सैफ अली खान ने अपनी इस ब्लॉकबस्टर फिल्म को बताया 'गलती', बोले- उस वक्त उसे टाला नहीं जा सकता था

सैफ अली खान ने अपनी इस ब्लॉकबस्टर फिल्म को बताया 'गलती', बोले- उस वक्त उसे टाला नहीं जा सकता था

बॉलीवुड के नवाब सैफ अली खान हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार हैं जो अपने बेबाक बयानों और आत्मनिरीक्षण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने तीन दशक लंबे फिल्मी सफर में रोमांटिक हीरो से लेकर डार्क विलेन तक के किरदारों को परदे पर बखूबी जिया है। 'दिल चाहता है', 'कल हो ना हो', 'हम तुम' और 'ओमकारा' जैसी कालजयी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की मुख्य धारा में एक मजबूत पहचान दिलाई।

आम तौर पर कलाकार अपनी सफल और बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई करने वाली फिल्मों का श्रेय लेने से कभी पीछे नहीं हटते, लेकिन सैफ अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी ही एक बड़ी हिट फिल्म को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने सिनेप्रेमियों को हैरान कर दिया है। सैफ ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि करियर के उस मोड़ पर वह फिल्म करना रचनात्मक रूप से उनकी एक बड़ी 'गलती' थी, हालांकि उस समय के हालात ऐसे थे कि वे उस प्रोजेक्ट को टाल नहीं सकते थे।

'उस वक्त उसे टाला नहीं जा सकता था': सैफ ने बताई फिल्म साइन करने की मजबूरी

सैफ अली खान ने अपने संघर्ष के दिनों और 90 के दशक से लेकर 2000 के शुरुआती दशक के दौर को याद करते हुए बताया कि एक दौर ऐसा था जब उन्हें अपनी कला से ज्यादा इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए समझौते करने पड़े थे। सैफ ने साझा किया कि जब कोई युवा अभिनेता मुख्यधारा के बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ काम करता है, तो कई बार स्क्रिप्ट और किरदार पूरी तरह उसकी सोच के अनुरूप नहीं होते।

सैफ ने कहा कि उस समय एक बड़ी कमर्शियल और हिट फिल्म का हिस्सा बनना मेरी मजबूरी बन गया था। मेरे ऊपर बॉक्स ऑफिस पर खुद को साबित करने और स्थापित कलाकारों की कतार में बने रहने का भारी दबाव था। फिल्म ने टिकट खिड़की पर शानदार प्रदर्शन किया, गाने सुपरहिट रहे और दर्शकों ने उसे हाथों-हाथ लिया, लेकिन एक संजीदा अभिनेता के तौर पर मुझे हमेशा यह अहसास रहा कि वह किरदार रचनात्मक रूप से खोखला था। अगर आज मुझे वह विकल्प मिले, तो मैं कभी वैसी फिल्म का चुनाव न करूं। उस दौर के व्यावसायिक समीकरण ऐसे थे कि मैं उस प्रोजेक्ट को चाहकर भी मना नहीं कर सकता था।

राष्ट्रीय पुरस्कार से लेकर विवादों तक का सफर: प्रयोगधर्मी सिनेमा की ओर झुकाव

सैफ अली खान के करियर में फिल्म 'हम तुम' ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाया था, हालांकि उस पुरस्कार को लेकर भी उस वक्त सिनेमाई गलियारों में काफी चर्चाएं हुई थीं। सैफ ने कई साक्षात्कारों में यह माना है कि मुख्यधारा के रोमांटिक और फॉर्मूला सिनेमा ने उन्हें स्टारडम जरूर दिया, लेकिन असल संतुष्टि उन्हें तब मिली जब उन्होंने लीक से हटकर काम करना शुरू किया।

विशाल भारद्वाज की फिल्म 'ओमकारा' में 'लंगड़ा त्यागी' का किरदार हो, या फिर वेब सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' में सरताज सिंह की भूमिका—सैफ ने लगातार यह साबित किया कि वे एक सुरक्षित जोन में बंधकर रहने वाले अभिनेता नहीं हैं। सैफ का कहना है कि जब आप शुरुआती दौर में होते हैं, तो आपको गलतियों से सीखने का मौका मिलता है। वह हिट फिल्म भले ही आज उन्हें एक भूल जैसी लगती हो, लेकिन उसी ने उन्हें यह समझने की दृष्टि दी कि आगे चलकर उन्हें किस तरह की कहानियों और किरदारों का हिस्सा बनना है।

स्टीरियोटाइप तोड़ने में यकीन: अब सोच-समझकर चुनते हैं प्रोजेक्ट्स

अपने हालिया करियर ग्राफ पर बात करते हुए अभिनेता ने जोर देकर कहा कि आज वे अपने करियर के उस मुकाम पर हैं जहां वे किसी दबाव या बॉक्स ऑफिस के दिखावे के लिए काम नहीं करते। आज वे केवल उन निर्देशकों और पटकथाओं के साथ जुड़ते हैं जो उन्हें एक कलाकार के तौर पर चुनौती देती हैं।

सैफ ने कहा कि सफलता और असफलता से ज्यादा यह मायने रखता है कि आप उस काम पर गर्व कर पा रहे हैं या नहीं। अतीत की कुछ फिल्मों को उन्होंने भले ही 'गलती' का नाम दिया हो, लेकिन साथ ही यह भी माना कि वे गलतियां उनके विकास की अनिवार्य सीढ़ियां थीं। उनका यह ईमानदार कबूलनामा दर्शाता है कि एक सच्चा कलाकार अपनी व्यावसायिक सफलताओं के अंधे मोह में कभी अपनी कलात्मक निष्ठा को नहीं भूलता।

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