100% एथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां: मोदी सरकार ने E100 फ्लेक्स-फ्यूल को दी हरी झंडी

100% एथेनॉल से दौड़ेंगी गाड़ियां: मोदी सरकार ने E100 फ्लेक्स-फ्यूल को दी हरी झंडी

भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर और हरित ऊर्जा (Green Energy) क्रांति के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने आधिकारिक तौर पर केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित कर दिया है। इस नए संशोधन के प्रभावी होते ही देश में शत-प्रतिशत यानी 100% शुद्ध एथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों (Flex-Fuel Vehicles - FFVs) के संचालन का कानूनी रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अब भारतीय सड़कों पर बहुत जल्द ऐसी आधुनिक कारें, एसयूवी और दोपहिया वाहन दौड़ते नजर आएंगे जिन्हें चलाने के लिए पारंपरिक पेट्रोल, डीजल या सीएनजी की कोई आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे शुद्ध रूप से गन्ने और खाद्यान्नों से तैयार घरेलू बायो-ईंधन पर निर्भर रहेंगी।

मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, वाहन उत्सर्जन मानकों के अंतर्गत पूर्व स्वीकृत E85 ईंधन (85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल मिश्रण) के साथ-साथ अब E100 (100% एथेनॉल) को भी कानूनी मान्यता प्रदान कर दी गई है। यह कदम देश की कच्चे तेल के भारी-भरकम आयात पर निर्भरता को कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और कार्बन उत्सर्जन घटाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की राष्ट्रीय रणनीति का एक अत्यंत निर्णायक हिस्सा है। हालांकि, सरकार ने साफ शब्दों में यह तकनीकी स्पष्टीकरण भी दिया है कि 100% एथेनॉल ईंधन का उपयोग केवल उन्हीं विशेष वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें वाहन निर्माता कंपनियों (OEMs) द्वारा विशेष धातु घटकों, उन्नत रबर होज और स्मार्ट सेंसर सिस्टम के साथ विशेष तौर पर E100 मानकों के अनुरूप डिजाइन और निर्मित किया गया होगा।

कैसे काम करती है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक, जानिए इसका स्मार्ट इंजन मैकेनिज्म

फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या इसके लिए वाहन में अलग-अलग टैंक लगाने पड़ते हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) का सबसे बड़ा सामर्थ्य और इंजीनियरिंग चमत्कार यही है कि इसमें दो अलग-अलग फ्यूल टैंक नहीं होते, बल्कि पूरी गाड़ी केवल एक ही सिंगल फ्यूल टैंक पर काम करती है। इस एक टैंक में वाहन चालक अपनी सुविधा और उपलब्धता के हिसाब से किसी भी अनुपात में पेट्रोल और एथेनॉल का मिश्रण डलवा सकता है। चालक चाहे तो टैंक में 100% सामान्य पेट्रोल भरवाए, या फिर E85 (85% एथेनॉल) डलवाए अथवा पूरी तरह शुद्ध 100% एथेनॉल (E100) का इस्तेमाल करे, इंजन पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता।

इस इंजीनियरिंग का राज वाहन के अंदर लगे फ्यूल कंपोजिशन सेंसर और अत्यधिक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) में छिपा होता है। जैसे ही ईंधन फ्यूल लाइन से गुजरता है, सेंसर मिलीसेकंड्स के भीतर पहचान लेता है कि वर्तमान समय में फ्यूल टैंक के भीतर एथेनॉल और पेट्रोल का सटीक प्रतिशत क्या है। इसके तुरंत बाद ईसीयू ईंधन के ऑक्टेन नंबर और ज्वलनशीलता के अनुसार स्पार्क प्लग के इग्निशन टाइमिंग, एयर-फ्यूल मिक्स रेशियो और फ्यूल इंजेक्शन की मात्रा को अपने आप पूरी तरह समायोजित कर लेता है। नतीजतन, चालक को किसी भी मैन्युअल स्विच या बटन को दबाने की जरूरत नहीं पड़ती और गाड़ी का इंजन बिना किसी झटके, खड़खड़ाहट या रुकावट के मक्खन की तरह अपनी पूरी शक्ति के साथ चलता रहता है।

क्या मौजूदा सामान्य कारों में डाला जा सकता है E100, जानिए मंत्रालय की तकनीकी चेतावनी

देश भर के आम वाहन चालकों के मन में यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या वे अपनी वर्तमान में चल रही पेट्रोल कार या बाइक में सीधे E85 या E100 ईंधन भरवा सकते हैं। इस पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और वाहन इंजीनियरों ने अत्यंत सख्त और स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि वर्तमान समय में भारतीय सड़कों पर दौड़ रही सामान्य पेट्रोल गाड़ियां E85 या E100 फ्यूल पर चलने में पूरी तरह असमर्थ हैं। मौजूदा समय में देश में अधिकांश गाड़ियां सामान्य पेट्रोल या फिर E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के लिए ही अधिकृत और प्रमाणित हैं।

सामान्य पेट्रोल इंजन में हाई-लेवल एथेनॉल का उपयोग तकनीकी रूप से खतरनाक साबित हो सकता है। एथेनॉल रासायनिक रूप से एक अत्यधिक संक्षारक (Corrosive) विलायक है और इसमें हवा से नमी यानी पानी सोखने की तीव्र प्रवृत्ति होती है। यदि किसी सामान्य कार के टैंक में E85 या E100 डाल दिया जाए, तो वह उसके पारंपरिक रबर पाइप्स, प्लास्टिक कंपोनेंट्स, फ्यूल पंप और एल्युमिनियम पार्ट्स को धीरे-धीरे गला देगा। इसके अलावा, एथेनॉल को जलाने के लिए अधिक ईंधन प्रवाह और उच्च तापमान की जरूरत होती है, जो सामान्य ईसीयू सपोर्ट नहीं कर पाता। इसलिए नियमों के अनुसार सामान्य पेट्रोल वाहनों में उच्च स्तर का एथेनॉल डालना तकनीकी और विधिक दोनों रूप से प्रतिबंधित है। केवल वही लोग इस फ्यूल का लाभ उठा सकेंगे जो शोरूम से नई प्रमाणित फ्लेक्स-फ्यूल कार या बाइक खरीदेंगे।

कब तक लॉन्च होंगी E100 गाड़ियां और कहां मिलेगा ईंधन, जानिए सरकारी रोडमैप

भारत सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने फ्लेक्स-फ्यूल के बुनियादी ढांचे को धरातल पर उतारने के लिए एक समयबद्ध और चरणबद्ध रोडमैप तैयार किया है। उपलब्ध आंकड़ों और उद्योग सूत्रों के अनुसार, चुनिंदा सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के विशेष आउटलेट्स पर E85 ईंधन का वितरण पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जा चुका है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक देश भर के कम से कम 500 प्रमुख रिटेल आउटलेट्स पर यह ईंधन उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार करते हुए दिसंबर 2027 के अंत तक इसे 5,000 आउटलेट्स तक पहुंचाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, ताकि वाहन चालकों को हाईवे और शहरों में ईंधन की कोई कमी न खले।

दूसरी तरफ, वाहन निर्माण कंपनियों के मोर्चे पर भी सरगर्मी तेज हो गई है। मारुति सुजुकी, टोयोटा, हुंडई, टाटा मोटर्स और दोपहिया क्षेत्र में टीवीएस व बजाज जैसी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप पर परीक्षण पूरा कर चुकी हैं। उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंतिम महीनों अथवा 2027 की शुरुआत से कई प्रमुख ऑटो कंपनियां अपनी प्रमाणित E85 और 100% एथेनॉल (E100) अनुकूल कमर्शियल कारें और बाइक्स भारतीय बाजार में आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए उतारना शुरू कर देंगी। इन गाड़ियों को ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स द्वारा विशेष जंग-रोधी फ्यूल लाइनों, संशोधित फ्यूल इंजेक्टरों और ईसीयू मैपिंग के साथ फैक्ट्री से ही प्रमाणित किया जाएगा।

क्या बंद हो जाएंगी पुरानी पेट्रोल और डीजल गाड़ियां, दूर करें सबसे बड़ा भ्रम

100% एथेनॉल ईंधन को मिली इस सरकारी मंजूरी के बाद आम जनता के बीच सबसे बड़ी चिंता और असमंजस यह फैल रहा है कि क्या सरकार अब पुरानी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर रोक लगा देगी या उन्हें जबरन कबाड़ (स्क्रैप) घोषित कर देगी। सरकार ने इस पूरे संशय को पूरी तरह से खारिज करते हुए नागरिकों को आश्वस्त किया है कि इस नीति का मकसद पुरानी गाड़ियों को बंद करना या प्रतिबंधित करना कतई नहीं है। जो गाड़ियां वर्तमान में सड़कों पर चल रही हैं, चाहे वे बीएस-4 हों या बीएस-6 पेट्रोल-डीजल वाहन, वे अपने निर्धारित रजिस्ट्रेशन अवधि तक सामान्य रूप से चलती रहेंगी।

पेट्रोल पंपों पर मिलने वाला सामान्य पेट्रोल और E20 ईंधन आगे भी निर्बाध रूप से उपलब्ध रहेगा। फ्लेक्स-फ्यूल एक वैकल्पिक और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है, ताकि ग्राहकों को एक सस्ता, प्रदूषण-मुक्त और घरेलू स्रोत से निर्मित ईंधन चुनने की आजादी मिल सके। इससे किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन सीधे तौर पर गन्ने, मक्का और अतिरिक्त अनाज से होता है। पुरानी गाड़ियों के मालिकों को किसी भी तरह से घबराने या अपनी कार बेचने की जरूरत नहीं है; उनकी गाड़ियां सामान्य रूप से आगे भी कई वर्षों तक सड़कों पर बिना किसी रुकावट के दौड़ती रहेंगी।