एकता कपूर ने बॉलीवुड पर लगाए गंभीर आरोप, बोलीं- इंडस्ट्री के भीतर फैला है 'हिंदू फोबिया'

एकता कपूर ने बॉलीवुड पर लगाए गंभीर आरोप, बोलीं- इंडस्ट्री के भीतर फैला है 'हिंदू फोबिया'

भारतीय टेलीविजन और मनोरंजन जगत की सबसे ताकतवर हस्तियों में शुमार फिल्म व टीवी निर्माता एकता कपूर ने बॉलीवुड के आंतरिक माहौल और सोच को लेकर बेहद बेबाक और चौंकाने वाला बयान दिया है। एक हालिया इंटरव्यू के दौरान एकता कपूर ने मनोरंजन उद्योग के भीतर कथित रूप से फैले 'हिंदू फोबिया' (Hinduphobia) और धार्मिक पहचान को लेकर दोहरे नजरिए पर खुलकर अपनी राय रखी। एकता ने अपने शुरुआती दिनों का एक चर्चित और बेहद निजी वाकया साझा करते हुए बताया कि एक बार वे सिद्धि विनायक मंदिर में दर्शन करने के बाद माथे पर बड़ा लाल टीका और चंदन लगाए हुए सीधे अपने दोस्तों के साथ एक नाइट क्लब पहुंच गई थीं। वहां मौजूद लोगों और इंडस्ट्री के सहयोगियों ने उन्हें जिस असहज और विचित्र नजरिए से देखा, उसने उन्हें भीतर तक हिलाकर रख दिया था। एकता का कहना है कि हमारी इंडस्ट्री में आधुनिकता का पैमाना पश्चिमी तौर-तरीके अपनाना माना जाता है, जबकि अपनी ही संस्कृति और धार्मिक आस्था का सार्वजनिक प्रदर्शन करने वालों को अजीब या दकियानूसी समझ लिया जाता है।

मंदिर से नाइट क्लब का वो किस्सा: 'मुझे लगा कि मैंने क्या गलत कर दिया?'

इंटरव्यू में उस रात की घटना को याद करते हुए एकता कपूर ने कहा, "मैं मंगलवार को हमेशा मंदिर जाती थी। उस दिन पूजा-अर्चना के बाद मैं सीधे एक पार्टी में शामिल होने नाइट क्लब चली गई। मेरे माथे पर पूजा का तिलक और रोली लगी हुई थी। जैसे ही मैं क्लब के भीतर दाखिल हुई, वहां का माहौल ऐसा हो गया मानो मैंने कोई सामाजिक अपराध कर दिया हो। लोग मुझे घूर-घूर कर देख रहे थे, कानाफूसी कर रहे थे और असहज महसूस कर रहे थे। मुझे उस वक्त समझ नहीं आया कि अपनी आस्था को लेकर किसी को इतनी परेशानी क्यों हो सकती है? अगर कोई पश्चिमी परिधान पहनकर या किसी अन्य विदेशी शैली में आता है तो वह कूल (Cool) कहलाता है, लेकिन अगर आप भारतीय परंपरा, तिलक या कलावा बांधकर नजर आएं, तो इंडस्ट्री का एक वर्ग आपको बैकवर्ड या अजीब मान लेता है।"

इंडस्ट्री में 'हिंदू फोबिया' का आरोप: आधुनिकता की आड़ में छिपी सोच पर प्रहार

एकता कपूर ने साफ शब्दों में कहा कि मनोरंजन उद्योग का एक खास तबका खुद को बेहद प्रगतिशील और उदारवादी (लिबरल) दिखाता है, लेकिन असलियत में उनकी सोच में अपनी ही जड़ों और हिंदू परंपराओं के प्रति एक अजीब किस्म का पूर्वाग्रह भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि सालों तक टेलीविजन धारावाहिकों में पूजा-पाठ, आरती, तुलसी विवाह और हिंदू रीति-रिवाजों को दिखाने के लिए बुद्धिजीवी तबके द्वारा उनका मजाक उड़ाया गया। एकता ने कहा, "जब मैंने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' या 'कहानी घर घर की' में भारतीय परिवारों की पूजा पद्धति और संस्कृति को दिखाया, तो कुछ लोगों ने इसे 'रेग्रेसिव' (प्रतिगामी) करार दिया। लेकिन वही रीति-रिवाज भारत के करोड़ों आम परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे। इंडस्ट्री के भीतर यह धारणा बना दी गई थी कि अगर आप धर्मपरायण हैं तो आप मॉडर्न नहीं हो सकते।"

'मुझे अपनी आस्था पर गर्व है': अंगूठियों और ज्योतिष को लेकर आलोचनाओं पर दिया जवाब

एकता कपूर अपने हाथों में कई रत्नजड़ित अंगूठियां, कलावा और ज्योतिषीय विश्वासों को लेकर हमेशा से चर्चा और मीम्स का केंद्र रही हैं। इस पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी अपनी मान्यताओं को किसी से छिपाने की कोशिश नहीं की। एकता ने कहा, "लोग मेरी अंगूठियों, मेरे ताबीज या मेरे भगवान में विश्वास को लेकर सालों तक हंसते रहे। लेकिन मुझे कभी इस बात की परवाह नहीं रही कि कोई सोफेस्टिकेटेड सर्कल मेरे बारे में क्या सोचता है। मेरी आस्था मेरे और मेरे ईश्वर के बीच का व्यक्तिगत रिश्ता है। जब अन्य धर्मों के लोग अपने धार्मिक प्रतीकों को गर्व से पहनते हैं तो उनकी तारीफ की जाती है, लेकिन जब कोई हिंदू अपनी परंपरा का पालन करता है तो उसे तुरंत अंधविश्वास या असहिष्णुता से जोड़ दिया जाता है। यह दोहरा रवैया बंद होना चाहिए।"

'द साबरमती रिपोर्ट' और कंटेंट के जरिए बदलता दौर: अब खुलकर सामने आ रहा सच

हाल के वर्षों में एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस ने सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर फिल्में बनाई हैं, जिनमें गोधरा ट्रेन अग्निकांड पर आधारित फिल्म 'द साबरमती रिपोर्ट' भी शामिल है। एकता ने संकेत दिया कि समय के साथ दर्शकों और समाज में एक बड़ा बदलाव आया है। आज का युवा अपनी संस्कृति, इतिहास और धार्मिक पहचान को लेकर न केवल जागरूक है बल्कि उस पर गर्व भी महसूस करता है। एकता ने कहा कि अब वह दौर बीत चुका है जब अपनी परंपराओं को पर्दे के पीछे छुपाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि कहानीकारों को बिना किसी संकोच के भारत की वास्तविक जड़ों और सनातन परंपराओं से जुड़े सच को सामने लाना चाहिए, बिना इस डर के कि कोई तथाकथित लिबरल लॉबी उनके खिलाफ क्या नैरेटिव बनाएगी।

सोशल मीडिया पर बयानों की गूंज: फैंस और नेटिजन्स ने किया एकता के बेबाक अंदाज का समर्थन

एकता कपूर का यह इंटरव्यू सामने आते ही सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो गया है। लाखों यूजर्स उनके इस साहसी और स्पष्टवादी नजरिए की तारीफ कर रहे हैं। कई नेटिजन्स ने लिखा कि एकता कपूर ने बॉलीवुड के उस दोगलेपन पर सटीक चोट की है जिससे आम दर्शक वर्षों से नाराज थे। लोगों का कहना है कि भारतीय सिनेमा को अपनी ही संस्कृति का सम्मान करना सीखना होगा, न कि उसे हीन भावना से देखना चाहिए। एकता के इस बयान ने मनोरंजन जगत में धर्मनिरपेक्षता की आड़ में चलने वाले पूर्वाग्रहों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।