अनिल अंबानी की रिलायंस पावर के शेयर में अचानक आई 9% की तूफानी तेजी, 19 रुपये के पार निकला भाव
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की अगुवाई वाली प्रमुख बिजली कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड (Reliance Power) के शेयरों में अचानक आक्रामक खरीदारी देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सुबह के शुरुआती कारोबार से ही कंपनी के काउंटर पर खरीदारों का भारी जमावड़ा देखा गया, जिसके चलते शेयर 9 प्रतिशत से अधिक की तूफानी छलांग लगाकर ₹19.12 के इंट्राडे स्तर पर पहुंच गया। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बाजार की सामान्य चाल के बीच रिलायंस पावर में आए इस तेज उछाल ने रीटेल निवेशकों और दलाल स्ट्रीट के तकनीकी विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस अचानक आई तेजी के साथ ही कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) एक बार फिर ₹7,800 करोड़ के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर गया है। हालांकि, शेयर में आई इस एकदिनी रॉकेट जैसी तेजी के पीछे बाजार का उत्साह जितना दिखाई दे रहा है, उसके पीछे का दीर्घकालिक सच उतना ही चिंताजनक और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। लगातार भारी बिकवाली और कानूनी अड़चनों का सामना कर रही इस कंपनी में रीटेल ट्रेडर्स की भारी भागीदारी देखी जा रही है, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना तक बढ़ गया।
एक साल में 55% से ज्यादा वेल्थ स्वाहा: 46 रुपये के शिखर से औंधे मुंह क्यों गिरा यह शेयर?
गुरुवार को भले ही रिलायंस पावर के शेयरों में 9 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई हो, लेकिन लंबी अवधि के चार्ट पर यह स्टॉक अपने निवेशकों के लिए भारी नुकसान का सबब बना हुआ है। पिछले एक साल के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो रिलायंस पावर के शेयरों में 55 प्रतिशत से भी अधिक की भीषण गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ठीक एक साल पहले, यानी 29 अक्टूबर 2025 को इस शेयर की कीमत ₹46.29 पर कारोबार कर रही थी, जो अब गिरकर ₹19 के दायरे में सिमट चुकी है। कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक (YTD) इस शेयर ने अपने निवेशकों की पूंजी को 41 प्रतिशत से अधिक डुबोया है, जबकि पिछले 6 महीनों की अवधि में भी इसमें 30 प्रतिशत से ज्यादा की टूट देखने को मिली है। कंपनी के 52 हफ्तों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इसका 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹47.68 रहा है, जबकि इसका 52-सप्ताह का निचला स्तर ₹15.96 दर्ज किया गया है। ऐसे में ₹47 के उच्चतम स्तर से शेयर का ₹16 के निचले स्तर तक लुढ़कना यह साफ दर्शाता है कि कंपनी पर संस्थागत निवेशकों और बड़े फंड्स का भरोसा डगमगाया हुआ था और भारी बिकवाली के चलते निवेशकों की अरबों रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई।
ईडी का बड़ा एक्शन: 2032 करोड़ रुपये की संपत्तियों की जब्ती और फेमा जांच का साया
रिलायंस पावर के शेयरों में पिछले कुछ महीनों से जारी भारी गिरावट और दबाव की सबसे प्रमुख वजह केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताबड़तोड़ कानूनी कार्रवाई रही है। जांच एजेंसी ने हाल ही में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के कड़े प्रावधानों के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं की ₹2,032.81 करोड़ मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क यानी जब्त करने का सख्त आदेश जारी किया था। रिपोर्टों के अनुसार, ईडी द्वारा अटैच की गई इस भारी-भरकम संपत्ति में रिलायंस पावर के विभिन्न बैंक खातों में जमा नकदी बैलेंस और कंपनी की प्रमुख अनुषंगी इकाई सासन पावर लिमिटेड (Sasan Power Limited) में धारित महत्वपूर्ण शेयरहोल्डिंग्स शामिल हैं। केंद्रीय एजेंसी विदेशों में फंड के कथित डायवर्जन और फेमा के नियमों के संदिग्ध उल्लंघन की गहन जांच कर रही है। इस बड़े कानूनी झटके के बाद घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों में घबराहट फैल गई थी, जिसके कारण बाजार में लगातार पैनिक सेलिंग देखी गई और शेयर अपने कई अहम तकनीकी सपोर्ट स्तरों को तोड़ते हुए नीचे की ओर फिसल गया था।
पहली तिमाही के वित्तीय आंकड़े: 44% बढ़ा शुद्ध मुनाफा, क्या ऑपरेशंस में हो रहा सुधार?
कानूनी चुनौतियों और शेयर में आई भारी गिरावट के विपरीत, कंपनी के बुनियादी परिचालन यानी फंडामेंटल्स से हाल ही में कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026 तिमाही) में रिलायंस पावर का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट (समेकित शुद्ध मुनाफा) सालाना आधार पर 44 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज करते हुए ₹65 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया, जो बीते वित्त वर्ष की समान तिमाही में ₹45 करोड़ के आसपास था। इसके अलावा, जून तिमाही के दौरान ऑपरेशंस से मिलने वाला कंपनी का कुल रेवेन्यू (राजस्व) भी सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹1,956 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं पहली तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹355 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹358 करोड़ के स्तर पर था। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि बिजली की बढ़ती मांग और थर्मल व रिन्यूएबल प्लांट्स से बेहतर उत्पादन के कारण कंपनी के कोर बिजनेस में थोड़ी स्थिरता आई है। यही तिमाही वित्तीय सुधार आज के कारोबारी सत्र में निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग का आधार बना है, जिससे शेयर में अचानक 9 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ।
2008 का वो ऐतिहासिक 3:5 बोनस शेयर: जब रिलायंस पावर ने रचा था कॉर्पोरेट इतिहास
रिलायंस पावर का नाम भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में हमेशा एक मील का पत्थर माना जाता है। कंपनी जब साल 2008 में अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) लेकर आई थी, तब इसे भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन मिला था। हालांकि, बाजार में लिस्टिंग के समय आई भारी वैश्विक मंदी और बिकवाली के बाद निवेशकों के नुकसान की भरपाई करने और उनका विश्वास बहाल करने के लिए कंपनी प्रबंधन ने मई 2008 में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था। रिलायंस पावर ने अपने शेयरधारकों को 3:5 के अनुपात में बोनस शेयर (Bonus Shares) जारी करने का ऐलान किया था। इसका तात्पर्य यह था कि जिन निवेशकों के पास कंपनी के 5 शेयर थे, उन्हें कंपनी ने पूरी तरह मुफ्त में 3 अतिरिक्त बोनस शेयर बांटे थे। भारतीय कॉर्पोरेट जगत में लिस्टिंग के तुरंत बाद रीटेल निवेशकों को इतना बड़ा बोनस तोहफा देने का यह अपने आप में एक अनोखा उदाहरण था। हालांकि, उस बोनस के बावजूद बाद के वर्षों में कर्ज के भारी बोझ, कानूनी विवादों और बिजली संयंत्रों के लिए कोयला व गैस की उपलब्धता की दिक्कतों के कारण शेयर कभी अपने आईपीओ के भाव के करीब भी नहीं टिक सका।
मुंबई, दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार के रीटेल ट्रेडर्स के बीच हलचल: क्या नई खरीदारी करना सुरक्षित है?
रिलायंस पावर जैसे हाई-बीटा और कम कीमत वाले पेनी स्टॉक्स हमेशा से भारत के रीटेल निवेशकों के बीच सबसे पसंदीदा सट्टेबाजी और ट्रेडिंग काउंटर्स में शामिल रहे हैं। मुंबई के दलाल स्ट्रीट से लेकर दिल्ली-एनसीआर, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, लखनऊ और पटना जैसे शहरों के रीटेल ट्रेडर्स इस तरह के शेयरों में मामूली तेजी आते ही भारी मात्रा में दांव लगाने लगते हैं। बाजार के दिग्गज मार्केट एनालिस्ट्स और सेबी रजिस्टर्ड सलाहकारों का कहना है कि 9 प्रतिशत की एकदिनी तेजी को देखकर रीटेल निवेशकों को आंख मूंदकर कूदने से बचना चाहिए। कंपनी पर वर्तमान में ईडी की ₹2032 करोड़ की एसेट्स जब्ती की कानूनी तलवार लटक रही है और इसका डेट प्रोफाइल अब भी पूरी तरह जोखिममुक्त नहीं हुआ है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, शेयर के लिए ₹21 से ₹22 का स्तर एक अत्यंत कड़ा रेजिस्टेंस जोन है। जब तक शेयर इस रेजिस्टेंस के ऊपर भारी वॉल्यूम के साथ टिक नहीं जाता, तब तक किसी भी उछाल को केवल 'डेड कैट बाउंस' या शॉर्ट कवरिंग रैली ही माना जाना चाहिए। जिन निवेशकों के पास यह शेयर निचले स्तरों पर है, वे सख्त स्टॉप-लॉस के साथ ट्रेलिंग कर सकते हैं, लेकिन नए निवेशकों को पेनी स्टॉक्स के उच्च जोखिम को ध्यान में रखकर ही कोई कदम उठाना चाहिए।