आकाश चोपड़ा ने चौथे टी20 में टीम इंडिया के बॉलिंग अटैक में बड़े बदलाव की उठाई मांग
भारतीय क्रिकेट टीम जब भी किसी द्विपक्षीय टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में अजेय बढ़त बनाकर ट्रॉफी अपने नाम कर लेती है, तो उसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अंतिम एकादश में बेंच पर बैठे प्रतिभावान युवाओं को मौका मिलेगा या टीम विनिंग कॉम्बिनेशन के साथ ही आगे बढ़ेगी। इसी गर्मागर्म बहस के बीच भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज और जाने-माने क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने एक बड़ा बयान देकर क्रिकेट गलियारों में हलचल मचा दी है। आकाश चोपड़ा ने चौथे टी20 मुकाबले के लिए टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में तेज गेंदबाजी आक्रमण के सबसे बड़े चेहरे अर्शदीप सिंह को बाहर बैठाने यानी आराम देने की खुली वकालत की है। आकाश चोपड़ा का मानना है कि जब टीम इंडिया सीरीज में पूरी तरह से ड्राइविंग सीट पर है और विरोधी टीम पर मानसिक दबाव बना हुआ है, तो ऐसे में अपने प्रमुख बाएं हाथ के पेसर को लगातार मैदान पर उतारने का कोई औचित्य नहीं बनता। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और खेल प्रेमियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अर्शदीप सिंह जैसे स्थापित मैच विनर को केवल रोटेशन के लिए बाहर करना सही रणनीति होगी या इससे गेंदबाजी का धारदार संतुलन प्रभावित होगा।
वर्कलोड मैनेजमेंट या फॉर्म की चिंता? जानिए आकाश चोपड़ा ने किस तर्क पर दी अर्शदीप को आराम की सलाह
आकाश चोपड़ा ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया विश्लेषण में स्पष्ट किया कि उनकी इस सलाह का मतलब अर्शदीप सिंह को फॉर्म के आधार पर 'ड्रॉप' करना बिल्कुल नहीं है। अर्शदीप पिछले दो सालों में टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के सबसे भरोसेमंद और सर्वाधिक विकेट चटकाने वाले गेंदबाजों में से एक रहे हैं। नई गेंद से गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने और डेथ ओवरों में पिन-पॉइंट यॉर्कर डालने में उनका कोई सानी नहीं है। चोपड़ा के अनुसार, यह फैसला विशुद्ध रूप से 'वर्कलोड मैनेजमेंट' (कार्यभार प्रबंधन) और भविष्य की तैयारियों से जुड़ा हुआ है। अर्शदीप सिंह तीनों प्रारूपों में भारत की योजनाओं का हिस्सा बनते जा रहे हैं और लगातार नॉन-स्टॉप क्रिकेट खेलने से किसी भी तेज गेंदबाज की मांसपेशियों पर खिंचाव या चोट लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आकाश चोपड़ा ने तर्क दिया कि अर्शदीप ने खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित कर दिया है और दुनिया जानती है कि वे क्या कर सकते हैं। इसलिए जब सीरीज का परिणाम पहले ही तय हो चुका है, तो उन्हें बेवजह मैदान पर घिसने के बजाय ड्रेसिंग रूम में फ्रेश रखना चाहिए ताकि वे आगामी बड़े विदेशी दौरों और आईसीसी इवेंट्स के लिए शत-प्रतिशत फिट और तरोताजा रह सकें।
अर्शदीप की जगह किसे मिले मौका? युवा सनसनी हर्षित राणा के नाम पर आकाश चोपड़ा ने ठोकी ताल
अर्शदीप सिंह को आराम देने के बाद खाली होने वाले स्लॉट पर आकाश चोपड़ा ने युवा तूफानी गेंदबाज हर्षित राणा का नाम सबसे आगे रखा है। दिल्ली और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी आग उगलती गेंदों से बल्लेबाजों में दहशत पैदा करने वाले हर्षित राणा काफी समय से भारतीय टीम के साथ ट्रेवल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मुकाबला खेलने का अवसर नहीं मिला है। आकाश चोपड़ा ने जोर देकर कहा कि हर्षित राणा के पास लगातार 145 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंद फेंकने, तेज गति से बाउंसर पटकने और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने की अद्भुत प्रतिभा है। इसके अलावा, हर्षित निचले क्रम में लंबे-लंबे छक्के लगाने में भी सक्षम हैं, जिससे टीम को पुछल्ले बल्लेबाजों से भी कुछ महत्वपूर्ण रन मिल सकते हैं। चोपड़ा का मानना है कि अगर आप बेंच पर बैठे ऐसे प्रतिभावान तेज गेंदबाज को इस तरह के दबावमुक्त मुकाबलों में भी अंतरराष्ट्रीय अनुभव नहीं देंगे, तो फिर उन्हें कब आजमाएंगे? अचानक किसी बड़े मुकाबले या आईसीसी टूर्नामेंट में किसी खिलाड़ी को सीधा डेब्यू कराना हमेशा आत्मघाती साबित होता है, इसलिए यह सही समय है जब हर्षित राणा को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव महसूस कराया जाए।
जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में गेंदबाजी का नेतृत्व: क्या आकाश की सलाह मानेंगे गौतम गंभीर और सूर्या?
आकाश चोपड़ा की यह सलाह जितनी तार्किक नजर आती है, टीम मैनेजमेंट के लिए इसे लागू करना उतना ही बड़ा पेच साबित हो सकता है। वर्तमान टी20 टीम में जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे दिग्गज सीनियर पेसर्स पहले से ही आराम पर हैं। ऐसे में अर्शदीप सिंह ही इस बॉलिंग अटैक के निर्विवाद लीडर और सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज हैं। यदि अर्शदीप को भी बाहर बैठा दिया जाता है, तो भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह से युवा और अपेक्षाकृत अनुभवहीन हाथों में आ जाएगा, जहां आवेश खान और हर्षित राणा को जिम्मेदारी संभालनी होगी। कप्तान सूर्यकुमार यादव और हेड कोच गौतम गंभीर अपनी आक्रामक और 'किलर इंस्टिंक्ट' वाली शैली के लिए जाने जाते हैं। गंभीर की रणनीति हमेशा विरोधी टीम का सूपड़ा साफ (क्लीन स्वीप) करने की होती है, और वे किसी भी मैच को प्रयोगों की भेंट चढ़ाने के पक्षधर नहीं रहे हैं। हालांकि, गौतम गंभीर स्वयं हर्षित राणा की क्षमताओं से भली-भांति परिचित हैं क्योंकि वे आईपीएल में उनके मेंटॉर रह चुके हैं और उन्हें एक विश्वस्तरीय मैच विनर मानते हैं। इसलिए यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या टीम थिंक-टैंक आकाश चोपड़ा के सुझाव को स्वीकार करते हुए अर्शदीप को रेस्ट देकर हर्षित को मैदान में उतारता है या फिर गेंदबाजी का अनुभव बनाए रखने के लिए अर्शदीप को ही प्लेइंग इलेवन में बरकरार रखा जाता है।
दिल्ली, पंजाब से लेकर मुंबई तक क्रिकेट फैंस में छिड़ी तीखी बहस: क्या रिस्क लेना सही होगा?
आकाश चोपड़ा के इस सुझाव के सामने आते ही देश के अलग-अलग क्रिकेट हब्स में फैंस और पूर्व क्रिकेटरों के बीच दोतरफा राय देखने को मिल रही है। पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली के क्रिकेट प्रशंसकों का कहना है कि अर्शदीप सिंह टी20 रैंकिंग में लगातार शीर्ष पर पहुंच रहे हैं और हर मैच उनके व्यक्तिगत आत्मविश्वास और रिकॉर्ड्स के लिए महत्वपूर्ण है; ऐसे में उन्हें बाहर बैठाना उनके रिदम को तोड़ सकता है। वहीं मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता के विश्लेषकों का मानना है कि मॉडर्न टी20 क्रिकेट केवल 11 खिलाड़ियों का खेल नहीं है, बल्कि यह 15 से 20 खिलाड़ियों के पूरे स्क्वाड की गहराई पर निर्भर करता है। यदि बैकअप गेंदबाज मैच-रेडी नहीं होंगे, तो मुख्य गेंदबाज के चोटिल होते ही पूरी टीम का संतुलन बिखर जाएगा। भारतीय टीम को आने वाले महीनों में लगातार सफेद गेंद और लाल गेंद की महत्वपूर्ण सीरीज खेलनी हैं, ऐसे में प्रमुख तेज गेंदबाजों को रोटेट करना भारतीय क्रिकेट के दीर्घकालिक हित में सबसे संतुलित और आधुनिक फैसला साबित हो सकता है।