रामकथा पार्क में जर्मन हैंगर मंच, लता मंगेशकर चौक पर बनेगा भव्य द्वार; बिछेंगे 33 लाख दीये

रामकथा पार्क में जर्मन हैंगर मंच, लता मंगेशकर चौक पर बनेगा भव्य द्वार; बिछेंगे 33 लाख दीये

प्रभु श्री राम की पावन जन्मस्थली अयोध्या में इस वर्ष आयोजित होने वाले 10वें ऐतिहासिक दीपोत्सव को लेकर तैयारियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं। राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद इस बार के दीपोत्सव को अब तक का सबसे अलौकिक, भव्य और यादगार स्वरूप देने के लिए जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्य आयोजन स्थल राम की पैड़ी पर टेंट निर्माण, मंच सज्जा और अत्याधुनिक लेजर लाइटें लगाने का कार्य दिन-रात तेजी से किया जा रहा है। घाटों पर लाखों दीयों को कतारबद्ध करने और मुख्य लेजर शो के सुचारू संचालन के लिए सोमवार से विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत घाटों का पानी सुखाकर भारी ट्रैक्टरों की मदद से जमीन का समतलीकरण कराया जा रहा है ताकि स्वयंसेवकों को दीये सजाने में कोई असुविधा न हो।

राम की पैड़ी के चारों तरफ स्थित पौराणिक इमारतों, मंदिरों और आवासीय भवनों पर विशेष हाई-टेक लेजर लाइटें लगाई जा रही हैं। दीपोत्सव की रात इन बहुआयामी लाइटों के जलते ही पूरा सरयू तट और राम की पैड़ी दूधिया रोशनी और इंद्रधनुषी छटा से नहा उठेगा। विद्युत सज्जा के इस विशाल कार्य को समय पर पूरा करने के लिए 70 से अधिक कुशल कारीगर और इंजीनियर लगातार जुटे हुए हैं। इसके साथ ही सरयू नदी के शांत जल में लेजर और साउंड शो की मदद से भगवान श्री राम के जीवन प्रसंगों और रामायण कालीन गाथाओं का सजीव चित्रण करने की विशेष तकनीक इस बार श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहने वाली है।

रामकथा पार्क में जर्मन हैंगर से तैयार होगा भव्य मुख्य मंच, लता मंगेशकर चौराहे पर बनेगा स्वागत द्वार

दीपोत्सव के आधिकारिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के केंद्र रामकथा पार्क में आधुनिक वास्तुकला से लैस वाटरप्रूफ और फायर-रेजिस्टेंट 'जर्मन हैंगर' स्ट्रक्चर लगाने का काम जोर-शोर से प्रारंभ कर दिया गया है। इसी जर्मन हैंगर के नीचे एक विशाल और सुसज्जित मुख्य मंच तैयार किया जा रहा है, जहां देश और दुनिया भर से आने वाले ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी पारंपरिक, शास्त्रीय और लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इसी मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साधु-संत और कई विशिष्ट विदेशी राजनयिक प्रभु श्री राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के प्रतीकात्मक स्वरूपों का राज्याभिषेक और वंदन करेंगे।

रामनगरी में प्रवेश करने वाले विशिष्ट अतिथियों और लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए अयोध्या के प्रमुख चौराहे यानी लता मंगेशकर चौक पर एक नयनाभिराम और विशाल प्रवेश द्वार का निर्माण शुरू हो चुका है। दीपोत्सव के दौरान मुख्य समारोह में शामिल होने वाले वीवीआईपी और आम जन इसी भव्य द्वार से होते हुए आयोजन स्थलों की ओर बढ़ेंगे। इसके अतिरिक्त साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय से लेकर सरयू तट और धर्मपथ के सभी प्रमुख चौराहों को रामायण कालीन कलाकृतियों, ताजे फूलों और डिजाइनर स्ट्रीट पोल्स से सजाने की प्रक्रिया जारी है। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD), विद्युत निगम और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी आपसी समन्वय से दिन-रात नगर के कायाकल्प में जुटे हैं।

डीएम शशांक त्रिपाठी ने दिए समयबद्ध तैयारी के निर्देश, सुरक्षा और क्राउड मैनेजमेंट का बना कड़ा खाका

दीपोत्सव के विशाल आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने सभी संबंधित प्रशासनिक और तकनीकी विभागों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। डीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी निर्माण, साज-सज्जा, स्वच्छता और बैरिकेडिंग से जुड़े कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही अयोध्या पुलिस कमिश्नरेट और पैरामिलिट्री बलों ने लाखों की संख्या में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन को लेकर सख्त सुरक्षा चक्र तैयार किया है।

भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) के लिए पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न सुरक्षा सेक्टरों और जोनों में विभाजित किया गया है। राम की पैड़ी, नया घाट, गुप्तार घाट और लता मंगेशकर चौक के संवेदनशील रास्तों पर क्लोज-सर्किट टेलीविजन (CCTV) कैमरों और एआई-सक्षम ड्रोनों से निगरानी रखी जाएगी। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सरयू जल में जल पुलिस और एनडीआरएफ/एसडीआरएफ के गोताखोरों की बोट्स 24 घंटे गश्त करेंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के बाहरी इलाकों में बड़े पार्किंग स्थल और होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं ताकि शहर के अंदरूनी मार्गों पर जाम की स्थिति न बने।

33 लाख दीयों से बनेगा नया विश्व रिकॉर्ड, 1 नवंबर से पहुंचेंगे दीये और 3 नवंबर से सजेगी पैड़ी

इस बार अयोध्या के 10वें दीपोत्सव में 33 लाख मिट्टी के दीये जलाकर अपना ही पिछला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आयोजन समिति की रूपरेखा के अनुसार 1 नवंबर तक राम की पैड़ी और आसपास के 55 घाटों पर पूरे 33 लाख दीये पहुंचा दिए जाएंगे। वर्तमान में स्थानीय कुम्हारों द्वारा तैयार किए गए 17.64 लाख से अधिक दीयों को क्वीन हो मेमोरियल पार्क स्थित केंद्रीय वेयरहाउस और सुरक्षित गोदामों में भंडारण करके रखा जा चुका है।

प्रशासनिक योजना के मुताबिक 3 नवंबर से अवध विश्वविद्यालय, विभिन्न महाविद्यालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं के 30 हजार से अधिक वालंटियर्स घाटों पर उतरेंगे। ये स्वयंसेवक निर्धारित खाकों और ज्यामितीय पैटर्न में दीयों को बिछाने और उनमें सरसों का तेल व बाती डालने का महा-अभियान शुरू करेंगे। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक टीम 4 और 5 नवंबर को ड्रोन कैमरों और क्यूआर कोड स्कैनिंग के जरिए दीयों की सटीक गणना करेगी। दीपोत्सव की पूर्व संध्या पर जब यह 33 लाख दीये एक साथ प्रज्वलित होंगे, तो रामनगरी का विहंगम दृश्य त्रेतायुग के वैभव को साकार करता दिखाई देगा।