ATM से निकलेगा प्लास्टिक वाला नोट! RBI का बड़ा प्लान, जानें कब से मिलेंगे और बैंकों पर कितना पड़ेगा असर

ATM से निकलेगा प्लास्टिक वाला नोट! RBI का बड़ा प्लान, जानें कब से मिलेंगे और बैंकों पर कितना पड़ेगा असर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़े मिशन पर काम कर रहा है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद आरबीआई 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों का फील्ड ट्रायल (पायलट प्रोजेक्ट) शुरू करने जा रहा है। सरकार की ओर से शुरुआती चरण में 2 अरब (200 करोड़) प्लास्टिक नोट छापने की अनुमति मिल चुकी है। अगर यह परीक्षण उम्मीद के मुताबिक सफल रहता है, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से आम नागरिकों के हाथों और ऑटोमेटेड टेलर मशीनों (ATM) से पॉलीमर नोट निकलने शुरू हो जाएंगे।

कागजी नोटों की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक टिकाऊ: RBI गवर्नर का बयान

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, कम मूल्य वर्ग वाले (10 और 20 रुपये के) कागजी नोट दैनिक उपयोग में बहुत जल्दी फटने, कटने और गंदे होने के कारण खराब हो जाते हैं। प्लास्टिक/पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में पिछले 30 सालों से हो रहा है, जहां यह देखा गया है कि ये नोट कागजी नोटों की तुलना में तीन से चार गुना अधिक टिकाऊ होते हैं। ये वॉटरप्रूफ होते हैं और आसानी से नहीं फटते। वर्तमान में पॉलीमर पेपर के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं, जिसके बाद सिक्योरिटी टेस्ट, सुरक्षा मंजूरियों और ट्रायल के विभिन्न चरणों को पूरा किया जाएगा।

बैंकिंग सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती: बदलना होगा ATM का 'कैसेट'

प्लास्टिक नोटों को लागू करने की राह में बैंकों के सामने एक बड़ी वित्तीय और ढांचागत चुनौती भी है। एक वरिष्ठ सरकारी बैंक अधिकारी के अनुसार, मौजूदा एटीएम मशीनों में जिस तरह से कैश रखा जाता है, उस 'कैसेट' (Cassette) में बदलाव किए बिना प्लास्टिक नोट नहीं डाले जा सकते।

  • क्या होता है कैसेट? एटीएम के भीतर बने वे डिब्बे (बॉक्स) होते हैं जिनमें अलग-अलग मूल्य वर्ग (₹100, ₹200, ₹500 आदि) के नोट रखे जाते हैं।

  • बढ़ेगा बैंकों का खर्च: पॉलीमर नोटों का आकार, चिकनाई और मोटाई कागजी नोटों से अलग होती है। इसलिए एटीएम में नई कैसेट लगानी होंगी। चूंकि ये विशेष कैसेट भारत में नहीं बनतीं, इसलिए इन्हें विदेशों से आयात करना पड़ सकता है।

  • समय और लागत: जब पिछली बार नोटों का साइज बदला गया था, तब एटीएम में कैसेट री-कैलिब्रेट करने में बैंकों को लगभग 1 साल का समय लगा था।

नकली नोटों पर लगेगी लगाम, अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूती का आधार

पॉलीमर नोटों की छपाई में विशेष प्रकार की पारदर्शी खिड़की (See-through window), उन्नत सुरक्षा फीचर और जटिल होलोग्राम तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इनकी नकल (Fake Currency) तैयार करना बेहद कठिन होता है। यद्यपि शुरुआती चरण में एटीएम अपग्रेडेशन और नोटों की छपाई में बैंकों व आरबीआई का खर्च बढ़ेगा, लेकिन लंबे समय में नोटों के खराब न होने के कारण रिप्लेसमेंट कॉस्ट काफी घट जाएगी। आरबीआई का मानना है कि जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ रहा है, करेंसी प्रबंधन क्षमता को बढ़ाना बेहद जरूरी है और प्लास्टिक नोट इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होंगे।