ऑस्कर में भारत की आधिकारिक एंट्री 'गोंधल' अब हिंदी में सिनेमाघरों में मचाएगी धमाल: डबिंग पूरी

ऑस्कर में भारत की आधिकारिक एंट्री 'गोंधल' अब हिंदी में सिनेमाघरों में मचाएगी धमाल: डबिंग पूरी

भारतीय सिनेमा के इतिहास में क्षेत्रीय फिल्मों ने अपनी दमदार कहानियों और मौलिकता के दम पर हमेशा अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का नाम रोशन किया है। इसी कड़ी में मराठी सिनेमा की साइकोलॉजिकल और कल्चरल थ्रिलर फिल्म 'गोंधल' (Gondhal) ने देश भर में तहलका मचा दिया है। 33 फिल्मों की कड़ी प्रतिस्पर्धा को पछाड़ते हुए इस फिल्म को 99वें एकेडमी पुरस्कारों (Oscars) की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया है। ऑस्कर में चयन के बाद जहां दर्शक इस मास्टरपीस को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर देखने के लिए बेताब थे, वहीं अब मेकर्स ने इसे लेकर एक चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है। फिल्म की हिंदी, तमिल और तेलुगू डबिंग का काम पूरा हो चुका है और इसे सीधे ओटीटी पर बेचने के बजाय एक बार फिर देश भर के सिनेमाघरों में बड़े पैमाने पर रिलीज करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

पैन इंडिया थिएट्रिकल रिलीज: हिंदी, तमिल और तेलुगू में तैयार हुई 'गोंधल'

संतोष डावखर के निर्देशन में बनी फिल्म 'गोंधल' अब केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह उत्तर भारत के हिंदी भाषी दर्शकों से लेकर दक्षिण भारत के सिनेप्रेमियों तक पहुंचेगी। फिल्म के एडिटर आशीष म्हात्रे ने हाल ही में पुष्टि करते हुए बताया कि फिल्म के अन्य भाषाई संस्करणों पर काम पूरा हो चुका है।

आशीष म्हात्रे के मुताबिक, फिल्म का हिंदी, तमिल और तेलुगू वर्जन पूरी तरह तैयार है। डबिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और अब मेकर्स कुछ ही दिनों के भीतर इसके नए थिएट्रिकल रिलीज की आधिकारिक तारीख का ऐलान करने जा रहे हैं। मेकर्स का मानना है कि जो फिल्म दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है, उसे देश के हर कोने में दर्शक अपनी भाषा में बड़े पर्दे पर देखने के हकदार हैं।

डिजिटल स्ट्रीमिंग से दूरी: आखिर मेकर्स क्यों नहीं ला रहे 'गोंधल' को OTT पर?

अक्सर देखा गया है कि क्रिटिकली अक्लेम्ड या रीजनल फिल्में अवॉर्ड्स में जाने के तुरंत बाद किसी बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम हो जाती हैं। हालांकि, 'गोंधल' के निर्माताओं ने फिलहाल ओटीटी से दूरी बनाकर सबको हैरान कर दिया है। जब यह सवाल उठा कि दर्शक घर बैठे इसे कब देख पाएंगे, तो मेकर्स ने साफ कर दिया कि यह फिल्म छोटे पर्दों के लिए बनी ही नहीं है।

फिल्म के एडिटर आशीष म्हात्रे ने इस फैसले के पीछे की असली वजह का खुलासा करते हुए कहा कि मोबाइल और टीवी जैसे छोटे स्क्रीन्स पर सिनेमाई अनुभव खत्म हो जाता है। उन्होंने बताया:

"जब दर्शक किसी फिल्म को मोबाइल या टीवी की छोटी स्क्रीन पर देखते हैं, तो उनका ध्यान लगातार बंटता रहता है। कभी नोटिफिकेशन आ जाते हैं, तो कभी घर के माहौल से एकाग्रता टूट जाती है। 'गोंधल' जैसी फिल्म की आत्मा उसके विजुअल्स, सन्नाटे और बैकग्राउंड स्कोर में बसी है। जब आप इसे सैकड़ों अजनबियों के साथ अंधेरे थिएटर में बैठकर बड़ी स्क्रीन पर देखते हैं, तभी उसका असली रोमांच महसूस होता है। बड़े पर्दे और थिएटर का साउंड एक्सपीरियंस फिल्म के असर को कई गुना बढ़ा देता है, इसलिए मेकर्स ने इसे पहले सिनेमाघरों में ही उतारने की ठोस रणनीति बनाई है।"

क्या है 'गोंधल' की अनोखी कहानी: 26 मिनट का अनकट सिंगल शॉट सीन

'गोंधल' की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में बुनी गई है। महाराष्ट्र में 'गोंधल' नवविवाहित जोड़ों के लिए कुलदेवता के सम्मान में आयोजित होने वाली एक प्राचीन, रहस्यमयी और पवित्र धार्मिक रस्म होती है। यह पूरी कहानी उसी गोंधल की एक रहस्यमयी रात के इर्द-गिर्द घूमती है, जो देखते ही देखते प्रेम, लालच, सत्ता, विश्वासघात और अपराध के मनोवैज्ञानिक चक्रव्यूह में तब्दील हो जाती है।

फिल्म की सबसे बड़ी तकनीकी खासियत इसका ओपनिंग सीक्वेंस है। बताया जा रहा है कि फिल्म का शुरुआती दृश्य लगभग 25 से 26 मिनट लंबा है, जिसे बिना किसी कट के सिंगल टेक में शूट किया गया है। इस तरह का साहसिक कैमरा वर्क और डायरेक्शन भारतीय सिनेमा में विरले ही देखने को मिलता है। यही वजह है कि 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में निर्देशक संतोष डावखर को इसके लिए सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड से नवाजा गया था और आईएमडीबी (IMDb) पर भी इसे 8.9 की जबरदस्त रेटिंग मिली है।

'श्वास', 'हरिश्चंद्राची फैक्टरी' और 'कोर्ट' के बाद चौथी ऐतिहासिक उपलब्धि

मराठी सिनेमा ने हमेशा से अपनी बौद्धिक और यथार्थवादी कहानियों से देश का मान बढ़ाया है। 'गोंधल' ऑस्कर में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने वाली चौथी मराठी फिल्म बन गई है। इससे पहले साल 2004 में 'श्वास', 2009 में 'हरिश्चंद्राची फैक्टरी' और 2015 में 'कोर्ट' जैसी कालजयी कृतियों को यह गौरव हासिल हुआ था।

जब यह फिल्म मूल रूप से सीमित स्क्रीन्स पर रिलीज हुई थी, तो इसने सामान्य बॉक्स ऑफिस कारोबार किया था। लेकिन ऑस्कर चयन के बाद अब पूरे देश में इस फिल्म को देखने की जबरदस्त मांग उठ रही है। मेकर्स इसी हाइप और दर्शकों की उत्सुकता को भुनाने के लिए इसे हिंदी में डब कर देशव्यापी रिलीज दे रहे हैं, ताकि थिएटर मालिकों को भी एक उम्दा कंटेंट आधारित फिल्म का साथ मिल सके।