सरयू खतरे के निशान के पार, कानपुर के 5 गांवों में घुसा गंगा का पानी; प्रयागराज में बढ़ा बाढ़ का खतरा

सरयू खतरे के निशान के पार, कानपुर के 5 गांवों में घुसा गंगा का पानी; प्रयागराज में बढ़ा बाढ़ का खतरा

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश और बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण प्रमुख नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। गोरखपुर के बड़हलगंज और तुर्तीपार क्षेत्र में सरयू (घाघरा) नदी लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, तुर्तीपार में सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 72 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज की गई है।

नदी में आए इस उफान के चलते बड़हलगंज में स्थित मुक्तिपथ के सभी 40 प्लेटफार्म और लेटाघाट का पाथवे पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। दक्षिणांचल के कछारी इलाके के करीब 20 गांव बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। जैतपुर, ज्ञानकोल, गोनघट, बगहा देवार, बलथर और खैराटी समेत दर्जनों गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क कट गया है। ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों की तलाश में छतों और ऊंचे बांधों पर शरण लेने को विवश हैं।

कानपुर में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार: कटरी के 5 गांवों में भरा पानी

कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण कटरी क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहरा गया है। पिछले 24 घंटों में गंगा के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। गंगा बैराज पर जलस्तर चेतावनी बिंदु 114 मीटर को पार कर 114.630 मीटर पर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान (115 मीटर) से महज कुछ ही फासले पर है।

गंगा में बढ़े जलस्तर के कारण कटरी के पांच प्रमुख गांवों—भगवानदीनपुरवा, भोपालपुरवा, बनियापुरवा, दुर्गापुर गिल्लीपुरवा और डल्लपुरवा की गलियों और मुख्य रास्तों पर बाढ़ का पानी घुस गया है। ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन द्वारा नावों और ट्रैक्टरों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा भैरोघाट क्रियाकर्म स्थल चारों तरफ से पानी से घिर गया है और बनियापुरवा स्थित 15 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पानी भर जाने से वहां काम ठप हो गया है। बढ़ते खतरे को देखते हुए किनारे बसे ग्रामीण बैराज हाईवे के आसपास सुरक्षित ठिकानों पर डेरा डालने लगे हैं।

प्रयागराज में टोंस और बेलन ने बढ़ाई टेंशन: गंगा-यमुना पर दबाव बढ़ा

संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, लेकिन अब टोंस और उसकी सहायक बेलन नदी के भारी डिस्चार्ज ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बेलन नदी में बैराज से करीब 90 हजार क्यूसेक पानी चरणबद्ध तरीके से छोड़ा गया है। यह पानी टोंस के रास्ते गंगा में मिलने के बाद छतनाग के आगे गंगा के प्रवाह को प्रभावित करेगा।

फाफामऊ में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और यह 82 मीटर के स्तर के करीब पहुंच चुका है। दूसरी ओर, कानपुर बैराज से भी गंगा में लाखों क्यूसेक पानी लगातार डिस्चार्ज किया जा रहा है। ऐसे में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान प्रयागराज के नैनी, दारागंज, छोटा बघाड़ा और सलोरी जैसे निचले रिहायशी इलाकों में पानी का बैकफ्लो और दबाव बढ़ने की पूरी आशंका है।

प्रशासन हाई अलर्ट पर: राहत और निगरानी के सख्त निर्देश

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए संबंधित जिला प्रशासनों ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने आशा बहुओं और स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट पर रखा है ताकि जलभराव वाले गांवों में बीमारियों की रोकथाम और गर्भवती महिलाओं व मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों को सतर्क रहने और उफनती नदियों के करीब न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

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