ब्राह्मण विरोधी टिप्पणी विवाद: अनुराग कश्यप के खिलाफ सूरत कोर्ट ने जारी किया जमानती वारंट

ब्राह्मण विरोधी टिप्पणी विवाद: अनुराग कश्यप के खिलाफ सूरत कोर्ट ने जारी किया जमानती वारंट

फिल्म निर्माता और निर्देशक अनुराग कश्यप की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में सूरत की एक अदालत ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है। सूरत के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे. वी. चौहान की अदालत ने यह सख्त कदम फिल्म निर्देशक द्वारा न्यायिक प्रक्रिया का लगातार पालन न करने के चलते उठाया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 दिसंबर तय की है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जमानती वारंट जारी होने के बाद अब आरोपी व्यक्ति अदालत द्वारा तय की गई तयशुदा मुचलका राशि जमा करके ही गिरफ्तारी या अन्य सख्त कार्रवाई से राहत पा सकता है।

क्या थी वह बड़ी चूक जिसके चलते जारी हुआ जमानती वारंट?

इस मामले में अनुराग कश्यप से सबसे बड़ी चूक अदालत के समन और न्यायिक आदेशों की लगातार अनदेखी करना रही। शिकायतकर्ता पक्ष के वकील कमलेश रावल के अनुसार, उन्होंने अदालत में अर्जी दाखिल कर सत्यापन के लिए अनुराग कश्यप की प्रत्यक्ष उपस्थिति की मांग की थी। जब वह नहीं आए, तो ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की और औपचारिक समन जारी किया। इसके बावजूद कश्यप अदालत में हाजिर नहीं हुए। इसके बाद अदालत के निर्देश पर मुंबई के प्रमुख समाचार पत्र में उनके नाम से सार्वजनिक नोटिस भी प्रकाशित कराया गया। लेकिन समन और अखबार में छपे सार्वजनिक नोटिस के बाद भी सोमवार को हुई सुनवाई में जब अनुराग कश्यप या उनके प्रतिनिधि कोर्ट में पेश नहीं हुए, तो अदालत ने इसे न्यायिक अवमानना और गंभीर प्रक्रियागत चूक मानते हुए सीधे जमानती वारंट जारी कर दिया।

'फुले' फिल्म के विवाद से सोशल मीडिया बहस तक, जानिए क्या था पूरा मामला

यह पूरा विवाद 16 अप्रैल 2025 का है, जब हिंदी फिल्म 'फुले' के ट्रेलर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी थी। 'अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज' और 'विप्र सेना' जैसे संगठनों ने फिल्म के कुछ अंशों पर आपत्ति जताई थी। इसी मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुराग कश्यप की बहस आदित्य नाम के एक यूजर से हो गई। शिकायत के मुताबिक, कश्यप ने गुस्से में आकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और यूजर से सवाल किया कि 'ब्राह्मण बनकर तुमने क्या हासिल कर लिया?'। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस टिप्पणी और उसके बाद की पोस्ट से पूरे ब्राह्मण समुदाय का अपमान हुआ और विभिन्न समुदायों के बीच कटुता व वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया।

बीएनएस की गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला, सार्वजनिक माफी भी नहीं आई काम

इस मामले में हिंदूवादी संगठनों के कानूनी सलाहकार व अधिवक्ता कमलेश रावल ने सूरत कोर्ट में परिवाद दायर किया था। अदालत ने शुरुआती सुनवाई के बाद अनुराग कश्यप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192 (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और धारा 352(2) (झूठी अफवाहें फैलाना) के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। हालांकि विवाद बढ़ने के कुछ ही दिनों बाद अप्रैल 2025 में अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि गुस्से में किसी को जवाब देते समय उन्होंने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर मर्यादा लांघ दी थी। लेकिन अदालत में केस चलने और तारीखों पर लगातार गैरहाजिर रहने के कारण अब उन्हें कानूनी प्रक्रिया का व्यक्तिगत तौर पर सामना करना ही होगा।