EPFO Salary Limit Hike Delayed: जानिए किस वजह से केंद्र सरकार ने फिलहाल टाल दिया EPFO की सैलरी लिमिट ₹25,000 करने का प्रस्ताव
ईपीएफओ सैलरी लिमिट अपडेट: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य योगदान के लिए मासिक वेतन सीमा (वेज सीलिंग) को मौजूदा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने अभी के लिए आगे बढ़ा दिया है। सरकारी सूत्रों और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले को टालने का मुख्य उद्देश्य उद्योगों और कंपनियों को अतिरिक्त आर्थिक दबाव से बचाना है। सरकार का मानना है कि कंपनियां पहले से ही देश में नए लेबर कोड (श्रम कानूनों) को लागू करने के कारण बढ़ते अनुपालन खर्चों का सामना कर रही हैं, ऐसे में उन पर तुरंत एक और वित्तीय बोझ डालना ठीक नहीं होगा।
क्यों हो रहा है कंपनियों द्वारा इस बढ़ोतरी का विरोध?
उद्योग जगत के शीर्ष अधिकारियों और संगठनों का कहना है कि नए सोशल सिक्योरिटी कोड और वेज कोड के कड़े प्रावधानों के चलते व्यवसायों पर पहले से ही 15 से 20 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वैधानिक देनदारी (Statutory Liability) बढ़ चुकी है।
विशेष रूप से देश के बड़े आईटी सेक्टर (IT Sector) ने अकेले इन नए श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त खर्च किया है। ऐसी स्थिति में यदि ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ाई जाती है, तो कंपनियों का कॉर्पोरेट खर्च और ज्यादा बढ़ जाएगा। हालांकि, सरकारी अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वेतन सीमा में यह वृद्धि भविष्य में निश्चित रूप से होगी, लेकिन इसके लिए सभी उचित स्टेक होल्डर्स (हितधारकों) के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
क्या है मौजूदा ₹15,000 की सीमा और कंट्रीब्यूशन का गणित?
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अनिवार्य नियम: वर्तमान में EPFO के तहत अनिवार्य पीएफ योगदान के लिए बेसिक सैलरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है, जिसमें साल 2014 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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योगदान का प्रतिशत: मौजूदा नियमों के अनुसार, हर महीने कर्मचारी और नियोक्ता (एम्प्लॉयर) दोनों को कर्मचारी के बेसिक वेतन का 12-12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ खाते में जमा करना होता है। कर्मचारी का पूरा 12% हिस्सा ईपीएफ (EPF) में जाता है, जबकि नियोक्ता के 12% में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में और शेष 3.67% हिस्सा ईपीएफ में ट्रांसफर होता है।
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वित्तीय प्रभाव: चूंकि वर्तमान सीमा 15,000 रुपये है, इसलिए अधिकतम 1,800 रुपये (दोनों पक्षों की ओर से) ही कानूनी तौर पर जमा कराना अनिवार्य होता है। लेकिन, यदि यह सीमा बढ़कर 25,000 रुपये हो जाती है, तो हर महीने ईपीएफ खाते में न्यूनतम 3,000 रुपये (दोनों पक्षों से) जमा होने अनिवार्य हो जाएंगे। यही अतिरिक्त राशि कंपनियों के लिए तात्कालिक वित्तीय बोझ का कारण बन रही है।
आखिर क्यों इस सीमा को बढ़ाना बेहद जरूरी है?
श्रम मंत्रालय के आंतरिक आकलन और रिपोर्ट के अनुसार, ईपीएफओ की मासिक वेतन सीमा में 10,000 रुपये की यह बढ़ोतरी देश के करीब 1 करोड़ से अधिक अतिरिक्त कामकाजी लोगों को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में लेकर आएगी।
विभिन्न केंद्रीय मजदूर संगठन भी लंबे समय से इस सीमा को ऊपर उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि देश के बड़े महानगरों में आज के समय में कम या मध्यम कौशल वाले सामान्य श्रमिकों का मासिक मूल वेतन भी 15,000 रुपये की सीमा को पार कर चुका है। ऐसे में इस वेज सीलिंग को बढ़ाने से ये सभी कर्मचारी अनिवार्य रूप से ईपीएफओ का हिस्सा बन सकेंगे, जिससे उनका भविष्य निधि (PF Fund) और बुढ़ापे के लिए पेंशन जैसे सामाजिक लाभ पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे।