Petrol Diesel Price: जनता की जेब पर एक और वार! फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें क्यों हर राज्य में अलग हैं रेट और सरकार ने क्या दी सफाई
देश में महंगाई की मार झेल रही जनता को शनिवार की सुबह एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। तेल कंपनियों ने आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर से भारी इजाफा कर दिया है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के कुछ राज्यों में पेट्रोल का भाव 112 रुपये प्रति लीटर के भी पार निकल गया है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब तेल के दामों में बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम आदमी का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।
10 दिनों में ₹5 तक महंगा हुआ तेल, कीमतों में आज फिर लगी आग
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने शनिवार 23 मई 2026 को पेट्रोल की कीमतों में 0.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 0.91 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का एलान किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले सिर्फ 10 दिनों के अंतराल में ही पेट्रोल और डीजल के रेट करीब 5 रुपये तक बढ़ चुके हैं। इस लगातार होती बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बढ़ोतरी के बाद अब देश के कई प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम आसमान छूने लगे हैं।
सरकार की सफाई: '76 दिनों तक हमने खुद उठाया कच्चे तेल का भारी बोझ'
लगातार बढ़ते दामों पर मचे चौतरफा बवाल के बीच अब केंद्र सरकार की तरफ से भी इस पर आधिकारिक बयान सामने आया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह से यह बढ़ोतरी करना बेहद जरूरी हो गया था। सरकार ने तर्क दिया है कि युद्ध शुरू होने के बाद लगातार 76 दिनों तक कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों का पूरा दबाव सरकार और तेल कंपनियों ने खुद उठाया था और जनता पर इसका असर नहीं होने दिया था। सरकार का यह भी दावा है कि वैश्विक संकट के बावजूद दुनिया के अन्य विकसित देशों की तुलना में भारत में पेट्रोल और डीजल के रेट में उतनी अधिक बढ़ोतरी नहीं हुई है।
आखिर क्यों हर राज्य में अलग-अलग होता है पेट्रोल-डीजल का रेट?
आम जनता के मन में हमेशा यह सवाल उठता है कि जब तेल पूरे देश में एक ही आता है, तो अलग-अलग राज्यों में इसके दाम इतने अलग क्यों होते हैं? इस पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि इसका मुख्य कारण राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) है। केंद्र सरकार जो एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) लगाती है, वह पूरे देश में हर जगह एक समान यानी बराबर रहती है। लेकिन जब यह तेल राज्यों में पहुंचता है, तो वहां की राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट और अन्य सेस वसूलती हैं, जिसके कारण पेट्रोल पंप पर पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत हर राज्य में बदल जाती है।
कुछ राज्यों में 30% से भी ज्यादा टैक्स, भारी वैट वसूल रही हैं सरकारें
केंद्र सरकार के मुताबिक, देश के कुछ राज्य ऐसे हैं जो तेल पर 30 प्रतिशत या उससे भी अधिक का भारी-भरकम वैट (VAT) वसूल रहे हैं। इसके अलावा वे इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (बुनियादी ढांचा उपकर) भी लगाते हैं। वहीं, कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर महज 20 प्रतिशत के करीब वैट लगाया जाता है और वे कोई अतिरिक्त शुल्क या सेस भी नहीं वसूलते, जिससे वहां तेल थोड़ा सस्ता रहता है। यही वजह है कि एक राज्य की सीमा पार करते ही तेल के खेल में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
इन राज्यों में ₹112 के पार पहुंचा पेट्रोल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सबसे बुरा हाल
इस ताजा मूल्य वृद्धि के बाद देश के कुछ राज्यों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में पेट्रोल का दाम 112 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर गया है। आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश सरकार की तरफ से तेल पर 31% वैट और इसके साथ ही 4 रुपये प्रति लीटर का रोड डेवलपमेंट सेस वसूला जा रहा है, जिससे वहां कुल वैट का असर करीब 35 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। इसी भारी टैक्स के कारण तेलंगाना में तो पेट्रोल का रेट अब 116 रुपये प्रति लीटर के डरावने स्तर पर पहुंच चुका है, जो आम जनता की जेब पर बहुत बड़ा बोझ है।