सोने-चांदी की कीमतों में हलचल: दिल्ली में ₹1,46,300 पर पहुंचा 24 कैरेट गोल्ड, चांदी के तेवर भी तीखे

सोने-चांदी की कीमतों में हलचल: दिल्ली में ₹1,46,300 पर पहुंचा 24 कैरेट गोल्ड, चांदी के तेवर भी तीखे

त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग, पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में जारी उठापटक के बीच सोमवार को भारतीय घरेलू सराफा बाजार में सोने और चांदी के कारोबार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। बाजार में चौतरफा अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी दोनों ही कीमती धातुओं ने एक सीमित दायरे में कारोबार किया। देश के प्रमुख सराफा संघ इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत में 80 रुपये प्रति 10 ग्राम की मामूली बढ़त दर्ज की गई। इस हल्की तेजी के बाद 24 कैरेट सोना 1,41,630 रुपये से चढ़कर 1,41,710 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।

सराफा बाजार में अन्य श्रेणियों के सोने के दामों में भी इसी अनुपात में बदलाव देखा गया। आभूषण निर्माण में सर्वाधिक लोकप्रिय 22 कैरेट सोने का भाव बढ़कर 1,29,806 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, 18 कैरेट सोने का दाम 1,06,283 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। केवल पीली धातु ही नहीं, बल्कि औद्योगिक मांग और निवेश के दोहरे इस्तेमाल वाली सफेद धातु यानी चांदी की कीमतों में भी तेजी का हल्का रुख दिखाई दिया। घरेलू बाजार में चांदी का भाव 64 रुपये प्रति किलोग्राम मजबूत होकर 1,94,479 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं और सेफ-हेवन मांग के चलते निवेशक सोने-चांदी में अपनी पूंजी को सुरक्षित बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

दिल्ली के सराफा बाजार में चमका सोना, 200 रुपये की मजबूती के साथ 1,46,300 के पार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के स्थानीय सराफा बाजार में वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों और भारतीय मुद्रा में जारी तेज गिरावट के कारण सोने में घरेलू औसत के मुकाबले कहीं अधिक उछाल देखा गया। दिल्ली के हाजिर बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने का भाव 200 रुपये की जोरदार बढ़त के साथ 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए स्तर पर जा पहुंचा। स्थानीय आभूषण विक्रेताओं और थोक व्यापारियों के अनुसार, त्योहारी खरीदारी और शादियों के आगामी सीजन को देखते हुए खुदरा खरीदारों की पूछपरख लगातार बनी हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रीमियम में इजाफा हुआ है।

सोने की कीमतों में आए इस स्थानीय उछाल के पीछे विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार की चाल ने सबसे बड़ा उत्प्रेरक का काम किया। अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 29 पैसे टूटकर 95.22 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। भारत अपनी सोने की कुल घरेलू खपत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। रुपये की इस कमजोरी ने सोने के आयात को काफी महंगा बना दिया, जिसका सीधा असर दिल्ली समेत देश के सभी प्रमुख शहरों में हाजिर कीमतों पर पड़ा। हालांकि, चांदी के मोर्चे पर निवेशकों ने थोड़ा धैर्य दिखाया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों की लगातार बिकवाली के बाद दिल्ली में चांदी 2,02,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर स्थिर बनी रही।

कॉमेक्स पर 4,000 डॉलर के पार टिका सोना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी की नई जमीन

घरेलू बाजार से इतर यदि वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंजों पर नजर डालें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बुलियन पैक में मजबूती का रुख साफ नजर आया। न्यूयॉर्क के कमोडिटी एक्सचेंज (COMEX) पर हाजिर सोना 0.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,030 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तकनीकी विश्लेषकों के लिए सबसे अहम बात यह रही कि सोना अंतरराष्ट्रीय मंच पर 4,000 डॉलर प्रति औंस के अपने बेहद मजबूत और मनोवैज्ञानिक सपोर्ट लेवल को बनाए रखने में पूरी तरह कामयाब रहा है। जब तक सोना इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तब तक लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इसमें तेजी का रुझान बरकरार माना जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर चांदी भी 0.26 प्रतिशत की तेजी दर्ज करते हुए 54.09 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती नजर आई। वैश्विक स्तर पर सोलर एनर्जी पैनल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की तरफ से आ रही निरंतर औद्योगिक खपत चांदी को 50 डॉलर के ऊपर मजबूत आधार प्रदान कर रही है। वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही आधिकारिक खरीदारी और डॉलर इंडेक्स में आ रहे उतार-चढ़ाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं के लिए सुरक्षात्मक कवच का काम किया है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले पर टिकी निगाहें, क्या कहते हैं बाजार विशेषज्ञ?

वर्तमान में वैश्विक वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक और ब्याज दरों को लेकर आने वाले फैसले पर केंद्रित है। निवेशक यह भांपने की कोशिश कर रहे हैं कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला जारी रखेगी या महंगाई के आंकड़ों को देखते हुए सख्त रुख अख्तियार करेगी। इस संदर्भ में एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी का कहना है कि वैश्विक बाजारों में सुधार, कच्चे तेल के दामों में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी बॉण्ड यील्ड में हालिया गिरावट ने सर्राफा कीमतों को निचली सतह से मजबूत सहारा दिया है। ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने बिना ब्याज वाली धातु यानी सोने में निवेश को आकर्षक बनाए रखा है।

वहीं मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह का विश्लेषण है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही पर्दे के पीछे की कूटनीतिक वार्ताओं और संभावित सैन्य विकल्पों की खबरों के बीच हाजिर सोने में यह संभलकर की जाने वाली बढ़त देखने को मिली है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर किसी भी बड़े घटनाक्रम की आशंका निवेशकों को सोने से बाहर निकलने से रोक रही है। इसके अतिरिक्त एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष जतीन त्रिवेदी का मानना है कि वैश्विक महंगाई की चिंताओं और आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों से जुड़ी नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले कॉमेक्स पर सोना 3,950 डॉलर से लेकर 4,100 डॉलर प्रति औंस के एक व्यापक दायरे में कारोबार कर सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि फेड के फैसले से पहले बड़े सौदों में सख्त स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करें।