8वें वेतन आयोग का एक साल पूरा: कर्मचारियों की सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों पर क्या है ताजा स्थिति?

8वें वेतन आयोग का एक साल पूरा: कर्मचारियों की सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों पर क्या है ताजा स्थिति?

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा के लिए औपचारिक रूप से गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को आज पूरा एक वर्ष बीत चुका है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में कार्यरत इस आयोग को अपनी आधिकारिक सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई थी। इस समयावधि के अनुसार, आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई 2027 के आसपास सरकार के समक्ष पेश होने की उम्मीद है। पिछले एक साल में आयोग ने कर्मचारी संघों, रेलवे यूनियनों, रक्षा संगठनों और विभिन्न मंत्रालयों से लिखित ज्ञापन और सुझाव आमंत्रित करने की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर लिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वेतन आयोग अगले चरण में कर्मचारियों के बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर और अन्य भत्तों को लेकर क्या रूपरेखा तैयार करता है।

फिटमेंट फैक्टर पर टिकी नजरें: कर्मचारी यूनियनों की मांग और संभावित आंकड़े

वेतन आयोग की सिफारिशों में कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी और बेसिक पे तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण घटक 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) होता है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हुआ था।

  • कर्मचारी संघों की मांग: नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने 3.68 से लेकर 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम मूल वेतन को सीधे 69,000 रुपये तक करने का प्रस्ताव आयोग के सामने रखा है। वहीं रक्षा से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने इसे 4.0 तक रखने की मांग उठाई है।

  • वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान: आर्थिक जानकारों और वेतन विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खजाने पर वित्तीय भार को संतुलित रखने के लिए आयोग 1.92 से 2.50 या अधिकतम 2.86 के बीच का फिटमेंट फैक्टर सुझा सकता है। यदि 2.28 से 2.57 का सामान्य गुणक भी तय होता है, तो न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर 41,000 रुपये से 46,000 रुपये के दायरे में पहुंच सकता है।

63% तक पहुंच चुका महंगाई भत्ता (DA): शून्य पर रीसेट और बेसिक में विलय

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का डीए 60% से बढ़कर 63% पर पहुंच चुका है।

  • ऐतिहासिक रूप से जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, उस समय तक संचित कुल महंगाई भत्ते को नए बेसिक पे में मिला दिया जाता है और डीए की गणना पुनः 0% (शून्य) से शुरू होती है।

  • चूंकि 8वें वेतन आयोग का संदर्भ समय (Reference Period) 1 जनवरी 2026 से माना जा रहा है, इसलिए उस समय तक का डीए नए पे-मैट्रिक्स का हिस्सा बनेगा।

  • बढ़ती महंगाई के बीच जानकारों का कहना है कि उच्च डीए स्तर के कारण आयोग को फिटमेंट फैक्टर ऐसा तय करना होगा जिससे कर्मचारियों को वास्तविक टेक-होम सैलरी में ठोस और सार्थक वृद्धि दिखाई दे।

1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने पर मिलेगा बड़ा एरियर?

केंद्रीय कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आयोग अपनी रिपोर्ट मई 2027 में सौंपेगा, तो क्या उन्हें पिछले महीनों का एरियर मिलेगा।

  • परंपरा के अनुसार, हर 10 साल के चक्र में वेतन आयोग की प्रभावी तिथि 1 जनवरी से मानी जाती है (जैसे 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था)।

  • यदि केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से भूतलक्षी (Retrospective) प्रभाव से लागू करने की मंजूरी देती है, तो रिपोर्ट सौंपे जाने और कैबिनेट की स्वीकृति के बाद 48 लाख से अधिक कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों को जनवरी 2026 से लेकर क्रियान्वयन की तारीख तक का पूरा वेतन और पेंशन एरियर (बकाया) एकमुश्त प्रदान किया जाएगा।

रेलवे और तकनीकी कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों पर जोर

इस बार वेतन आयोग के समक्ष केवल बेसिक पे का मुद्दा ही नहीं, बल्कि विभिन्न संवर्गों की कार्य स्थितियों को देखते हुए भत्तों के पुनर्गठन की मांग प्रमुखता से उठी है। ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन (AIRF) और अन्य संवर्गों ने मांग की है कि:

  1. जोखिम और कठिन कार्य भत्ता (Risk & Hardship Allowance): ट्रैक मेंटेनर, पेट्रोलमैन, की-मैन और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 10,000 रुपये मासिक जोखिम भत्ता तय किया जाए।

  2. एचआरए और यात्रा भत्ता (HRA & TA): शहरों के वर्गीकरण (X, Y, Z श्रेणी) के आधार पर हाउस रेंट अलाउंस और दैनिक भत्तों की दरों को मौजूदा मुद्रास्फीति के अनुसार संशोधित किया जाए।

  3. पेंशनभोगियों को राहत: न्यूनतम पेंशन को वर्तमान के 9,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 20,000 से 25,000 रुपये के दायरे में लाने और 80 वर्ष के बजाय 75 वर्ष की आयु से अतिरिक्त पेंशन लाभ शुरू करने के प्रस्तावों पर विचार चल रहा है।

आयोग का कार्यकाल अगले छह महीनों में अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करने जा रहा है, जहां वित्तीय प्रभाव और विभिन्न विभागों के पे-लेवल मर्जर का अंतिम मसौदा तैयार होगा।