्रमुख खरीदार देशों को छूट देने का ऐलान किया है। शुक्रवार देर रात जारी एक महत्वपूर्ण एग्जीक्यूटिव ऑर्डर (कार्यकारी आदेश) के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी ऊर्जा उत्पादों पर निर्भर देशों पर लगने वाले अतिरिक्त आयात शुल्कों को स्थगित कर दिया है। इस फैसले के बाद भारत द्वारा रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल के आयात पर मंडरा रहा 100 फीसदी तक के टैरिफ का खतरा फिलहाल टल गया है।
क्या है 'ग्राहम एक्ट 2026' और ट्रंप के नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का गणित?
18 सितंबर 2026 को अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित और राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित 'ग्राहम एक्ट' का मुख्य उद्देश्य मॉस्को के ऊर्जा राजस्व को पूरी तरह तोड़ना था। इस कानून के तहत प्रावधान था कि जो भी देश रूस से कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस या परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद खरीदेगा, उस पर अमेरिका 100 प्रतिशत तक का प्रतिशोधात्मक व्यापार शुल्क (Tariff) और सख्त वित्तीय प्रतिबंध लगाएगा।
इस कानून को लागू करने के लिए तय 30 दिनों की समय-सीमा पूरी होने से ठीक पहले ट्रंप प्रशासन ने अप्रत्याशित यू-टर्न लिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को एक औपचारिक प्रमाण-पत्र और रिपोर्ट भेजी, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि धारा 112 और 113 के तहत रूसी ऊर्जा खरीदारों पर लगाए जाने वाले भारी शुल्कों और धारा 102 से 111 और 117 के तहत तय नए वित्तीय प्रतिबंधों को रोकना इस समय "संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित में" है। इसके चलते कानून के सबसे सख्त सेकेंडरी प्रतिबंधों के प्रभाव को फिलहाल रोक दिया गया है।
भारत के लिए क्यों बेहद अहम है यह अमेरिकी छूट?
यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से ही भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए रूस से भारी मात्रा में डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल खरीदता रहा है। आज भारत की कुल तेल खरीद में रूस का हिस्सा लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
यदि अमेरिका ग्राहम एक्ट के तहत 100% आयात शुल्क का डंडा चलाता, तो भारतीय रिफाइनरियों और द्विपक्षीय व्यापार पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता था। भारतीय वस्तुओं के अमेरिकी निर्यात पर भारी असर पड़ता और देश के व्यापार संतुलन में असंतुलन पैदा हो सकता था। ट्रंप के इस फैसले से:
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भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL और रिलायंस) को बिना किसी तत्काल अमेरिकी प्रतिबंध के भय के रूसी कच्चा तेल प्रोसेस करने की छूट मिल गई है।
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घरेलू बाजार में ईंधन की खुदरा कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और त्योहारी सीजन में महंगाई के दबाव से राहत मिलेगी।
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भारत को ऊर्जा कूटनीति में रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखने में मदद मिलेगी।
ट्रंप ने रुख में नरमी क्यों दिखाई? अमेरिका की अपनी घरेलू मजबूरियां
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला किसी परोपकार के कारण नहीं, बल्कि अमेरिका की अपनी आंतरिक आर्थिक और राजनीतिक मजबूरियों का नतीजा है:
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अमेरिका में ईंधन की महंगाई और डीजल संकट: पश्चिम एशिया और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते अमेरिका और यूरोप में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है। अमेरिका में डीजल के दाम रिकॉर्ड $6.5 प्रति गैलन के स्तर तक पहुंच गए थे। यदि भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को रूसी तेल से पूरी तरह काट दिया जाता, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार जा सकती थीं, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा डाका पड़ता।
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मध्यावधि (Mid-Term) चुनावों का दबाव: अमेरिका में आगामी राजनीतिक चुनावों को देखते हुए ट्रंप प्रशासन मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिए बेताब है। ट्रक ड्राइवरों, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र को राहत देने के लिए वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को चालू रखना वॉशिंगटन की मजबूरी बन चुका है।
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भारत के साथ रणनीतिक संबंधों की जरूरत: हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका भारत जैसे क्वाड (QUAD) साझेदार को व्यापारिक मोर्चे पर अलग-थलग करने का जोखिम नहीं उठा सकता।
क्या पूरी तरह खत्म हो गए हैं प्रतिबंध? इन शर्तों पर रखें नजर
हालांकि इस फैसले से भारत और वैश्विक ऊर्जा बाजार को तात्कालिक संजीवनी मिल गई है, लेकिन विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अमेरिकी प्रशासन ने निगरानी पूरी तरह बंद नहीं की है:
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समीक्षा की शक्ति बरकरार: ट्रंप प्रशासन ने अपने आदेश में यह स्पष्ट अधिकार सुरक्षित रखा है कि वह किसी भी समय वैश्विक ऊर्जा बाजार और देशों की खरीद का आकलन करते हुए इस छूट को संशोधित या वापस ले सकता है।
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प्राइमरी प्रतिबंध जारी रहेंगे: यह राहत केवल नए कानून (ग्राहम एक्ट) के तहत दी गई है; रूसी बैंकों, अधिकारियों और तंत्र पर पहले से लागू मुख्य अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह से प्रभावी रहेंगे।
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन के इस यू-टर्न ने नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापारिक गतिरोध की आशंकाओं को काफी हद तक शांत कर दिया है और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितताओं से एक बड़ा सुरक्षा कवच प्रदान किया है।