जब नाना पाटेकर ने अमिताभ बच्चन से मांगी थी ₹1 ज्यादा फीस: बोले- 'बच्चन साहब के साथ काम करूंगा तो...'
हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी दो कद्दावर, भारी-भरकम आवाज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस वाले अभिनेताओं की बात होती है, तो अमिताभ बच्चन और नाना पाटेकर का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। दोनों ही अपने अभिनय के ऐसे महारथी हैं जिनका अंदाज जुदा और अपने आप में एक अलग स्कूल माना जाता है। नब्बे के दशक के अंत में जब निर्देशक मेहुल कुमार ने इन दो पावरहाउस अभिनेताओं को एक साथ एक ही फ्रेम में लाने की योजना बनाई, तो बॉलीवुड के गलियारों में हलचल मच गई थी। लेकिन इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को साइन करते वक्त नाना पाटेकर ने निर्माता-निर्देशक के सामने ऐसी अनोखी और अप्रत्याशित शर्त रख दी थी, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया था। नाना ने साफ कह दिया था कि वे यह फिल्म तभी करेंगे जब उन्हें सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से पूरे एक रुपये ज्यादा फीस दी जाएगी।
फिल्म 'कोहराम' और नाना का बेबाक अंदाज: 'बच्चन साहब से एक रुपया ज्यादा लूंगा'
यह दिलचस्प वाकया साल 1999 में रिलीज हुई एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'कोहराम' (Kohram) की कास्टिंग के दौरान का है। फिल्म में अमिताभ बच्चन कर्नल बलबीर सिंह सोढ़ी (और दादा भाई) के किरदार में थे, जबकि नाना पाटेकर को तेज-तर्रार और सनकी पुलिस अफसर मेजर अजीत आर्य की भूमिका निभानी थी। जब निर्देशक मेहुल कुमार नाना पाटेकर के पास स्क्रिप्ट और कॉन्ट्रैक्ट लेकर पहुंचे, तो नाना कहानी सुनकर बेहद प्रभावित हुए। लेकिन जब बात फीस (पारिश्रमिक) के समझौते पर आई, तो नाना ने अपने चिर-परिचित ठेठ अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा, "मेहुल भाई, मैं यह फिल्म जरूर करूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है। आप बच्चन साहब को जो भी रकम दे रहे हैं, मुझे उससे ठीक ₹1 ज्यादा चाहिए। अगर उन्हें एक करोड़ दे रहे हैं, तो मुझे एक करोड़ एक रुपया चाहिए।"
अहंकार नहीं, महानायक के प्रति सम्मान और नाना की चुटीली फितरत
पहली नजर में किसी को भी यह लग सकता था कि नाना पाटेकर यह शर्त अपने घमंड या ईगो के चलते रख रहे हैं, लेकिन असल में इसके पीछे नाना का गहरा सम्मान और उनका चुटीला स्वभाव छिपा हुआ था। जब मेहुल कुमार ने हैरानी से पूछा कि ऐसी अजीब शर्त की वजह क्या है, तो नाना ने हंसते हुए जवाब दिया, "बच्चन साहब देश के सबसे बड़े और महान अभिनेता हैं। उनके साथ एक ही फ्रेम में खड़े होकर डायलॉग बोलना कोई मामूली बात नहीं है। जब मैं स्क्रीन पर उनके सामने आऊंगा, तो मुझे यह अहसास होना चाहिए कि मैंने उनके साथ बराबरी पर काम किया है। और यह ₹1 ज्यादा मुझे इस बात का गुरूर नहीं देगा, बल्कि मुझे याद दिलाएगा कि मुझे बच्चन साहब के स्तर का काम करके दिखाना है!" नाना के इस हाजिरजवाबी और तर्क को सुनकर निर्देशक अपनी हंसी नहीं रोक पाए और उन्होंने मुस्कुराते हुए यह शर्त स्वीकार कर ली।
सेट पर कैसा था माहौल? जब अफवाहों को दरकिनार कर दोनों बने दोस्त
उस दौर में फिल्मी पत्रिकाओं और मीडिया में इस तरह की अटकलें जोरों पर थीं कि अमिताभ बच्चन और नाना पाटेकर जैसे दो गुस्सैल और सख्त मिजाज अभिनेताओं का एक सेट पर साथ काम करना नामुमकिन साबित होगा। लोगों को लगता था कि सेट पर दोनों के बीच टकराव (ईगो क्लैश) देखने को मिलेगा। लेकिन जब शूटिंग शुरू हुई, तो हकीकत इन अफवाहों से बिल्कुल उलट निकली। नाना पाटेकर सेट पर अमिताभ बच्चन का बेहद आदर करते थे, जबकि बच्चन साहब भी नाना की सहजता, अभिनय की गहराई और उनके अनुशासन के कायल हो गए। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच गजब की जुगलबंदी देखने को मिली और लंच ब्रेक में दोनों एक साथ बैठकर खाना खाते और गपशप करते नजर आते थे।
परदे पर जब टकराए दो 'एंग्री यंग मैन': सिनेमाघरों में गूंज उठी थीं तालियां
जब 'कोहराम' सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों के लिए दोनों दिग्गजों को आमने-सामने देखना किसी विजुअल ट्रीट से कम नहीं था। एक तरफ अमिताभ बच्चन का संजीदा, भारी आवाज वाला और गरिमापूर्ण अभिनय था, तो दूसरी तरफ नाना पाटेकर की बिजली जैसी फुर्ती, तीखे वन-लाइनर्स और अनूठा बॉडी लैंग्वेज। फिल्म के कई दृश्यों में जब दोनों के संवाद एक-दूसरे से टकराते थे, तो सिनेमा हॉल तालियों और सीटियों से गूंज उठते थे। आज भी जब भारतीय सिनेमा के यादगार मल्टी-स्टारर पलों को याद किया जाता है, तो अमिताभ और नाना की 'कोहराम' और उस एक रुपये ज्यादा फीस का यह किस्सा सिनेप्रेमियों के चेहरों पर बरबस मुस्कान बिखेर देता है।