सोना 50 हजार और चांदी 2.25 लाख रुपये टूटी: दीवाली से पहले क्यों क्रैश हुआ बुलियन मार्केट

सोना 50 हजार और चांदी 2.25 लाख रुपये टूटी: दीवाली से पहले क्यों क्रैश हुआ बुलियन मार्केट

देशभर में दीवाली और धनतेरस के त्योहार की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस बार सराफा और कमोडिटी मार्केट से आने वाले आंकड़े हर किसी को हैरान कर रहे हैं। आम तौर पर फेस्टिव सीजन के दौरान सोने और चांदी की मांग बढ़ने से भाव आसमान छूने लगते हैं, लेकिन इस साल ठीक इसके विपरीत बुलियन मार्केट में जबरदस्त बिकवाली और कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिल रही है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने दबाव के चलते कीमतें पिछले छह महीने के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं। स्थिति यह है कि सोना अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग पच्चीस प्रतिशत और चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से पचपन प्रतिशत तक टूट चुकी है।

आंकड़ों के नजरिए से देखें तो इसी वर्ष उनतीस जनवरी दो हजार छब्बीस को सोने ने एक लाख तिरानवे हजार रुपये प्रति दस ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छूकर इतिहास रचा था। वहीं औद्योगिक मांग के सहारे चांदी ने भी चार लाख बीस हजार रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक आंकड़े को छूकर सभी पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए थे। लेकिन उस पीक लेवल के बाद से बाजार में ऐसा रिवर्सल आया कि सोना करीब पचास हजार रुपये प्रति दस ग्राम और चांदी दो लाख पच्चीस हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो चुकी है। इस भारी गिरावट ने आभूषण खरीदारों, निवेशकों और ट्रेडर्स के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर त्योहारी सीजन में दोनों कीमती धातुएं क्यों क्रैश हो रही हैं और क्या दीवाली तक यह गिरावट और गहरी होगी।

क्यों क्रैश हो रहा सोना-चांदी: फेड की सख्ती, महंगा क्रूड और सीएमई मार्जिन का ट्रिपल अटैक

कमोडिटी और करेंसी मार्केट के दिग्गज विश्लेषकों के मुताबिक मौजूदा गिरावट किसी एक कारण से नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और सट्टेबाजी पर लगे कड़े नियमों का सम्मिलित परिणाम है। चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी एंड करेंसी एनालिस्ट आमिर माकदा के अनुसार इस गिरावट को तीन मुख्य बिंदुओं में समझा जा सकता है। सबसे पहला और बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व का बेहद आक्रामक रुख है। अमेरिका में ब्याज दरें सवा चार प्रतिशत से साढ़े चार प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं। दूसरी तरफ ब्रेंट क्रूड ऑयल एक सौ दस डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है, जिसने दुनिया भर में महंगाई की लपटों को फिर से भड़का दिया है। महंगाई के बढ़ते दबाव के कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की जो उम्मीदें थीं, वे लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं।

दूसरा बड़ा कारण डॉलर इंडेक्स का अपने कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच जाना है। मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण सोना और चांदी जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों यानी नॉन-यील्डिंग एसेट्स को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है, जिससे बड़े फंड्स अपनी पूंजी को सुरक्षित सरकारी बॉन्ड और डॉलर में शिफ्ट करने लगे हैं। तीसरा सबसे निर्णायक झटका डेरिवेटिव एक्सचेंजों के कड़े नियमों ने दिया है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज यानी सीएमई ने हाल ही में फ्यूचर्स ट्रेडिंग के लिए आवश्यक मार्जिन सीमा में भारी बढ़ोतरी कर दी है। चांदी के लिए मार्जिन रिक्वायरमेंट ग्यारह प्रतिशत से बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत और सोने के लिए छह प्रतिशत से बढ़ाकर आठ प्रतिशत कर दी गई। मार्जिन बढ़ने से बड़े सट्टेबाजों और हेज फंड्स को अपनी लॉन्ग पोजीशन को आनन-फानन में स्क्वायर ऑफ यानी काटना पड़ा, जिससे बाजार में बिकवाली का एक बड़ा चक्रवात शुरू हो गया। इसके साथ ही चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई सुस्ती ने चांदी की औद्योगिक मांग को घटाकर कीमतों को और नीचे धकेल दिया।

दीवाली तक क्या रहेंगे सोने-चांदी के भाव, एक्सपर्ट ने बताए अहम सपोर्ट लेवल्स

आगामी दीवाली तक सोने और चांदी के रुझान को लेकर बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि निकट भविष्य में किसी चमत्कारिक या तेज रिकवरी की गुंजाइश बेहद सीमित है। जब तक अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में नरमी नहीं आती और बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तरों पर बनी रहती है, तब तक बुलियन बाजार में मंदी का यह दबाव बरकरार रहेगा। कीमतें किसी नई रिकॉर्ड रैली में जाने के बजाय एक सीमित दायरे में कंसोलिडेट होती दिखाई देंगी। तकनीकी चार्ट्स और फंडामेंटल्स दोनों ही इस समय सोने और चांदी के लिए कमजोर संकेत दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक दीवाली के आसपास तक घरेलू बाजार में सोने की कीमतें फिसलकर एक लाख उनतालीस हजार रुपये से एक लाख सैंतीस हजार पांच सौ रुपये प्रति दस ग्राम के प्रमुख सपोर्ट जोन को छू सकती हैं। वहीं चांदी में मंदी का असर कहीं ज्यादा गंभीर रह सकता है। औद्योगिक मांग की कमी और सट्टेबाजी सौदों के घटने से चांदी का भाव एक लाख पचहत्तर हजार रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक नीचे आ सकता है। ऐसे में जो निवेशक या खुदरा खरीदार दीवाली पर खरीदारी की योजना बना रहे हैं, उन्हें बाजार में धीरे-धीरे यानी सिप मोड में निवेश करने और निचले स्तरों के स्थिर होने का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।

कच्चे तेल में लगी आग, क्या 125 डॉलर प्रति बैरल के पार जाएगा ब्रेंट क्रूड?

बुलियन मार्केट को हिलाने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों की तेजी ने भी अहम भूमिका निभाई है। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल में लगी आग का मुख्य कारण पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में बढ़ता खतरनाक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने का गहराता डर है। सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद फारस की खाड़ी और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जहाजों व तेल टैंकरों के आवागमन पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय एनर्जी ट्रेडर्स ने भारी भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है।

इसके अतिरिक्त ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर संभावित सैन्य हमलों की आशंकाओं ने भौतिक कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई चेन को अत्यंत संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड एक सौ पंद्रह डॉलर प्रति बैरल और यूएस डब्ल्यूटीआई सौ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहे हैं। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड एक सौ अठारह डॉलर के कड़े रेजिस्टेंस लेवल को टेस्ट कर सकता है। यदि यह भू-राजनीतिक संघर्ष मध्य पूर्व के मुख्य तेल निर्यातक गलियारों तक फैल गया, तो मांग में कमी आने से पहले कच्चा तेल आसानी से एक सौ पच्चीस डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर सकता है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति और गंभीर हो जाएगी।

एमसीएक्स और ग्लोबल मार्केट में आज का ताजा ट्रेडिंग स्टेटस

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आज के ताज़ा कारोबारी सत्र की बात करें तो भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों से हल्की तकनीकी रिकवरी के संकेत भी देखने को मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर हाजिर सोना चार हजार तीस डॉलर प्रति औंस के आसपास टिकने की मशक्कत कर रहा है, जबकि चांदी चौवन डॉलर प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रही है। विदेशी संकेतों के सहारे भारतीय वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर आज सोने और चांदी में मामूली बढ़त दर्ज की गई।

एमसीएक्स पर गोल्ड का दिसंबर अनुबंध आठ सौ अठहत्तर रुपये मजबूत होकर एक लाख बयालीस हजार नौ सौ दो रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। वहीं दूसरी तरफ चांदी की कीमतों में भी दो सौ इक्यासी रुपये की हल्की तेजी देखी गई, जिससे यह एक लाख छियानवे हजार रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड करती नजर आई। बाजार के जानकारों का कहना है कि निचले स्तरों पर यह छोटी-मोटी उछाल शॉर्ट कवरिंग का हिस्सा हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक ट्रेंड अभी भी दबाव वाला बना हुआ है, जिस पर हर खरीदार को बारीकी से नजर रखनी चाहिए।