शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 74,000 के नीचे खुला, निफ्टी में 123 अंकों की भारी गिरावट; निवेशक सहमे

शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 74,000 के नीचे खुला, निफ्टी में 123 अंकों की भारी गिरावट; निवेशक सहमे

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। वैश्विक मोर्चे पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे बेहद कमजोर संकेतों के कारण आज यानी गुरुवार 4 जून 2026 को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने निवेशकों के सेंटिमेंट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। आज बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते बीएसई (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स और एनएसई (NSE) का निफ्टी दोनों ही महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़कर लाल निशान के काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। इस जोरदार झटके से दलाल स्ट्रीट में हड़कंप मच गया है।

सेंसेक्स में 410 अंकों की बड़ी गिरावट, निफ्टी ने तोड़ा 23,300 का महत्वपूर्ण स्तर

गुरुवार को बाजार खुलते ही 30 शेयरों वाला बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 410 अंकों के भारी नुकसान के साथ 73,935 के स्तर पर ओपन हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 भी गिरावट का शतक लगाते हुए 123 अंक टूटकर 23,283 के स्तर पर खुला। लगातार दूसरे दिन बाजार पर भयंकर दबाव देखा जा रहा है। इससे पहले बुधवार को भी सेंसेक्स 303.67 अंक (0.41%) की गिरावट के साथ 74,346.17 पर और निफ्टी 77.95 अंक (0.33%) गिरकर 23,405.60 के स्तर पर बंद हुआ था। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिटेल रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, हालिया गिरावट यह साफ दर्शाती है कि हमारा घरेलू बाजार अब वैश्विक और भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील हो चुका है।

अमेरिका-ईरान युद्ध का साया: ट्रंप की बातचीत और क्रूड ऑयल की कीमतों पर टिकी नजरें

बाजार में इस समय सबसे बड़ा डर अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य और राजनीतिक गतिरोध को लेकर है। ईरान के विदेश मंत्री की तरफ से बयान आया है कि युद्ध को टालने या समाप्त करने को लेकर अभी तक दोनों देशों के बीच कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि इस सप्ताहांत (वीकेंड) तक दोनों पक्षों के बीच कोई बड़ा और महत्वपूर्ण शांति समझौता हो सकता है। इस अनिश्चितता के माहौल में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे बढ़ती महंगाई का खतरा गहरा गया है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और आगामी आरबीआई (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा नीति ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

वॉल स्ट्रीट से लेकर एशिया तक हर तरफ लाल निशान, टेक दिग्गजों के शेयर भी धराशायी

भारतीय बाजार पर आज अमेरिकी और एशियाई बाजारों में हुई भारी बिकवाली का सीधा असर पड़ा है। बुधवार को अमेरिकी बाजार (Wall Street) भारी दबाव में बंद हुए, जहां डाऊ जोंस 620 अंक टूट गया, एसएंडपी 500 में 0.74% और नैस्डैक में 0.89% की गिरावट रही। टेक सेक्टर की दिग्गज कंपनियों जैसे एनवीडिया, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और एएमडी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस मंदी का असर आज सुबह एशियाई बाजारों पर भी दिखा; जापान का निक्केई 1.4% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2% तक टूट गया। वहीं, गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) भी अपने पिछले बंद स्तर से 170 अंक नीचे 23,346 पर ट्रेंड कर रहा था, जिसने पहले ही भारतीय बाजार की बेहद कमजोर शुरुआत का साफ इशारा दे दिया था।

विदेशी निवेशकों (FII) ने बाजार से खींचे 5,616 करोड़ रुपये, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाला मोर्चा

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं। बुधवार को एफआईआई ने बाजार में ₹5,616.56 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली (Net Outflow) की। हालांकि, बाजार को पूरी तरह क्रैश होने से बचाने के लिए घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने आगे आकर मोर्चा संभाला और ₹5,740.89 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को थोड़ा सपोर्ट जरूर मिला।

अनिश्चितता के बीच चमका सोना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर के पार

वैश्विक तनाव और शेयर बाजार में मची इस उथल-पुथल के बीच निवेशक अब शेयर मार्केट जैसे जोखिम भरे विकल्पों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की तरफ भाग रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने (Gold) की सुरक्षित मांग तेजी से बढ़ी है और सोना 0.4% की तेजी के साथ 4,450 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। दूसरी तरफ, तेल के मोर्चे पर हल्की नरमी देखी गई है जहां ब्रेंट क्रूड 0.69% की गिरावट के साथ 97.14 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 95.4 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में ऐसी ही अस्थिरता बनी रहेगी।

 

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