Fuel Demand Hike: मानसून में पेट्रोल-डीजल की बिक्री ने तोड़ा रिकॉर्ड, तेल कंपनियों के नए आंकड़ों ने सबको चौंकाया
आमतौर पर माना जाता है कि मानसून के मौसम में सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम होने और बारिश के कारण पेट्रोल-डीजल की खपत घट जाती है। लेकिन जुलाई 2026 की शुरुआत में एक बिल्कुल उलट और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के पहले 15 दिनों में ईंधन की बिक्री में जबरदस्त सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पेट्रोल की बिक्री में 22.9% का बंपर उछाल
जारी किए गए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 15 July 2026 के बीच देश में पेट्रोल की कुल बिक्री 22.9% बढ़कर 16.3 लाख टन पर पहुंच गई है। पिछले साल (2025) इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 13.3 लाख टन था।
अगर इसकी तुलना पिछले वर्षों से करें, तो यह बिक्री साल 2024 की समान अवधि के मुकाबले 26.7% और 2023 के मुकाबले 38.6% अधिक है। हालांकि, जून के पहले पखवाड़े (15 दिनों) की तुलना में इसमें 4.4% की मामूली गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण जून में स्कूल-कॉलेजों की छुट्टियों के चलते लोगों द्वारा की गई लंबी यात्राएं हैं।
डीजल की मांग 20.9% बढ़ी, खेती और ट्रांसपोर्टेशन जिम्मेदार
देश की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य पहिया माने जाने वाले डीजल की बिक्री में भी शानदार तेजी आई है। जुलाई के पहले 15 दिनों में डीजल की खपत 20.9% बढ़कर 34.6 लाख टन हो गई, जो पिछले साल इसी समय 28.7 लाख टन थी।
चूंकि डीजल का उपयोग भारी ट्रकों, बसों, औद्योगिक मशीनों और कृषि उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए इसकी मांग में बढ़ोतरी सीधे तौर पर मजबूत आर्थिक और परिवहन गतिविधियों की ओर इशारा करती है।
कम बारिश और किसानों की जरूरतें हैं असली वजह
एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार फ्यूल डिमांड बढ़ने के पीछे मौसम का बदला मिजाज सबसे बड़ा कारण है। इस साल मानसून देश के कई हिस्सों में समय पर पूरी तरह एक्टिव नहीं हो पाया। सामान्य से कम बारिश होने की वजह से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए मजबूरन डीजल से चलने वाले पंपों (Generators) का अधिक इस्तेमाल करना पड़ रहा है। यही वजह है कि मानसून के सीजन में घटने वाली डीजल की मांग इस बार अचानक बढ़ गई।
ATF स्थिर, LPG की मांग में लगातार गिरावट
हवाई ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की मांग में इस दौरान स्थिरता देखी गई। इसकी बिक्री 3.15 लाख टन रही, जो पिछले साल से महज 0.7% अधिक है।
दूसरी तरफ, रसोई गैस (LPG) की बिक्री में गिरावट का सिलसिला अभी भी जारी है। जुलाई के शुरुआती 15 दिनों में एलपीजी की मांग 17.5% घटकर 11.4 लाख टन रह गई। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के चलते गैस सप्लाई प्रभावित हुई थी और कमर्शियल सेक्टर (होटल-रेस्तरां) में एलपीजी खपत पर कुछ पाबंदियां थीं। हालांकि, अब ये प्रतिबंध हटने लगे हैं, जिससे आने वाले महीनों में एलपीजी की मांग में सुधार की उम्मीद है।