गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं को बड़ा झटका? भारत में गहराया भारी LPG संकट, आयात आधा होने से क्या फिर बढ़ेंगे सिलेंडर के दाम
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल की सीधी आंच अब भारत के करोड़ों आम नागरिकों के रसोई घर तक पहुंच गई है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के चलते भारत इस समय एलपीजी (LPG) आपूर्ति के भीषण संकट से जूझ रहा है। वैश्विक चुनौतियों के बीच देश में कथित तौर पर हर दिन लगभग 4,00,000 बैरल एलपीजी की भारी किल्लत देखी जा रही है। इस सप्लाई चेन के टूटने से बाजार में यह कयास तेज हो गए हैं कि आने वाले दिनों में आम जनता को एक बार फिर से रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से आधा रह गया एलपीजी का आयात
निक्केई एशिया की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, कमोडिटी डेटा फर्म 'केपलर' (Kpler) के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल महीने में भारत का एलपीजी आयात गिरकर महज 3,77,620 बैरल प्रति दिन रह गया है। यह आंकड़ा फरवरी में आयात किए जा रहे 8,51,870 बैरल प्रति दिन के मुकाबले आधे से भी बेहद कम है। दरअसल, फरवरी के महीने तक रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पूरी तरह चालू था, क्योंकि तब तक अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सीधा सैन्य हमला नहीं किया था। लेकिन इस संघर्ष के जवाब में तेहरान (ईरान) ने जल्द ही इस समुद्री मार्ग को ब्लॉक कर दिया, जिसके बाद भारत समेत पूरी दुनिया पर ईंधन का यह बड़ा संकट मंडराने लगा है।
घरेलू उत्पादन पूरी क्षमता पर, फिर भी तेल कंपनियों को हो रहा ₹674 का भारी घाटा
सप्लाई की इस अभूतपूर्व कमी को पाटने के लिए भारत ने अपने घरेलू स्तर पर एलपीजी के उत्पादन को तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़कर 5,30,000 बैरल प्रति दिन हो गया है, जो कि देश के रिफाइनिंग प्लांट्स की लगभग पूरी क्षमता (फुल कैपेसिटी) के बराबर है। इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बहुत बड़ा बना हुआ है। सरकारी तेल कंपनियों के आंतरिक आंकड़े बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों को इस समय 14.2 किलोग्राम के महज एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 674 रुपये का भारी-भरकम घाटा उठाना पड़ रहा है, जिससे कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
एक्शन मोड में आई सरकार, मार्च में पहले ही बढ़ चुके हैं ₹60
सप्लाई के इस गंभीर संकट को देखते हुए केंद्र सरकार और तेल कंपनियां पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई हैं। सरकार ने इस संकट को संभालने के लिए मार्च की शुरुआत में ही 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के दाम में ₹60 की बढ़ोतरी कर दी थी। लेकिन कंपनियों को हो रहे मौजूदा घाटे को देखते हुए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आम उपभोक्ताओं पर कीमतों का एक और बड़ा बोझ डाला जा सकता है।
एक घर, एक कनेक्शन का नया सख्त नियम लागू, पीएनजी उपभोक्ताओं को अल्टीमेटम
गैस की कालाबाजारी रोकने और इसकी खपत को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बेहद कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार ने देश भर में "एक घर, एक कनेक्शन" का नया नियम पूरी सख्ती से लागू कर दिया है। इसके तहत अब किसी भी एक परिवार के लिए सब्सिडी वाली घरेलू एलपीजी और पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) दोनों का एक साथ इस्तेमाल करना पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। सरकार ने उन सभी परिवारों से अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करने की भावुक अपील की है जिनके घरों में पीएनजी (PNG) का सुचारू कनेक्शन पहुंच चुका है। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन कटवाने के लिए सरकार की तरफ से केवल तीन महीने का समय दिया गया है।
विदेशी आयात पर अत्यधिक निर्भर है भारत, नए देशों से खरीद की कोशिशें जारी
भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकताओं का लगभग दो-तिहाई (66 प्रतिशत से अधिक) हिस्सा केवल विदेशी आयात के जरिए ही पूरा करता है। भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से आता है। चूंकि खाड़ी क्षेत्र इस समय युद्ध की विभीषिका झेल रहा है, इसलिए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए खरीद के स्रोतों में विविधता लाना शुरू कर दिया है। इस संकट से निपटने के लिए भारत अब पारंपरिक देशों के अलावा ईरान, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और चिली जैसे नए देशों से भी एलपीजी खरीदने की लगातार कोशिशें कर रहा है।