'मधुशाला' लिखने पर हरिवंश राय बच्चन को झेलना पड़ा था कड़ा विरोध, महात्मा गांधी ने हस्तक्षेप कर खत्म किया था विवाद

'मधुशाला' लिखने पर हरिवंश राय बच्चन को झेलना पड़ा था कड़ा विरोध, महात्मा गांधी ने हस्तक्षेप कर खत्म किया था विवाद

नई दिल्ली: सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पिता, महान कवि हरिवंश राय बच्चन को उनकी कालजयी रचना 'मधुशाला' के लिए कभी देशभर में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। आलोचकों का आरोप था कि यह कविता युवाओं को मद्यपान के लिए उकसाती है। विवाद इतना बढ़ा कि मामला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तक जा पहुंचा। हालांकि, कवि द्वारा 'मधुशाला' का वास्तविक अर्थ स्पष्ट करने के बाद गांधी जी ने इसे सराहनीय बताया और विवाद हमेशा के लिए शांत हो गया।

शराब से दूर थे बच्चन जी

अमिताभ बच्चन ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता ने जीवन में कभी शराब को हाथ नहीं लगाया था, बावजूद इसके उन्होंने मधुशाला की गहराई से रचना की। 1935 में लिखी गई यह कविता मदिरा नहीं, बल्कि जीवन की उलझनों और आत्मा की खोज का प्रतीक है। आज भी 'मधुशाला' हिंदी साहित्य की सबसे प्रभावशाली रचनाओं में गिनी जाती है, जिसे मन्ना डे जैसे दिग्गजों ने भी स्वर दिया है।