ED के बड़े एक्शन से भरभराया अनिल अंबानी की रिलायंस पावर का शेयर: 2,033 करोड़ की संपत्ति जब्ती के बाद 5% लुढ़का

ED के बड़े एक्शन से भरभराया अनिल अंबानी की रिलायंस पावर का शेयर: 2,033 करोड़ की संपत्ति जब्ती के बाद 5% लुढ़का

अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप की प्रमुख कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड (Reliance Power Ltd) के शेयरों में गुरुवार के कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर बाजार में यह भगदड़ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कंपनी के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाई के सार्वजनिक होने के बाद मची। केंद्रीय जांच एजेंसी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन के तहत रिलायंस पावर से जुड़ी 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया है। जब्त की गई संपत्तियों में मुख्य रूप से सासन पावर (Sasan Power) के इक्विटी शेयर और बैंक खाते में जमा बैलेंस शामिल हैं। एजेंसी की इस सख्त कार्रवाई की खबर बाजार में फैलते ही निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई और शेयर धड़ाम से नीचे गिर पड़ा।

52-वीक लो पर पहुंचा रिलायंस पावर का भाव, लोअर सर्किट के करीब फिसला शेयर

ईडी के शिकंजे के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर रिलायंस पावर के शेयर में करीब 5 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को कारोबार के दौरान शेयर टूटकर ₹18.69 - ₹18.80 के स्तर तक आ गया, जो इसके 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर (52-Week Low) है। उल्लेखनीय है कि घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को व्यापक स्तर पर खरीदारी का रुख था, लेकिन रिलायंस पावर विपरीत दिशा में गोता लगाते हुए निवेशकों के पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंचाता दिखा। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, शेयर में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है और इसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 31 के करीब पहुंच चुका है, जो इसे तकनीकी तौर पर ओवरसोल्ड जोन के नजदीक ले जा रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ₹18.50 से ₹19 का स्तर इसका सपोर्ट जोन माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला? विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन और शेल कंपनियों का आरोप

ईडी द्वारा की गई जांच के अनुसार, यह मामला विदेशों से जुटाई गई धनराशि के डायवर्जन और फेमा नियमों की अनदेखी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी का आरोप है कि विदेशी स्रोतों से जुटाई गई रकम को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) और केमैन आइलैंड्स स्थित मुखौटा (शेल) कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया। इसके तहत कथित तौर पर फंड को जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) एसए में जमा किया गया और फिर उन जमाराशियों को गिरवी (कोलैटरल) रखकर विदेशी कंपनियों को लोन दिलवाए गए। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि इन विदेशी इकाइयों का असल नियंत्रण और प्रबंधन भारत से अनिल अंबानी समूह द्वारा अपने गुप्त लोगों (फ्रंट पर्सन्स) के जरिए किया जा रहा था और सौदों को वैध दिखाने के लिए दस्तावेजों में बैक-डेटिंग की गई थी।

आरोपों पर रिलायंस पावर की सफाई: कानूनी विकल्पों की तैयारी

जांच एजेंसी के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए रिलायंस पावर ने आधिकारिक रेगुलेटरी फाइलिंग में स्पष्ट किया कि वह प्रवर्तन निदेशालय के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती है और इन्हें विवादित मानती है। कंपनी ने शेयर बाजारों को सूचित किया कि वह अपने व्यावसायिक हितों के साथ-साथ सभी शेयरधारकों, प्रमोटरों और अन्य हितधारकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी ने कहा कि वह अपने कानूनी सलाहकारों से विमर्श कर रही है और सक्षम अपीलीय प्राधिकरण व अदालतों के समक्ष इस आदेश को चुनौती देने और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम समय रहते उठाएगी।