Crude Oil Price Hike: ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, कच्चे तेल की कीमतों में आया 3% का जबरदस्त 'उबाल'
Crude Oil Market Update: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सोमवार, 11 मई को एशियाई ट्रेडिंग के दौरान कच्चे तेल के दामों में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। इस उछाल की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करना है, जिससे मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव और गहरा गया है।
ब्रेंट क्रूड $104 के पार, US क्रूड भी $100 के करीब
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का जुलाई कॉन्ट्रैक्ट 3% की बढ़त के साथ $104 प्रति बैरल के निशान को पार कर गया है। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) यानी अमेरिकी क्रूड भी जून कॉन्ट्रैक्ट के लिए $100 के बेहद करीब पहुंच चुका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बना रहा, तो तेल की कीमतें नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
क्यों फेल हुई ट्रंप और ईरान की बातचीत?
वॉल स्ट्रीट जर्नल और तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने प्रतिबंधों को हटाने और तेल निर्यात पर 30 दिनों की छूट जैसी शर्तें रखी थीं। इसके बदले में उसने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी मांगों को मानने से इनकार कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के इस रुख को "पूरी तरह से नामंजूर" करार दिया है। युद्ध को अब लगभग तीन महीने होने वाले हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और शिपिंग पर हमले
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में अभी भी जहाजों की आवाजाही बाधित है। हालांकि कतर का एक गैस टैंकर वहां से गुजरा है, लेकिन सुरक्षा जोखिम कम नहीं हुए हैं। रविवार को फारस की खाड़ी में एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के बाद आग लग गई, जिससे शिपिंग कंपनियों में दहशत है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत ने भी हाल ही में दुश्मन ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है।
नेविगेशन की आजादी पर कतर की चेतावनी
कतर के प्रधानमंत्री ने ईरान को साफ शब्दों में कहा है कि स्ट्रेट को दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना आग में घी डालने जैसा होगा। उन्होंने जोर दिया कि नेविगेशन की आजादी (Freedom of Navigation) के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ सकता है, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर पहले से ही संशय बना हुआ है।