तिहाड़ जेल में आशुतोष रांका और सौरभ दास की उड़ी नींद: जमीन पर सोने को मजबूर, बैरक में ब्लेड से जानलेवा हमले का सता रहा डर
दिल्ली की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे बंद आशुतोष रांका और सौरभ दास की रातें खौफ और बेबसी के साए में कट रही हैं। जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं और बैरकों के अंदरूनी माहौल को लेकर सामने आई ताजा जानकारियों ने दोनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों को जेल के भीतर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जहां उन्हें ठंडी जमीन पर सोने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बैरक में बंद अन्य शातिर और खूंखार बंदियों की मौजूदगी के कारण उन पर धारदार सर्जिकल ब्लेड, नुकीले चम्मच या कामचलाऊ हथियारों से जानलेवा हमले का निरंतर खतरा मंडरा रहा है। इस गंभीर खतरे को देखते हुए उनके विधिक प्रतिनिधियों की ओर से जेल प्रशासन और अदालत के समक्ष पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई गई है।
जमीन पर सोने की मजबूरी और अमानवीय हालात
तिहाड़ जेल की बैरकों में क्षमता से अधिक कैदियों की मौजूदगी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन आशुतोष रांका और सौरभ दास के मामले में सामने आई स्थिति बेहद चिंताजनक है। मिली जानकारी के अनुसार, बैरक में पर्याप्त बिस्तर, गद्दे या बुनियादी प्रबंध न होने की वजह से उन्हें फर्श पर चादर बिछाकर रातें गुजारनी पड़ रही हैं। इससे न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, बल्कि लगातार अनिद्रा और तनाव के कारण उनकी मानसिक स्थिति भी बिगड़ रही है। बचाव पक्ष का कहना है कि विचाराधीन कैदी होने के नाते उन्हें जेल मैनुअल के अनुसार बुनियादी मानवीय सुविधाएं और सुरक्षित माहौल मिलना उनका कानूनी अधिकार है, जिससे उन्हें वंचित रखा जा रहा है।
'ब्लेडबाजी' का खौफ: तिहाड़ के गैंगवार इतिहास से सहमे आरोपी
तिहाड़ जेल में कैदियों के बीच वर्चस्व की जंग और 'ब्लेडबाजी' (सर्जिकल ब्लेड या पत्तियों से हमला) की पुरानी और कुख्यात घटनाएं रही हैं। अक्सर हाई-प्रोफाइल या संवेदनशील मामलों के आरोपियों को जेल के भीतर अन्य अपराधी गिरोहों या फिरौती वसूलने वाले तत्वों द्वारा निशाना बनाया जाता है। आशुतोष रांका और सौरभ दास को उसी बैरक या आसपास के वार्डों में रखा गया है जहां पहले से कई हिंसक और आदतन अपराधी बंद हैं। सूत्रों के अनुसार, बैरक के भीतर कैदियों के हिंसक रवैये और छोटी-छोटी बातों पर होने वाले खूनी टकराव को देखते हुए दोनों को अपनी जान का सीधा खतरा महसूस हो रहा है। उन्हें डर है कि भीड़भाड़ वाले समय या बैरक बंद होने के दौरान उन पर छिपकर ब्लेड से वार किया जा सकता है।
सुरक्षा बढ़ाने और अलग सेल में शिफ्ट करने की कानूनी मांग
जान पर बने इस गंभीर खतरे को आधार बनाते हुए दोनों के वकीलों ने संबंधित अदालत और जेल महानिदेशक के समक्ष अर्जी दाखिल करने की तैयारी की है। याचिका में मांग की गई है कि उनकी बैरक में 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों के जरिए पुख्ता निगरानी की जाए और उन्हें सामान्य हिंसक कैदियों से अलग किसी सुरक्षित वार्ड या हाई-सिक्योरिटी सेल में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है कि बैरक की नियमित तलाशी ली जाए ताकि किसी भी प्रकार के अवैध धारदार हथियार या ब्लेड उन तक न पहुंच सकें। अब देखना यह होगा कि जेल प्रशासन इस अर्जी पर क्या रुख अपनाता है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।