फॉर्म 7 पर लगी कैप, 'ECINet' की तकनीकी समीक्षा और BLO की घर-घर दस्तक; जानिए EC में क्या-क्या बदला
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे भारी सियासी हंगामे, विपक्षी दलों के कड़े विरोध और आयोग के भीतर ही कुछ प्रक्रियाओं पर उठी आंतरिक आपत्तियों के बाद निर्वाचन तंत्र में व्यापक और अभूतपूर्व प्रशासनिक सुधार लागू कर दिए गए हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR), थोक में वोटरों के नाम कटने की शिकायतों और आयोग के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म 'ECINet' की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों की पूर्ण पीठ ने एक अहम नीतिगत मोड़ लिया है। जिन मुद्दों पर शुरुआत में आयोग ने आपत्तियों को खारिज किया था, अब उन पर न केवल व्यापक संशोधन जारी किए गए हैं, बल्कि पूरी चुनावी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आम नागरिक के अनुकूल बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
फॉर्म-7 पर सख्ती: वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के थोक खेल पर लगी लगाम, सीमा तय
चुनाव आयोग द्वारा किए गए सबसे बड़े और निर्णायक बदलावों में फॉर्म-7 (Form-7) के नियम शामिल हैं, जिसका उपयोग किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने या उस पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। कर्नाटक, ओडिशा और कई अन्य राज्यों से बड़े पैमाने पर संगठित तरीके से हजारों मतदाताओं के नाम कटवाने की फर्जी अर्जियां (बल्क फाइलिंग) दाखिल करने की शिकायतें सामने आई थीं। इस दुर्भावनापूर्ण खेल को रोकने के लिए आयोग ने 9 अक्टूबर को आदेश जारी कर फॉर्म-7 दाखिल करने की अधिकतम संख्या तय कर दी है।
नए नियमों के अनुसार:
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रिवीजन अवधि के दौरान: दावे और आपत्तियों की विशेष अवधि (SIR/समरी रिवीजन) के दौरान कोई भी एक पंजीकृत मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही दाखिल कर सकेगा।
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सामान्य दिनों में: निरंतर अपडेशन (Continuous Updation) के दौरान एक व्यक्ति एक कैलेंडर माह में अधिकतम 5 फॉर्म-7 ही जमा कर पाएगा।
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व्यक्तिगत सुनवाई अनिवार्य: केवल फॉर्म जमा कर देने से नाम नहीं कटेगा। चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) को आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से सुनना होगा और उसका बयान दर्ज करना होगा। इसके साथ ही जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति उठाई गई है, उसे भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
'ECINet' डेटाबेस की समीक्षा: IIT और IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ करेंगे डिजिटल सुरक्षा का ऑडिट
निर्वाचन आयोग के सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म 'ECINet' को लेकर राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों ने डेटा सुरक्षा, बैकएंड एक्सेस और गोपनीयता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। इन चिंताओं को दूर करने के लिए आयोग ने 'ECINet' के पूरे सिस्टम की व्यापक तकनीकी जांच का फैसला किया है। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति में देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों—भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT)—के स्वतंत्र साइबर एवं डेटा विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह समिति पोर्टल के डेटा एक्सेस लेयर्स, सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑडिट ट्रेल्स की बारीकी से जांच करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी स्तर पर मतदाता सूची के डेटाबेस के साथ कोई अनधिकृत छेड़छाड़ संभव न हो।
फॉर्म-6 से हटी विवादित घोषणा: फर्स्ट-टाइम वोटर्स के लिए राहत, कानूनी आधार पर उठे थे सवाल
नए मतदाताओं (फर्स्ट-टाइम वोटर्स) के पंजीकरण के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 (Form-6) में जुलाई के दौरान एक अतिरिक्त शपथ/घोषणापत्र जोड़ा गया था। इस नई शर्त को लेकर खुद चुनाव आयुक्तों के बीच यह आपत्ति दर्ज कराई गई थी कि इसका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है और यह युवाओं के लिए मतदाता बनने की राह में अनावश्यक नौकरशाही बाधा खड़ी कर रही है। इस विवादित घोषणापत्र को लेकर मचे बवाल के बाद आयोग ने इसे वापस लेने का फैसला किया है। जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर (SIR) का काम पूरा हो चुका है, वहां के ऑनलाइन पोर्टल और फिजिकल फॉर्म-6 से इस विवादित घोषणा को पूरी तरह हटा दिया गया है, जिससे अब नए वोटरों का पंजीकरण पहले की तरह सरल और बाधा-रहित हो गया है।
घर-घर दस्तक देंगे BLO: जनता को ERO दफ्तर के चक्कर लगाने से मुक्ति, 'होम विजिट' व्यवस्था लागू
मतदाताओं को सबसे बड़ी व्यावहारिक राहत उनके सत्यापन की प्रक्रिया में दी गई है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के डेटा में मिसमैच, तकनीकी विसंगतियां या पते के अंतर के चलते नोटिस जारी हुए थे, उन्हें अब चुनाव पंजीकरण कार्यालयों (ERO) या कचहरियों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद संबंधित मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें मौके पर ही ECINet पर अपलोड करेंगे। इसके साथ ही:
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व्यक्तिगत सुनवाई केवल असाधारण और विशेष परिस्थितियों में ही होगी, और वह भी प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी।
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रैन बसेरों में रहने वाले गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष सहायता डेस्क लगाए जाएंगे ताकि कोई भी वास्तविक नागरिक मताधिकार से वंचित न हो।
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बीएलओ को निर्देश दिया गया है कि वे पुरानी और नई मतदाता सूचियों का मिलान करें और जिन मतदाताओं के नाम छूटे हुए पाए जाएं, उनके घर जाकर तुरंत नया फॉर्म-6 भरवाएं।
आयोग के कामकाज में पारदर्शिता: एजेंडा, मिनट्स और विदेशी दौरों पर नई सख्त आचार संहिता
राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जा रहे 'एकतरफा फैसलों' के आरोपों को खारिज करने और संस्थागत विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित करने के लिए आयोग ने अपने आंतरिक कामकाज में भी कई कड़े नियम लागू किए हैं:
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बैठक से पहले एजेंडा और मिनट्स: चुनाव आयोग की किसी भी औपचारिक बैठक से पहले सभी आयुक्तों को बाकायदा एजेंडा वितरित किया जाएगा और बैठक समाप्त होने के बाद विधिवत 'मिनट्स ऑफ द मीटिंग' रिकॉर्ड किए जाएंगे।
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नए आईटी प्रोजेक्ट्स की मंजूरी: आयोग के किसी भी नए सॉफ्टवेयर, आईटी मॉड्यूल या पोर्टल को लॉन्च करने से पहले उसे आंतरिक समीक्षा समिति और फिर पूरे आयोग की औपचारिक मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
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अधिकारियों की विदेशी यात्राओं पर नियंत्रण: आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के विदेशी दौरों के लिए अब चुनाव आयुक्तों की पूर्व अनुमति को अनिवार्य कर दिया गया है ताकि प्रशासनिक अनुशासन बना रहे।
इसके साथ ही आयोग ने जमीनी स्तर पर विसंगतियों को दुरुस्त करने के लिए दावों के निपटारे की समय सीमा दिल्ली में 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 26 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। यह तमाम बदलाव दर्शाते हैं कि विपक्षी दलों के दबाव और जनता के आक्रोश के बाद चुनाव आयोग ने रक्षात्मक रुख छोड़कर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार का रास्ता चुना है।