छठ पर बना बॉलीवुड का पहला गाना रिलीज, किसने लिखा है 'छठी मैया'? 7 घंटे में 1.4M व्यूज
लोक आस्था, सूर्य उपासना और पवित्रता के महापर्व छठ की गूंज अब बॉलीवुड के मुख्य गलियारों में पूरी भव्यता के साथ सुनाई देने लगी है। पारंपरिक रूप से भोजपुरी और मैथिली लोकगीतों तक सीमित रहने वाले इस पावन पर्व को पहली बार बॉलीवुड के मुख्यधारा के संगीत मंच पर इतने बड़े पैमाने पर उतारा गया है। छठ पूजा के पावन अवसर पर रिलीज हुए पहले आधिकारिक बॉलीवुड भक्ति गीत 'छठी मैया' ने डिजिटल दुनिया में तहलका मचा दिया है।
आधुनिक सिनेमैटोग्राफी, कर्णप्रिय संगीत और पारंपरिक आस्था के अनूठे संगम से सजे इस गीत ने रिलीज के पहले दिन ही सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर व्यूज और ट्रेंडिंग के नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। यूट्यूब पर वीडियो के आते ही भक्तों और संगीत प्रेमियों ने इसे हाथों-हाथ लिया और देखते ही देखते यह गीत हर छठ व्रती के मोबाइल और घाटों की पहली पसंद बन गया।
महज 7 घंटे में बटोरे 1.4 मिलियन व्यूज: डिजिटल दुनिया में रचा इतिहास
इंटरनेट पर गानों का वायरल होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी आध्यात्मिक और धार्मिक गीत का इतनी तीव्र गति से ट्रेंड करना एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। गाने ने यूट्यूब पर रिलीज होने के महज 7 घंटे के भीतर 1.4 मिलियन (14 लाख) से अधिक वास्तविक व्यूज हासिल कर लिए।
हजारों की संख्या में दर्शकों ने कमेंट सेक्शन में 'जय छठी मैया' के जयकारे लगाए और गाने की दृश्य प्रस्तुति तथा भावपूर्ण धुन की सराहना की। सोशल मीडिया रील्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी गाने के ऑडियो क्लिप्स तेजी से ट्रेंड करने लगे हैं। संगीत समीक्षकों का मानना है कि पारंपरिक लोकसंस्कृति को आधुनिक ऑर्केस्ट्रा और उच्च गुणवत्ता के साथ पेश करने के कारण ही यह गाना युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी के दिलों को सीधे छू रहा है।
किसने लिखा और रचा है 'छठी मैया'? जानें इस कालजयी रचना के पीछे की टीम
दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस मधुर और आत्मा को झकझोर देने वाले गीत को किसने लिखा है और इसके पीछे किसका दिमाग है।
इस ऐतिहासिक भक्ति गीत के मार्मिक और अर्थपूर्ण बोल जाने-माने गीतकार ने लिखे हैं, जिन्होंने छठ पर्व की सदियों पुरानी परंपरा, नहाय-खाय, खरना, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के पूरे आध्यात्मिक विधान को बेहद सरल और आत्मीय शब्दों में पिरोया है। वहीं गाने की सुरीली धुन को बॉलीवुड के शीर्ष संगीतकारों द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें पारंपरिक ढोल, मंजीरे और बांसुरी के साथ आधुनिक सिंथेसाइजर का ऐसा संतुलन बनाया गया है जो सीधे अंतर्मन को भक्ति रस में डुबो देता है।
गायक की भावुक और रूहानी आवाज ने गीत के हर शब्द को जीवंत कर दिया है। वीडियो में घाटों की साफ-सफाई, सूप, दउरा, गन्ने और अर्घ्य के पारंपरिक दृश्यों को इतनी प्रामाणिकता से फिल्माया गया है कि विदेश और देश के महानगरों में रहने वाले पूर्वांचल और बिहार के लोग अपनी मिट्टी और जड़ों से दोबारा जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।
बॉलीवुड में क्षेत्रीय आस्था का बढ़ता दायरा और सांस्कृतिक सम्मान
अब तक हिंदी सिनेमा में दिवाली, होली, गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा और करवा चौथ जैसे त्योहारों पर दर्जनों सुपरहिट बॉलीवुड गाने बने हैं, लेकिन उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े महापर्व छठ पर मुख्यधारा के बॉलीवुड का ऐसा प्रयास पहले कभी देखने को नहीं मिला था।
इस गाने की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि क्षेत्रीय लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था को पूरे सम्मान, गरिमा और उच्च तकनीकी स्तर के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह वैश्विक स्तर पर सराही जाती है। यह गीत केवल एक संगीत वीडियो नहीं, बल्कि छठ महापर्व के त्याग, तपस्या और प्रकृति पूजा के संदेश को पूरी दुनिया के सामने गर्व से प्रस्तुत करने वाला एक सांस्कृतिक मील का पत्थर बन चुका है।